नई दिल्ली, 21 सितंबर 2026। शारदीय नवरात्रि 2026 में मां दुर्गा का आगमन हाथी पर माना जा रहा है। नवरात्रि की शुरुआत 11 अक्टूबर, रविवार से होगी और धार्मिक परंपरा में नवरात्र के पहले दिन पड़ने वाले वार के आधार पर माता के आगमन की सवारी तय करने की मान्यता है। यही वजह है कि इस बार हाथी को माता के आगमन का वाहन माना जा रहा है। अब सवाल यह है कि हर साल माता की सवारी क्यों बदलती है और इसके पीछे कौन-सी धार्मिक परंपरा है।
मां दुर्गा का स्थायी वाहन सिंह माना जाता है, लेकिन नवरात्र के दौरान माता के आगमन और प्रस्थान के लिए अलग-अलग वाहनों की परंपरा बताई गई है। इसमें हाथी, घोड़ा, नौका और पालकी का उल्लेख मिलता है। इन वाहनों का निर्धारण नवरात्र के आरंभ और समापन के दिन के आधार पर किया जाता है। इसलिए हर वर्ष नवरात्र की शुरुआत और समाप्ति के वार बदलने के साथ माता की सवारी भी बदल सकती है।
रविवार को नवरात्र शुरू होने पर हाथी क्यों?
परंपरागत श्लोक में नवरात्र की शुरुआत के वार के अनुसार माता के वाहन का उल्लेख मिलता है। रविवार और सोमवार को नवरात्र शुरू होने पर हाथी, मंगलवार और शनिवार को घोड़ा, बुधवार को नौका तथा गुरुवार और शुक्रवार को डोली या पालकी से माता के आगमन की मान्यता बताई गई है। चूंकि शारदीय नवरात्रि 2026 की शुरुआत रविवार को हो रही है, इसलिए इस बार माता का आगमन हाथी पर माना जा रहा है।
हाथी को भारतीय धार्मिक परंपरा में शक्ति, स्थिरता, धैर्य और समृद्धि से जोड़कर देखा जाता है। इसी वजह से माता के हाथी पर आगमन को कई धार्मिक मान्यताओं में शुभ संकेत माना गया है। कुछ परंपराओं में इसे अच्छी वर्षा, बेहतर फसल और समृद्धि से भी जोड़ा जाता है। हालांकि ये धार्मिक मान्यताएं हैं, इन्हें मौसम या कृषि उत्पादन की वैज्ञानिक भविष्यवाणी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
माता की सवारी तय करने का क्या है नियम?
माता के वाहन को लेकर प्रचलित मान्यता का आधार नवरात्र के आरंभ होने वाला दिन है। आसान शब्दों में समझें तो पहले नवरात्र यानी घटस्थापना के दिन का वार देखा जाता है और उसी के अनुसार माता के आगमन की सवारी मानी जाती है। इसी तरह नवरात्र के समापन के दिन के आधार पर माता के प्रस्थान वाहन की परंपरा बताई जाती है।
शारदीय नवरात्रि 2026 का समापन 20 अक्टूबर, मंगलवार को होगा। इसलिए कुछ धार्मिक परंपराओं में माता के प्रस्थान को घोड़े से जोड़ा जा रहा है। हालांकि अलग-अलग पंचांग और धार्मिक परंपराओं में वाहन के फलादेश की व्याख्या में अंतर मिल सकता है। वाराणसी से प्रकाशित जानकारी में इस वर्ष आगमन हाथी और गमन कुक्कुट यानी मुर्गे पर बताया गया है, जबकि अन्य स्रोत घोड़े का उल्लेख करते हैं। इसलिए प्रस्थान वाहन को लेकर स्थानीय पंचांग की मान्यता को आधार बनाना उचित होगा।
शारदीय नवरात्रि 2026 में 11 अक्टूबर से देवी आराधना की शुरुआत होगी। नवरात्र के दौरान मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है और घरों तथा मंदिरों में घटस्थापना के साथ नौ दिनों की साधना शुरू होती है। माता की सवारी से जुड़ी परंपरा इसी धार्मिक आयोजन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसे श्रद्धालु हर वर्ष उत्सुकता के साथ देखते हैं।
Disclaimer – माता की सवारी और उससे जुड़े शुभ-अशुभ संकेत धार्मिक मान्यताओं एवं परंपराओं पर आधारित हैं। अलग-अलग पंचांग, क्षेत्र और धार्मिक परंपराओं में इनके नियम या व्याख्या अलग हो सकती है। इन्हें वैज्ञानिक भविष्यवाणी नहीं माना जाना चाहिए।
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