दरभंगा, 24 सितंबर 2026। गन्ने की खेती को अधिक वैज्ञानिक और लाभकारी बनाने के उद्देश्य से मनीगाछी प्रखंड के डेनिटोल गांव में किसानों के लिए एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। सकरी चीनी मिल क्षेत्र में हुए इस प्रशिक्षण में किसानों को शरदकालीन गन्ने की बुआई, सह-फसल, आधुनिक कृषि यंत्रों, बीज एवं भूमि उपचार और जैविक उपादानों के इस्तेमाल की जानकारी दी गई। साथ ही गन्ना क्षेत्र विस्तार योजना के तहत मिलने वाले लाभ और आवेदन प्रक्रिया भी समझाई गई।
कार्यक्रम का आयोजन सहायक निदेशक, ईख विकास, दरभंगा के तत्वावधान में गन्ना प्रौद्योगिकी विस्तार कार्यक्रम 2026-27 के तहत किया गया। प्रशिक्षण का उद्देश्य किसानों को आधुनिक खेती की तकनीक से परिचित कराना और गन्ने का उत्पादन तथा उत्पादकता बढ़ाने के लिए वैज्ञानिक तरीके अपनाने के लिए प्रेरित करना था। कार्यक्रम में ईख प्रसार पदाधिकारी प्रहलाद कुमार, सुहैल अंसारी, जनसेवक जगदम्ब कुमार सिंह, मो. मुस्तफा और श्रवण कुमार सहित विभागीय कर्मी मौजूद रहे।
प्रशिक्षण में किसानों को खास तौर पर शरदकालीन गन्ने की बुआई और गन्ने के साथ सह-फसल लेने की तकनीक के बारे में बताया गया। इसके अलावा गन्ने का क्षेत्र बढ़ाने के लिए चल रही क्षेत्र विस्तार योजना के प्रावधानों की जानकारी दी गई। किसानों को बताया गया कि वैज्ञानिक तरीके से खेती करने से फसल की उत्पादकता बढ़ाने के साथ खेती से होने वाली आय में भी सुधार किया जा सकता है।
किसानों को 4 फीट की दूरी पर गन्ने की आधुनिक खेती करने के तरीके के साथ कृषि यंत्रीकरण और आधुनिक कृषि यंत्रों के उपयोग की जानकारी दी गई। प्रशिक्षण के दौरान खरपतवार नियंत्रण, गन्ने की बंधाई, बीज उपचार और भूमि उपचार की वैज्ञानिक विधियों पर भी चर्चा हुई। किसानों को खेती के अलग-अलग चरणों में इन तकनीकों के इस्तेमाल से जुड़ी जरूरी जानकारी दी गई, ताकि वे इसे अपने खेतों में लागू कर सकें।
प्रशिक्षण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा गन्ना क्षेत्र विस्तार योजना के तहत मिलने वाले मुफ्त बीज से जुड़ा रहा। किसानों को बताया गया कि किसान गन्ना ID के माध्यम से योजना के तहत गन्ने का बीज मुफ्त प्राप्त करने के लिए आवेदन किया जा सकता है। विभाग की योजना के अनुसार लाभ के लिए न्यूनतम 0.25 एकड़ से अधिकतम 2.5 एकड़ तक के क्षेत्र के लिए आवेदन का प्रावधान है। किसानों को योजना का लाभ लेने के लिए जरूरी प्रक्रिया और संबंधित प्रावधानों की जानकारी भी दी गई।
गन्ने की खेती में जैविक उपादानों के इस्तेमाल पर भी प्रशिक्षण के दौरान विशेष जोर दिया गया। किसानों को बताया गया कि इनके उपयोग से मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने, फसल की गुणवत्ता सुधारने और टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने में मदद मिल सकती है। साथ ही जैविक उपादान योजना के तहत उपलब्ध प्रावधानों के बारे में भी किसानों को जानकारी दी गई। बिहार गन्ना उद्योग विभाग की योजनाओं में जैविक उपादानों के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए अलग योजना भी सूचीबद्ध है।
कार्यक्रम में सकरी चीनी मिल के मुख्य गन्ना प्रबंधक विनोद तिवारी, Indian Potash Limited (New Sugar Mill – Raiyam), कृषि विज्ञान केंद्र सुखैत के SMS राहुल सिंह राजपूत, प्रगतिशील किसान ध्रुव नारायण झा, पूर्व मुखिया ब्रज किशोर यादव और बलौर के पूर्व मुखिया पप्पू झा सहित अन्य पदाधिकारी, कर्मी और बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।
प्रशिक्षण के दौरान किसानों ने गन्ना उत्पादन से जुड़े अलग-अलग विषयों पर अपनी समस्याएं और सवाल भी रखे। संबंधित पदाधिकारियों और कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को आवश्यक जानकारी और सुझाव देकर उनकी समस्याओं का समाधान किया। प्रशिक्षण में शामिल किसानों ने आधुनिक और वैज्ञानिक तकनीकों की जानकारी को अपने खेतों में अपनाने की प्रतिबद्धता जताई।
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