दरभंगा | 1 अप्रैल 2026: इतिहास के पन्नों में पहली अप्रैल का दिन हमारे राज्य के लिए एक बहुत ही गौरवशाली और ऐतिहासिक महत्व रखता है। साल 1912 में ठीक इसी दिन हमारा यह राज्य विशाल बंगाल प्रांत से अलग होकर एक स्वतंत्र और नए स्वरूप में दुनिया के सामने आया था। इस ऐतिहासिक और भावुक पल को याद करते हुए आज Darbhanga के वकीलों ने एक बेहद खास और भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया है।
स्थानीय बार एसोसिएशन भवन में बुधवार को इस स्थापना दिवस को बड़े ही हर्षोल्लास और गर्व के साथ मनाया गया। वरीय अधिवक्ता रमण जी चौधरी की अध्यक्षता में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में इतिहास के उन सुनहरे और संघर्षपूर्ण पन्नों को दोबारा पलटा गया। वकीलों ने 1 अप्रैल 1912 के उस मूल और अखंड नक्शे को भी प्रदर्शित किया, जब यह एक संयुक्त और बहुत ही विशाल प्रांत हुआ करता था।
सच्चिदानंद सिन्हा के नेतृत्व में वकीलों का ऐतिहासिक संघर्ष
इस भव्य समारोह को संबोधित करते हुए लोक अभियोजक अमरेंद्र नारायण झा ने राज्य के निर्माण से जुड़ी कई अहम और रोचक जानकारियां साझा कीं। उन्होंने बताया कि इस स्वतंत्र राज्य के गठन का सपना इतनी आसानी से पूरा नहीं हुआ था, बल्कि इसके पीछे दशकों का एक लंबा संघर्ष छिपा था। महान शिक्षाविद और प्रख्यात अधिवक्ता सच्चिदानंद सिन्हा के नेतृत्व में सैकड़ों वकीलों ने इसके लिए एक लंबी और कूटनीतिक लड़ाई लड़ी थी।
यह उन्हीं दूरदर्शी महापुरुषों के अथक और निरंतर प्रयासों का सुखद परिणाम था कि हमारा यह प्रांत अंततः एक स्वतंत्र अस्तित्व में आ सका। वकीलों का यह बौद्धिक संघर्ष आज भी हमारे आत्मसम्मान, सांस्कृतिक पहचान और गौरव का एक बहुत बड़ा प्रतीक माना जाता है। इस नए और स्वतंत्र प्रांत के पहले उप-राज्यपाल के रूप में सर चार्ल्स स्टुअर्ट बेली को नियुक्त किया गया था, जिन्होंने इसका प्रारंभिक प्रशासनिक ढांचा तैयार किया था।
Darbhanga बार एसोसिएशन के इस कार्यक्रम में उपस्थित सभी न्यायविदों ने उन महान स्वतंत्रता सेनानियों और बुद्धिजीवियों को अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने युवा पीढ़ी से यह विशेष अपील भी की कि वे अपने राज्य के इस गौरवशाली और संघर्षपूर्ण इतिहास को कभी न भूलें, क्योंकि जो समाज अपना इतिहास भूल जाता है, वह कभी एक मजबूत भविष्य का निर्माण नहीं कर सकता।
5 प्रमंडल और 21 जिलों से मिलकर बना था नया प्रांत
इस ऐतिहासिक मौके पर वरीय अधिवक्ता अरुण कुमार चौधरी ने राज्य के प्रारंभिक भौगोलिक और प्रशासनिक गठन पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि इस नए राज्य को आधिकारिक रूप से अस्तित्व में लाने के लिए 22 मार्च 1912 को ऐतिहासिक अधिसूचना संख्या 289 जारी की गई थी। इसी अहम अधिसूचना के तहत पहली अप्रैल 1912 को इस नए और विशाल प्रांत का विधिवत जन्म हुआ था।
इस नवगठित राज्य में प्रशासनिक सुविधा और सुचारू शासन व्यवस्था के लिए कुल पांच बड़े प्रमंडल बनाए गए थे, जिनके अंतर्गत 21 अहम जिलों को बंगाल से अलग कर शामिल किया गया था। भागलपुर प्रमंडल में मुंगेर, भागलपुर, पूर्णिया और प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण संथाल परगना जैसे अहम जिलों को एक साथ जोड़ा गया था। वहीं पटना प्रमंडल के तहत गया, पटना और शाहाबाद जिलों को शामिल कर ऐतिहासिक शहर पटना को इस नए प्रांत की राजधानी घोषित किया गया था।
तिरहुत प्रमंडल के तहत चंपारण, मुजफ्फरपुर, सारण और हमारा अपना Darbhanga जिला भी इस नए प्रशासनिक ढांचे का एक बेहद अहम हिस्सा बना। इसी तरह छोटानागपुर प्रमंडल में हजारीबाग, मानभूम, पलामू, रांची और सिंहभूम जैसे खनिज संपदा से भरपूर जिलों को एक साथ शामिल किया गया था। ओडिशा प्रमंडल में अंगुल, बालासोर, कटक, पुरी और सम्बलपुर जिलों को जोड़कर इस पूरे प्रांत को एक विशाल और विविधतापूर्ण स्वरूप प्रदान किया गया था।
केक काटकर और पुराना नक्शा दिखाकर वकीलों ने मनाई खुशी
बार एसोसिएशन भवन का माहौल उस वक्त पूरी तरह से जश्न में डूब गया जब सभी वरिष्ठ और युवा अधिवक्ताओं ने मिलकर एक शानदार केक काटा। उन्होंने एक-दूसरे को केक खिलाकर इस ऐतिहासिक राज्य स्थापना दिवस की हार्दिक बधाइयां दीं और अपनी खुशी का पूरे उत्साह के साथ इजहार किया। 1912 के उस अखंड प्रांत का नक्शा वहां मौजूद सभी लोगों के लिए एक विशेष आकर्षण और गर्व का केंद्र बना हुआ था।
Darbhanga के इस गरिमामयी समारोह में शहर के कई जाने-माने और वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने अपनी सक्रिय और महत्वपूर्ण उपस्थिति दर्ज कराई। इस मौके पर मुख्य रूप से अधिवक्ता बिरेंद्र कुमार सिंह, संजीव कुमार कुंवर, हेमंत कुमार, अरुण कुमार सिंह और कुमार उत्तम मौजूद रहे। इनके अलावा हिरानंद मिश्र, विष्णुकांत चौधरी, अनिल कुमार मिश्रा, रामवृक्ष सहनी, नितीश कुमार और संतोष सिन्हा ने भी इस कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।
कार्यक्रम को पूरी तरह से सफल और सुव्यवस्थित बनाने में सुधीर कुमार चौधरी, संजीव कुमार, बूलन कुमार झा और कुलदीप दिवान जैसे युवा और ऊर्जावान वकीलों का भी बहुत ही अहम योगदान रहा। पारा विधिक स्वयंसेवक प्रेमनाथ सिंह, अधिवक्ता लिपिक विनय कुमार झा और विशेष न्याय अतिथि राजेश राय समेत इतनी बड़ी संख्या में लोगों का जुटना इस बात का प्रमाण है कि लोग आज भी अपने इतिहास से गहरा लगाव रखते हैं।
हमारा निष्कर्ष
‘खबर आंगन’ की सोशल और हिस्टोरिकल डेस्क का यह स्पष्ट रूप से मानना है कि अपनी जड़ों और अपने इतिहास को याद रखना हर सभ्य समाज की पहली निशानी है। Darbhanga बार एसोसिएशन द्वारा आयोजित यह स्थापना दिवस समारोह केवल एक रस्मी कार्यक्रम नहीं, बल्कि हमारी गौरवशाली विरासत का एक सच्चा और भावपूर्ण सम्मान है। सच्चिदानंद सिन्हा जैसे दूरदर्शी महापुरुषों ने जिस स्वतंत्र और समृद्ध राज्य का सपना देखा था, उसे आज के परिप्रेक्ष्य में समझना बहुत जरूरी है।
आज जब हम विकास की एक नई और तेज दौड़ में शामिल हैं, तो हमें उन शुरुआती संघर्षों को कभी नहीं भूलना चाहिए जिनकी मजबूत नींव पर हमारा यह वर्तमान खड़ा है। यह ऐतिहासिक कार्यक्रम युवाओं और विशेषकर कानून की पढ़ाई कर रहे छात्रों के लिए एक बहुत बड़ी प्रेरणा है कि वे अपने समाज और राज्य के प्रति अपने नैतिक दायित्वों को समझें। हमें पूरी उम्मीद है कि ऐसे बौद्धिक विमर्श आगे भी होते रहेंगे ताकि हमारी आने वाली पीढ़ियां अपने समृद्ध अतीत से हमेशा मजबूती के साथ जुड़ी रहें।
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