भाग 1: राजभवन में ‘दैवीय व्यवस्था’ का उद्घोष
राज्यपाल ने बताया ‘आध्यात्मिक बल’ और ‘एक विचार’
महाराष्ट्र के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने शुक्रवार, 24 अक्टूबर को PM Modi को लेकर एक ऐसा बयान दिया, जिसने देश की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। मुंबई के राजभवन में आयोजित एक समारोह के दौरान, राज्यपाल ने पीएम मोदी को केवल प्रधानमंत्री नहीं, बल्कि “एक विचार” (an idea) और “एक आध्यात्मिक बल” (a spiritual force) बताया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि प्रधानमंत्री मोदी “एक दैवीय आदेश” (divine order) से इस धरती पर आए हैं।
यह बयान प्रतिष्ठित वकील बरजिस देसाई की पुस्तक ‘मोदीज मिशन’ के विमोचन के अवसर पर दिया गया। इस कार्यक्रम में राज्यपाल देवव्रत के साथ महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और लेखक स्वयं मौजूद थे, जिससे इस संवैधानिक मंच पर दिए गए वक्तव्य का राजनीतिक महत्व और भी बढ़ गया।
राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने ज़ोर देकर कहा कि PM Modi ने अपने जीवन में जो निर्णय लिए हैं, वे साधारण लोग नहीं ले सकते। उन्होंने कहा, “जहाँ समाज में बदलाव लाने के लिए एक महान व्यक्ति की आवश्यकता होती है, ऐसे लोग दैवीय आदेश से आते हैं। जब ऐसे लोग दैवीय आदेश से आते हैं, तो वे असंभव को संभव करने की शक्ति रखते हैं।”

अनुच्छेद 370 और राम मंदिर: दैवीय मिशन के प्रमाण
राज्यपाल देवव्रत ने अपने दावे को साबित करने के लिए PM Modi के दो सबसे बड़े राजनीतिक और ऐतिहासिक निर्णयों का उदाहरण दिया।
- अनुच्छेद 370: उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को “एक झटके में” और इस तरह से निरस्त कर दिया गया कि “एक चिड़िया ने भी अपना पंख नहीं हिलाया”।
- राम मंदिर निर्माण: अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण भी उनकी ‘महान इच्छाशक्ति’ और ‘दैवीय व्यवस्था’ से मिली शक्ति का दूसरा प्रमुख प्रमाण बताया गया।
राज्यपाल के अनुसार, ये असंभव माने जाने वाले काम इसलिए संभव हुए क्योंकि PM Modi एक ऐसे व्यक्ति हैं जिनका जीवन “निस्वार्थ” (no self-interest) है और जिनका एकमात्र मिशन “सार्वजनिक कल्याण” (public welfare) है। उन्होंने कहा कि “इस धरती पर उनके आगमन पर हर व्यक्ति को गर्व होना चाहिए।”