दरभंगा, 21 सितंबर। दरभंगा के मखाने, मिथिला पेंटिंग और सिक्की कला को अब सिर्फ देश के बाजार तक सीमित रखने के बजाय विदेशों तक पहुंचाने की तैयारी तेज हो रही है। सोमवार को जिला निर्यात संवर्धन समिति की बैठक में स्थानीय उत्पादों को विदेशी बाजार से जोड़ने, निर्यात के लिए जरूरी सुविधाएं तैयार करने और उत्पादकों को एक ही जगह पर जरूरी मदद उपलब्ध कराने की दिशा में कई प्रस्तावों पर चर्चा हुई।
उप विकास आयुक्त स्वप्निल की अध्यक्षता में हुई बैठक में निर्यात सुविधा केंद्र स्थापित करने के प्रस्ताव से लेकर दरभंगा एयरपोर्ट के जरिए एयर कार्गो आधारित निर्यात की संभावनाओं पर विचार किया गया। बैठक में DGFT, APEDA, EPCH, MSME, डाक विभाग, कृषि, उद्यान और उद्योग विभाग के अधिकारियों के साथ चैंबर ऑफ कॉमर्स के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे।
निर्यात सुविधा केंद्र बना तो एक जगह मिलेगी कई जरूरी मदद
बैठक में जिले में निर्यात सुविधा केंद्र स्थापित करने के प्रस्ताव पर खास तौर पर चर्चा हुई। इसके जरिए स्थानीय उत्पादकों, किसानों, कारीगरों और छोटे उद्योगों को निर्यात की प्रक्रिया समझने और जरूरी औपचारिकताएं पूरी करने में मदद देने की योजना पर विचार किया गया।
इस केंद्र के माध्यम से उत्पादों की गुणवत्ता जांच, प्रमाणन, पैकेजिंग और ब्रांडिंग जैसी जरूरतों को पूरा कराने में सहयोग देने की बात सामने आई। इसका उद्देश्य यह है कि किसी स्थानीय उत्पादक को विदेश में अपना सामान भेजने के लिए अलग-अलग जगहों पर जानकारी और सुविधाएं तलाशने में ज्यादा परेशानी न हो।
मखाना, मिथिला पेंटिंग और सिक्की आर्ट पर खास नजर
बैठक में जिला निर्यात कार्य योजना यानी DEAP में जिले के प्रमुख स्थानीय और विशिष्ट उत्पादों को शामिल करने पर भी चर्चा हुई। इनमें खास तौर पर मखाना, मिथिला पेंटिंग और सिक्की आर्ट की निर्यात संभावनाओं पर विचार किया गया।
दरभंगा के जिला निर्यात प्लान में मखाना को जिले के प्रमुख निर्यात उत्पाद के रूप में चिन्हित किया गया है। हाल के महीनों में दरभंगा के किसानों से प्राप्त मिथिला मखाना की विदेश भेजी गई खेप और value-added मखाना के निर्यात से इस क्षेत्र में बढ़ती संभावनाओं का भी संकेत मिला है।
बैठक में इन उत्पादों को निर्यात योजना में प्राथमिकता देने से पहले जरूरी सत्यापन और पुष्टि की प्रक्रिया पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों का जोर इस बात पर रहा कि स्थानीय उत्पादों की पहचान के साथ उनकी गुणवत्ता और बाजार की जरूरत के मुताबिक तैयारी भी हो।
विदेशी ग्राहक तक पहुंचने के लिए गुणवत्ता और पैकेजिंग पर जोर
किसी उत्पाद को विदेश भेजना सिर्फ उसे दूसरे देश तक पहुंचाने का मामला नहीं है। उसकी गुणवत्ता, पैकेजिंग, प्रमाणन और ब्रांडिंग भी अंतरराष्ट्रीय बाजार की जरूरत के मुताबिक होनी चाहिए। बैठक में स्थानीय कारीगरों, किसानों और MSME इकाइयों को इन्हीं जरूरतों के अनुसार तैयार करने के संभावित उपायों पर चर्चा की गई।
निर्यात संवर्धन मिशन के तहत उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों के अनुरूप बनाने, जरूरी प्रमाणपत्र हासिल करने, आकर्षक पैकेजिंग और ब्रांडिंग विकसित करने तथा विदेशी खरीदारों तक पहुंच बनाने की संभावनाओं पर भी विचार हुआ।
दरभंगा एयरपोर्ट से एयर कार्गो की संभावना पर चर्चा
बैठक का एक महत्वपूर्ण हिस्सा दरभंगा एयरपोर्ट के जरिए निर्यात से जुड़ा रहा। स्थानीय किसानों और MSME इकाइयों के उत्पादों को देश-विदेश के बाजार तक जल्दी पहुंचाने के लिए एयर कार्गो की संभावनाओं पर चर्चा की गई।
इसके साथ ही प्रस्तावित निर्यात संवर्धन पार्क से जुड़ी संभावनाओं पर भी विचार हुआ। अधिकारियों ने एयर कार्गो आधारित निर्यात के लिए जरूरी लॉजिस्टिक व्यवस्था, उत्पादों के तेज परिवहन और अन्य आवश्यक सुविधाओं को लेकर संभावित कार्य बिंदुओं पर चर्चा की।
अगर ऐसी व्यवस्था विकसित होती है तो स्थानीय उत्पादों को बड़े बाजार तक पहुंचाने में समय और लॉजिस्टिक से जुड़ी कुछ बाधाएं कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि बैठक में अभी इन व्यवस्थाओं पर चर्चा और प्रस्तावों को आगे बढ़ाने की बात हुई है; इसे तैयार निर्यात केंद्र या शुरू हो चुकी सुविधा के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
अब अगली चुनौती उत्पादन से बाजार तक की कड़ी मजबूत करना
दरभंगा में मखाना पहले से ही आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण उत्पाद है और सरकारी जिला निर्यात योजना भी इसे निर्यात क्षमता वाला प्रमुख उत्पाद मानती है। अब चुनौती यह है कि स्थानीय किसानों और कारीगरों के उत्पादों को गुणवत्ता, पैकेजिंग, प्रमाणन, ब्रांडिंग और लॉजिस्टिक्स की ऐसी व्यवस्था मिले जिससे वे बड़े बाजार की जरूरत पूरी कर सकें।
उप विकास आयुक्त स्वप्निल ने संबंधित विभागों और संस्थाओं को आपसी समन्वय के साथ प्रस्तावित काम आगे बढ़ाने और जिले की निर्यात क्षमता का अधिकतम इस्तेमाल करने की दिशा में पहल करने को कहा। बैठक में मौजूद विभिन्न विभागों और संस्थाओं के बीच समन्वय को इसी पूरी प्रक्रिया की अहम कड़ी माना गया।
दरभंगा के लिए यह पहल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां का मखाना, मिथिला की कला और पारंपरिक हस्तशिल्प स्थानीय पहचान से आगे बढ़कर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में जगह बना सकते हैं। अब देखना यह होगा कि बैठक में चर्चा किए गए निर्यात सुविधा केंद्र, एयर कार्गो और दूसरी व्यवस्थाएं जमीन पर किस गति से आकार लेती हैं।
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