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Darbhanga Crime: 1000 रुपये के लिए 7वीं की छात्रा की गला दबाकर हत्या, वार्डन रेखा सिन्हा दोषी करार, क्या 17 मार्च को मिलेगी उम्रकैद?

दरभंगा के कस्तूरबा आवासीय विद्यालय में महज 1000 रुपये के लिए 7वीं की एक दलित छात्रा का गला दबाकर हत्या करने वाली वार्डन रेखा सिन्हा को कोर्ट ने दोषी करार दे दिया है। नए कानूनों के तहत हुए इस त्वरित फैसले के बाद, क्या 17 मार्च को अदालत इस जघन्य...
Khabar Aangan Published on: 10 मार्च 2026
Darbhanga Crime: 1000 रुपये के लिए 7वीं की छात्रा की गला दबाकर हत्या, वार्डन रेखा सिन्हा दोषी करार, क्या 17 मार्च को मिलेगी उम्रकैद?
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दरभंगा | 10 मार्च 2026: शिक्षा के मंदिर में रक्षक के भक्षक बन जाने का एक बेहद खौफनाक और दिल दहला देने वाला मामला न्याय के मुहाने पर पहुंच गया है। बिहार के Darbhanga जिले में कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय की एक 7वीं कक्षा की दलित छात्रा की हत्या के मामले में अदालत ने अपना अहम फैसला सुना दिया है।

दरभंगा जिला न्याय मंडल के एससी/एसटी (SC/ST) एक्ट के विशेष न्यायाधीश शैलेन्द्र कुमार की अदालत ने इस सनसनीखेज मामले की सुनवाई पूरी करते हुए तत्कालीन हॉस्टल वार्डन रेखा सिन्हा को हत्या का दोषी करार दिया है।

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इस बहुचर्चित हत्याकांड ने पूरे राज्य की आवासीय विद्यालय व्यवस्था और बच्चियों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे। ‘खबर आंगन’ की लीगल और क्राइम डेस्क आपको इस पूरे घटनाक्रम, न्यायिक प्रक्रिया और आने वाली 17 मार्च की सजा पर विस्तृत रिपोर्ट दे रही है।

15 सितंबर 2024 का वह काला दिन

यह पूरी घटना 15 सितंबर 2024 की है, जब बहेड़ी स्थित कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय में एक मासूम की जिंदगी महज कुछ रुपयों के लिए छीन ली गई। मृतका पतोर थाना क्षेत्र के श्रीरामपिपरा गांव की रहने वाली थी और इसी विद्यालय के हॉस्टल में रहकर 7वीं कक्षा में पढ़ाई कर रही थी।

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घटना की शुरुआत एक मामूली चोरी के संदेह से हुई थी। पुलिस में दर्ज प्राथमिकी (FIR) के अनुसार, हॉस्टल की वार्डन रेखा सिन्हा (निवासी: ग्राम पतौना, जिला पटना) के पर्स से एक हजार रुपये गायब हो गए थे।

तलाशी और पूछताछ के दौरान यह रकम कथित तौर पर मृतका के पास से बरामद हुई। इसी खुन्नस और गुस्से में आकर वार्डन रेखा सिन्हा ने पूछताछ के बहाने बच्ची का बेरहमी से गला दबा दिया, जिससे उसकी मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई।

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न्याय की त्वरित गति: डेढ़ साल के भीतर आया फैसला

इस मामले की सबसे खास बात भारतीय न्याय प्रणाली की वह त्वरित गति रही है, जिसने महज एक वर्ष पांच माह और चौबीस दिन के अंदर इस जघन्य हत्याकांड का ट्रायल पूरा कर लिया। मृतका के पिता द्वारा बहेड़ी थाने में लिखित आवेदन दिए जाने के बाद पुलिस ने तेजी से कार्रवाई की थी।

बहेड़ी थाना कांड संख्या 326/24 के तहत मामला दर्ज होने के बाद यह केस एससी/एसटी वाद संख्या 03/25 के रूप में विशेष अदालत में चला। अभियोजन पक्ष (Prosecution) की ओर से विशेष लोक अभियोजक संजीव कुमार कुंवर ने मजबूती से अदालत में दलीलें पेश कीं।

न्यायिक विचारण (Trial) के दौरान पुलिस के अनुसंधानकर्ता (IO) और पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर सहित कुल 6 अहम गवाहों की गवाही दर्ज कराई गई। सबूतों और गवाहों के बयानों को वैज्ञानिक तरीके से जोड़ने के बाद अदालत ने वार्डन को दोषी पाया।

भारतीय न्याय संहिता (BNS) और SC/ST एक्ट की सख्त धाराएं

यह मामला कानूनी दृष्टिकोण से भी बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसमें नए आपराधिक कानूनों का सख्ती से पालन किया गया है। विशेष न्यायाधीश की अदालत ने दोषी वार्डन का बंधपत्र (Bail Bond) तत्काल प्रभाव से खंडित करते हुए उसे सीधे जेल भेज दिया है।

दोषी रेखा सिन्हा पर कानूनी शिकंजा कसने के लिए जिन मुख्य धाराओं का इस्तेमाल किया गया है, वे इस प्रकार हैं:

  • एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 3(2)(5): यह धारा अनुसूचित जाति/जनजाति के सदस्य के खिलाफ गंभीर अपराध (जैसे हत्या) के मामलों में लगाई जाती है। इस धारा के तहत न्यूनतम आजीवन कारावास (Life Imprisonment) की सजा का सख्त प्रावधान है।
  • भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराएं: अदालत ने विचारण के बाद BNS की गंभीर धाराओं (जैसे 108 और 208) के तहत दोष सिद्ध किया है, जिनमें न्यूनतम 10 वर्ष के कठोर कारावास से लेकर अधिकतम उम्रकैद तक की सजा का स्पष्ट प्रावधान है।

17 मार्च पर टिकीं पीड़ित परिवार की निगाहें

अदालत द्वारा रेखा सिन्हा को दोषी (Convict) करार दिए जाने के बाद अब सिर्फ सजा की मियाद (Quantum of Sentence) तय होनी बाकी है। विशेष न्यायाधीश ने सजा की अवधि के निर्धारण और अंतिम निर्णय के लिए 17 मार्च 2026 की तिथि मुकर्रर की है।

एक शिक्षक और संरक्षक द्वारा 1000 रुपये जैसी मामूली रकम के लिए एक दलित बच्ची की निर्मम हत्या को ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ (Rarest of Rare) की श्रेणी में देखा जा रहा है। अब मृत बालिका के परिजनों और पूरे Darbhanga जिले की निगाहें 17 मार्च की तारीख पर टिकी हुई हैं कि अदालत इस रोंगटे खड़े कर देने वाले अपराध के लिए क्या सजा मुकर्रर करती है।

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