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अजा एकादशी का व्रत आज, अश्वमेध यज्ञ के समान पुण्य की धार्मिक मान्यता, जानें पूजा और पारण का समय

अजा एकादशी का व्रत आज 7 सितंबर को रखा जा रहा है। धार्मिक मान्यता में इस व्रत को अश्वमेध यज्ञ के समान पुण्यदायी बताया गया है। जानिए पूजा और पारण से जुड़ी जरूरी जानकारी।
Khabar Aangan Monday, 7 September 2026, 03:10 AM
अजा एकादशी का व्रत आज, अश्वमेध यज्ञ के समान पुण्य की धार्मिक मान्यता, जानें पूजा और पारण का समय
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नई दिल्ली, 7 सितंबर 2026: भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को अजा एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस वर्ष अजा एकादशी का व्रत आज यानी 7 सितंबर, सोमवार को रखा जा रहा है। धार्मिक मान्यताओं में इस व्रत को भगवान विष्णु की उपासना से जोड़ा गया है और कहा जाता है कि श्रद्धा के साथ यह व्रत रखने से अश्वमेध यज्ञ के समान पुण्य फल प्राप्त होता है। यह दावा धार्मिक मान्यता के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

अजा एकादशी की तिथि को लेकर इस बार 6 और 7 सितंबर के बीच भ्रम की स्थिति भी रही। उपलब्ध पंचांग विवरण के अनुसार एकादशी तिथि 6 सितंबर की शाम 7 बजकर 29 मिनट से शुरू हुई और 7 सितंबर की शाम करीब 5 बजकर 3 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर व्रत 7 सितंबर को रखा जा रहा है।

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भगवान विष्णु की पूजा से जुड़ा है अजा एकादशी व्रत

अजा एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा और व्रत को विशेष महत्व दिए जाने की धार्मिक परंपरा है। मान्यता के अनुसार इस दिन श्रद्धालु भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लेते हैं और पूजा में फूल, तुलसी, फल तथा नैवेद्य अर्पित करते हैं। दीपक जलाकर आरती और भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप भी पूजा का हिस्सा माना जाता है।

अजा एकादशी से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं में इसके व्रत को पुण्यदायी बताया गया है। कुछ धार्मिक स्रोतों में इसके फल की तुलना अश्वमेध यज्ञ से की गई है। हालांकि, अलग-अलग परंपराओं और स्रोतों में इस फल की व्याख्या अलग तरह से मिलती है, इसलिए इसे धार्मिक विश्वास के रूप में ही प्रस्तुत करना उचित है, किसी प्रमाणित तथ्य या निश्चित परिणाम के रूप में नहीं।

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पूजा के बाद अगले दिन होगा व्रत का पारण

अजा एकादशी का व्रत रखने वाले श्रद्धालु अगले दिन द्वादशी तिथि में पारण करते हैं। उपलब्ध पंचांग विवरण के अनुसार इस वर्ष पारण 8 सितंबर 2026 को किया जाएगा। अलग-अलग स्थानों और पंचांग गणनाओं के अनुसार पारण के समय में थोड़ा अंतर हो सकता है। एक प्रमुख पंचांग स्रोत 8 सितंबर को सुबह 6 बजकर 2 मिनट से 8 बजकर 33 मिनट तक पारण का समय बताता है।

पूजा-पद्धति में सुबह स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करना, पूजा स्थल को तैयार करना और भगवान विष्णु की आराधना करना शामिल बताया गया है। कई परंपराओं में भगवान विष्णु को तुलसी दल, फूल, फल और नैवेद्य अर्पित करने की बात कही गई है। व्रत रखने वाले लोग अपनी परंपरा के अनुसार फलाहार या अन्य निर्धारित व्रत नियमों का पालन करते हैं।

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अजा एकादशी से जुड़ी मान्यताओं में व्रत के साथ संयम, पूजा और भगवान विष्णु के स्मरण पर जोर दिया जाता है। यही वजह है कि इस दिन मंदिरों और घरों में श्रद्धालु अपनी धार्मिक परंपरा के अनुसार पूजा-अर्चना करते हैं। हालांकि व्रत या धार्मिक अनुष्ठान से जुड़े नियम व्यक्ति की परंपरा और स्थानीय पंचांग के अनुसार अलग हो सकते हैं।

Disclaimer – इस लेख में बताए गए धार्मिक महत्व, पुण्य फल और पूजा से जुड़ी बातें धार्मिक मान्यताओं और उपलब्ध स्रोतों पर आधारित हैं। इन्हें वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित तथ्य या किसी निश्चित परिणाम की गारंटी के रूप में न लें। पूजा-व्रत अपनी आस्था, परंपरा और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार करें।

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