बिहार की जीवन रेखा कहे जाने वाले छठ पर्व के समापन के बाद अब देश के विभिन्न महानगरों में लौटने वाले लाखों प्रवासियों के लिए हवाई सफर एक बड़ी चुनौती बन गया है। खासकर,Darbhangaसे देश की आर्थिक राजधानी मुंबई जाने वाले हवाई किराए में बेतहाशा वृद्धि देखने को मिल रही है। विमानन कंपनियों द्वारा मांग में अचानक हुई भारी वृद्धि का फायदा उठाते हुए टिकटों के दाम₹27,000के पार पहुंचा दिए गए हैं, जिससे आम यात्रियों के लिए वापसी का सफर ‘पॉकेट-फ्रेंडली’ से ‘पॉकेट-बर्स्टिंग’ बन गया है।
मांग और आपूर्ति का असंतुलन: क्यों बढ़ी कीमतें?
छठ पर्व बिहार के लोगों के लिए सबसे बड़ा त्योहार है, जिसे मनाने के लिए देश-विदेश से लोग अपने घरों को लौटते हैं। त्योहार की समाप्ति के बाद, इन लोगों का अपने कार्यस्थल पर लौटना अनिवार्य होता है। इसी दौरान, यानी छठ के ठीक बाद की तारीखों में, Darbhanga (DBR) से मुंबई (BOM) जैसे प्रमुख मार्गों पर अचानक हवाई टिकटों की मांग चरम पर पहुँच जाती है।
विमानन कंपनियां, जैसे कि स्पाइसजेट, इंडिगो और अकासा एयर, इस उच्च मांग को देखते हुए ‘डायनामिक प्राइसिंग’ मॉडल का उपयोग करती हैं। इस मॉडल के तहत, जैसे-जैसे सीटें भरती जाती हैं और यात्रा की तारीख नज़दीक आती है, वैसे-वैसे टिकटों के दाम बढ़ते जाते हैं। यही कारण है कि जो टिकटें सामान्य दिनों में ₹4,000 से ₹6,000 के बीच आसानी से उपलब्ध होती हैं, वे अब छह गुना तक महंगे होकर ₹27,000 या उससे अधिक की सीमा को छू रही हैं।
यह अत्यधिक किराया वृद्धि उन गरीब और मध्यमवर्गीय प्रवासियों के लिए एक गंभीर झटका है, जो साल भर मेहनत करके त्योहारों में घर आते हैं। यह दर वृद्धि उनके मासिक बजट को बुरी तरह प्रभावित कर रही है।
अन्य प्रमुख रूटों का हाल: दिल्ली और हैदराबाद भी महंगा
केवल मुंबई ही नहीं, बल्कि Darbhanga से दिल्ली और Darbhanga से हैदराबाद जैसे अन्य व्यस्त रूटों पर भी हवाई किराए में भारी बढ़ोतरी हुई है।
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Darbhanga-दिल्ली: इस रूट पर टिकटों का किराया भी ₹6,453 से ₹16,818 के बीच है।
Darbhanga-हैदराबाद: यह रूट भी महंगा हुआ है, जहां किराए ₹10,016 से ₹19,841 तक पहुँच गए हैं।
हालांकि, छठ के लिए Darbhanga आने वाले (इनबाउंड) उड़ानों के किराए इसी अवधि में काफी कम हैं, जो ₹6,000 से ₹8,000 के बीच हैं। यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि मांग का असंतुलन सिर्फ वापसी (आउटबाउंड) यात्रा में है।
यात्रियों की बढ़ती मुश्किलें और निराशा
हवाई किराए की यह अप्रत्याशित वृद्धि उन लोगों के लिए सबसे बड़ी समस्या है जिन्होंने आखिरी समय पर टिकट बुक करने की योजना बनाई थी। कई यात्रियों ने अपनी यात्रा की तारीखों को आगे बढ़ाने या रेलगाड़ियों में टिकट खोजने पर मजबूर होना पड़ा है, जहां सीटें मिलना लगभग असंभव है।
एक यात्री ने अपनी निराशा व्यक्त करते हुए कहा, “पहले हम छठ मनाते हैं, फिर महंगा किराया चुकाने की चिंता करते हैं। हवाई जहाज का किराया अब इतना महंगा हो गया है कि लगता है जैसे हम विदेश जा रहे हों। सरकार को इस मनमानी कीमत वृद्धि पर नियंत्रण करना चाहिए।”
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प्रवासी कामगारों के लिए, जो मुंबई या दिल्ली में मजदूरी या छोटे-मोठे व्यापार से जीवनयापन करते हैं, ₹27,000 का टिकट उनकी एक महीने की कमाई से भी अधिक हो सकता है।
हवाई किराए को नियंत्रित करने की मांग
एयरलाइन कंपनियों द्वारा त्योहारी सीजन में मनमानी कीमत वसूली पर नियंत्रण की मांग लंबे समय से की जा रही है। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) के दिशानिर्देशों के बावजूद, एयरलाइंस अक्सर मांग-आपूर्ति के नाम पर अधिकतम किराये की सीमा को पार कर जाती हैं। इस मुद्दे पर सरकार को एक पारदर्शी और न्यायसंगत मूल्य निर्धारण तंत्र लागू करने की आवश्यकता है, जिससे आपातकालीन और अनिवार्य यात्रा के दौरान उपभोक्ताओं को लूटा न जाए।
निष्कर्ष: वापसी का सफर हुआ ‘अग्नि परीक्षा’
छठ का त्योहार बिहार के लिए उल्लास और भक्ति का प्रतीक है, लेकिन इसके तुरंत बाद Darbhanga से मुंबई और अन्य शहरों की यात्रा करना अब एक अग्नि परीक्षा बन गई है। ₹27,000 तक के हवाई टिकट ने लाखों प्रवासियों के लिए वापसी के सफर को न केवल मुश्किल बल्कि लगभग असंभव बना दिया है। जब तक सरकार हवाई किराए पर नियंत्रण के लिए प्रभावी उपाय नहीं करती, तब तक हर त्योहारी सीजन के बाद यात्रियों को ऐसी ही आर्थिक मार झेलनी पड़ेगी। बिहार और मुंबई के बीच की दूरी को अब हवाई कंपनियों की मनमानी कीमत ने और भी बढ़ा दिया है।
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