Suchna Se Sacchai Tak
ADVERTISEMENT

IN FOCUS

Advertisement
  1. Home
  2. Travel
  3. ब्रेक लगाते ही बिजली कैसे बनती है? वंदे भारत की ब्रेकिंग का यह सिस्टम समझिए

ब्रेक लगाते ही बिजली कैसे बनती है? वंदे भारत की ब्रेकिंग का यह सिस्टम समझिए

ब्रेक लगाते समय वंदे भारत सिर्फ रफ्तार कम नहीं करती। इसकी मोटर की भूमिका बदल जाती है और चलती ट्रेन की कुछ ऊर्जा फिर बिजली में बदली जा सकती है।
Khabar Aangan Published on: 7 सितम्बर 2026
ब्रेक लगाते ही बिजली कैसे बनती है? वंदे भारत की ब्रेकिंग का यह सिस्टम समझिए
ADVERTISEMENT

नई दिल्ली, 7 सितंबर 2026: ट्रेन में ब्रेक लगने पर आम तौर पर हम यही समझते हैं कि रफ्तार कम करने के लिए ऊर्जा खर्च होती है। लेकिन वंदे भारत में कहानी थोड़ी अलग है। इसकी ब्रेकिंग व्यवस्था ट्रेन को रोकने के साथ चलती ट्रेन की कुछ ऊर्जा को दोबारा बिजली में बदलने की क्षमता भी रखती है। यही वजह है कि इसका ब्रेकिंग सिस्टम सिर्फ सुरक्षा से जुड़ी तकनीक नहीं, बल्कि ऊर्जा बचाने की व्यवस्था भी है।

वंदे भारत की ब्रेकिंग कैसे काम करती है?

वंदे भारत में इलेक्ट्रो-प्न्यूमेटिक डिस्क ब्रेक के साथ इलेक्ट्रिक रीजेनरेटिव ब्रेकिंग का इस्तेमाल होता है। ब्रेक लगाने का आदेश इलेक्ट्रिक तरीके से तेजी से ब्रेकिंग सिस्टम तक पहुंचता है। जरूरत के हिसाब से इलेक्ट्रिक और प्न्यूमेटिक ब्रेकिंग साथ काम कर सकती हैं। रेलवे की तकनीकी specification में regenerative braking को प्राथमिक braking system रखा गया है और जरूरत पड़ने पर friction braking को उसके साथ मिलाने की व्यवस्था है।

ADVERTISEMENT

ब्रेक लगाते ही मोटर क्या करती है?

अब सबसे दिलचस्प हिस्सा समझिए। ट्रेन चलते समय traction motor पहियों को घुमाकर ट्रेन को आगे बढ़ाने में मदद करती है। लेकिन जब रफ्तार कम करनी होती है, तो यही motor दूसरी भूमिका निभा सकती है और generator की तरह काम कर सकती है। पहियों की गति motor को घुमाती है और इस प्रक्रिया में ट्रेन की kinetic energy का एक हिस्सा electrical energy में बदल जाता है। यानी ब्रेक लगाने के दौरान पूरी ऊर्जा सिर्फ गर्मी के रूप में खत्म नहीं होती।

बनी हुई बिजली कहां जाती है?

रीजेनरेटिव ब्रेकिंग से मिली बिजली को रेलवे के electrical system में वापस भेजा जा सकता है या system की जरूरत के अनुसार इस्तेमाल किया जा सकता है। इसका मतलब यह नहीं है कि हर बार ब्रेक लगाने पर उतनी ही मात्रा में बिजली वापस मिल जाएगी। Motor, power electronics और दूसरे components में होने वाले losses के कारण recovery बदलती रहती है। इसलिए इसे ऊर्जा की पूरी वापसी नहीं, बल्कि उपलब्ध ऊर्जा के एक हिस्से की recovery समझना चाहिए।

ADVERTISEMENT

30 फीसदी बिजली वाली बात का मतलब क्या है?

वंदे भारत की official technical specification में regenerated energy के लिए एक खास performance requirement रखी गई है। निर्धारित परीक्षण स्थिति में full traction के बाद full service braking के दौरान regenerated energy, powering में consumed energy की कम से कम 30 प्रतिशत होनी चाहिए। इसलिए 30 प्रतिशत को हर बार ब्रेक लगाने पर मिलने वाली निश्चित बिजली नहीं समझना चाहिए। यह specified test cycle में energy regeneration की requirement है।

क्या regenerative brake अकेले ट्रेन रोकता है?

नहीं। यही बात इस सिस्टम को समझने में सबसे जरूरी है। अगर electric regenerative braking से उस समय जरूरी braking force पूरी नहीं होती, तो friction या pneumatic braking को भी जोड़ा जा सकता है। इसे brake blending कहा जाता है। रेलवे की specification के अनुसार regenerative braking उपलब्ध न होने की स्थिति में भी ट्रेन को तय braking performance हासिल करनी होती है। यानी ऊर्जा recovery की सुविधा सुरक्षा व्यवस्था का विकल्प नहीं है।

ADVERTISEMENT

तेज रफ्तार में emergency braking

वंदे भारत की braking व्यवस्था को 160 किलोमीटर प्रति घंटे तक की गति को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। रेलवे की specification में emergency brake के जरिए 160 kmph की रफ्तार से चल रही ट्रेन को 1,250 मीटर से कम दूरी में रोकने की requirement दी गई है। साथ ही, regenerative braking में failure होने पर भी specified braking performance बनाए रखने की शर्त है। इससे साफ है कि system में energy efficiency और emergency safety दोनों को अलग-अलग महत्व दिया गया है।

आसान भाषा में समझें तो वंदे भारत में ब्रेक लगाने पर तीन चीजें साथ होती हैं। ट्रेन की रफ्तार घटती है, regenerative system जहां संभव हो वहां kinetic energy को electricity में बदलता है और जरूरत पड़ने पर friction या pneumatic braking अतिरिक्त stopping force देती है। यही combination इस व्यवस्था को खास बनाता है। इसलिए वंदे भारत की ब्रेकिंग का फायदा सिर्फ तेज ट्रेन को रोकने में नहीं, बल्कि braking के दौरान ऊर्जा के बेहतर इस्तेमाल में भी है।

Disclaimer – यह लेख उपलब्ध रिपोर्ट और भारतीय रेलवे की तकनीकी specification पर आधारित है। 30 प्रतिशत regenerated energy का आंकड़ा निर्धारित testing conditions की technical requirement है, हर braking event में मिलने वाली निश्चित बिजली नहीं।

इस खबर को शेयर करें
Khabar Aangan

Khabar Aangan Admin

Khabar Aangan एक स्वतंत्र डिजिटल न्यूज़ प्लेटफ़ॉर्म है, जो सूचना से सच्चाई तक की यात्रा को समर्पित है। हमारा उद्देश्य है—स्थानीय मुद्दों से लेकर राष्ट्रीय घटनाओं तक, हर खबर को गहराई, संदर्भ और निष्पक्षता के साथ प्रस्तुत करना। हम परंपरागत पत्रकारिता को आधुनिक दृष्टिकोण से जोड़ते हैं, ताकि पाठकों को मिले स्पष्ट, विश्वसनीय और प्रभावशाली जानकारी। चाहे बात हो प्रशासनिक विफलता की, या सरकारी संस्थानों में पारदर्शिता की, या सामाजिक बदलाव की—Khabar Aangan हर विषय को संवेदनशीलता और साहस के साथ उठाता है।

आपका छोटा सा सहयोग हमारी पत्रकारिता को नई मजबूती देता है।

GPay UPI Paytm AmazonPay Razorpay

WELCOME TO KHABAR AANGAN Suchna Se Sacchai Tak