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महाव्रत का आरंभ: Kharna के साथ शुरू हुआ 36 घंटे का निर्जला Chhath Vrat, जानें कठोर संकल्प का विज्ञान

सूर्य देव की उपासना का महापर्व Chhath Vrat आज Kharna के साथ सबसे कठिन चरण में प्रवेश कर गया है। व्रती आज शाम गुड़ की खीर का प्रसाद ग्रहण करने के बाद 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू करेंगे। जानें कैसे यह व्रत शरीर को डिटॉक्सिफाई करता है और मन...
Khabar Aangan Published on: 26 अक्टूबर 2025
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Chhath Vrat/पटना/रांची (आज की विशेष रिपोर्ट): भारतीय सनातन परंपरा के सबसे कठिन, पवित्र और सबसे लोकप्रिय महापर्व Chhath Puja का आज दूसरा दिन है, जिसे Kharna (खरना) के नाम से जाना जाता है । ‘नहाय-खाय’ की शुद्धिकरण प्रक्रिया को पूरा करने के बाद, आज से व्रती (Parvaitin) 36 घंटे के ऐतिहासिक ‘निर्जला व्रत’ का महासंकल्प लेंगे, जो Chhath की कठोरतम साधना का केंद्र है ।   

Kharna के अनुष्ठान के साथ ही, यह त्योहार अपने आध्यात्मिक शिखर की ओर बढ़ना शुरू कर देता है। इस दिन व्रती पूरे दिन का उपवास रखते हैं और शाम को विशेष प्रसाद ग्रहण करने के बाद अगले 36 घंटे तक अन्न और जल का पूर्णतः त्याग कर देते हैं । यह संकल्प सूर्य देव (सूर्य) और उनकी बहन, छठी मैया, के प्रति अटूट भक्ति, शारीरिक अनुशासन और आत्मिक शुद्धि का प्रतीक है।   

यह विशेष न्यूज़ आर्टिकल Kharna की विस्तृत विधि, 36 घंटे के Chhath Vrat के वैज्ञानिक और आध्यात्मिक पहलू, और महाकाव्यों से जुड़ी इस व्रत की गौरवशाली परंपरा पर विस्तृत प्रकाश डाल रहा है, जो इसे भारत का सबसे दिलचस्प और अनुकरणीय त्योहार बनाता है।

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I. Kharna: 36 घंटे के महाव्रत का प्रवेश द्वार

Kharna (अर्थात ‘पाप का क्षरण’ या शुद्धिकरण) वह महत्वपूर्ण चरण है जो व्रती को आगे आने वाले कठोर अनुष्ठानों के लिए मानसिक और शारीरिक रूप से तैयार करता है।

1. दिनभर का उपवास और सांध्यकालीन पृथ्वी पूजा

Kharna के दिन व्रती सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक कठोर उपवास रखते हैं । यह एक तरह से शरीर को लंबे निर्जला व्रत (बिना पानी के) के लिए अभ्यस्त करने का चरण है, जो व्रत की अटूटता और संकल्प की नींव रखता है ।   

शाम को, सूर्य अस्त होने के बाद, व्रती स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करते हैं। घर के पूजा कक्ष में या एक पवित्र स्थान पर पृथ्वी माता की पूजा की जाती है, और संकल्प लिया जाता है कि अगले 36 घंटे तक उनका व्रत निर्बाध रूप से चलेगा ।   

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