नई दिल्ली, 16 अगस्त 2026 — फैट का नाम सुनते ही अक्सर लोग इसे सेहत के लिए नुकसानदायक मान लेते हैं, लेकिन हर तरह का फैट शरीर पर एक जैसा असर नहीं डालता। डाइट में मौजूद संतृप्त और ट्रांस फैट की जगह असंतृप्त वसा वाले विकल्पों को शामिल करना दिल की सेहत के लिए बेहतर माना जाता है। ऐसे खाद्य पदार्थ खराब कोलेस्ट्रॉल यानी एलडीएल के स्तर को नियंत्रित करने में मदद कर सकते हैं। अब सवाल यह है कि रोज के खाने में ऐसे कौन से फूड्स शामिल किए जा सकते हैं, जो स्वाद के साथ हेल्दी फैट भी दें?
हेल्दी फैट के लिए सिर्फ एवोकाडो ही जरूरी नहीं
हेल्दी फैट की बात होते ही सबसे पहले एवोकाडो का नाम लिया जाता है, लेकिन इसके अलावा भी कई ऐसे खाद्य पदार्थ हैं जिन्हें संतुलित डाइट का हिस्सा बनाया जा सकता है। अखरोट, चिया बीज, एक्स्ट्रा वर्जिन ऑलिव ऑयल, बादाम का मक्खन, दही, सार्डिन और अंडे ऐसे ही विकल्पों में शामिल हैं। इनमें अलग-अलग मात्रा में मोनोअनसैचुरेटेड और पॉलीअनसैचुरेटेड फैट के साथ दूसरे पोषक तत्व भी मिलते हैं।
हालांकि किसी खाद्य पदार्थ को केवल इसलिए ज्यादा मात्रा में खाना सही नहीं है क्योंकि उसमें हेल्दी फैट मौजूद है। नट्स, बीज, तेल और नट बटर जैसे फूड्स पोषक होने के साथ कैलोरी से भी भरपूर होते हैं। इसलिए असली फायदा तब मिलता है जब इनका इस्तेमाल मक्खन, ट्रांस फैट या ज्यादा संतृप्त वसा वाले विकल्पों की जगह संतुलित मात्रा में किया जाए। पूरी डाइट का संतुलन यहां सबसे ज्यादा मायने रखता है।
1. अखरोट
अखरोट हेल्दी फैट का एक अच्छा स्रोत माना जाता है और इसमें पॉलीअनसैचुरेटेड फैटी एसिड के साथ अल्फा-लिनोलेनिक एसिड भी पाया जाता है। इसके अलावा अखरोट में पॉलीफेनॉल जैसे एंटीऑक्सीडेंट मौजूद होते हैं। संतृप्त वसा वाले कुछ स्नैक्स की जगह बिना नमक वाले अखरोट लेना डाइट को बेहतर बनाने का आसान तरीका हो सकता है। इन्हें नाश्ते, सलाद या हल्के स्नैक के रूप में सीमित मात्रा में लिया जा सकता है।
अखरोट खाते समय मात्रा का ध्यान रखना भी जरूरी है। मुट्ठी भर नट्स सामान्य तौर पर पर्याप्त हो सकते हैं, क्योंकि इनकी थोड़ी मात्रा में भी काफी ऊर्जा और फैट होता है। नमक या चीनी से लेपित उत्पादों की जगह सामान्य या बिना नमक वाले अखरोट बेहतर विकल्प हो सकते हैं। अगर इन्हें मक्खन या तले हुए स्नैक्स की जगह इस्तेमाल किया जाए, तो डाइट में फैट की गुणवत्ता सुधारने में मदद मिल सकती है।
2. चिया बीज
चिया बीज आकार में छोटे होते हैं, लेकिन इनमें फाइबर, मैग्नीशियम और पॉलीअनसैचुरेटेड फैट जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। करीब 28 ग्राम चिया बीज में लगभग 6.72 ग्राम फैट होने की जानकारी दी गई है। इन्हें दही, दलिया, सलाद या अन्य भोजन में आसानी से शामिल किया जा सकता है। फाइबर और हेल्दी फैट का यह संयोजन रोज की डाइट को अधिक पौष्टिक बनाने का एक आसान तरीका हो सकता है।
चिया बीज को डाइट में शामिल करने का मतलब यह नहीं है कि केवल इन्हें खाने से कोलेस्ट्रॉल की समस्या दूर हो जाएगी। एलडीएल को नियंत्रित करने के लिए पूरी डाइट में संतृप्त वसा और ट्रांस फैट को कम करना अधिक महत्वपूर्ण है। फल, सब्जियां, साबुत अनाज और अच्छे प्रोटीन स्रोतों के साथ चिया बीज जैसे खाद्य पदार्थों को शामिल करना ज्यादा संतुलित तरीका है। यानी एक फूड के बजाय पूरी खाने की आदत पर ध्यान देना जरूरी है।
3. एक्स्ट्रा वर्जिन ऑलिव ऑयल
एक्स्ट्रा वर्जिन ऑलिव ऑयल में मुख्य रूप से मोनोअनसैचुरेटेड फैट पाया जाता है और इसमें कई फेनोलिक यौगिक भी होते हैं। संतृप्त वसा वाले विकल्पों की जगह असंतृप्त वसा वाले वनस्पति तेलों का इस्तेमाल करना हृदय के लिए बेहतर आहार पैटर्न का हिस्सा माना जाता है। यही वजह है कि खाना पकाने या सलाद की ड्रेसिंग में ऑलिव ऑयल को मक्खन जैसे विकल्पों की जगह इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है।
हालांकि ऑलिव ऑयल हेल्दी फैट का स्रोत है, फिर भी इसे असीमित मात्रा में इस्तेमाल करना सही नहीं होगा। तेल की कुल मात्रा आपकी ऊर्जा जरूरत और पूरी डाइट पर निर्भर करती है। अगर रोजमर्रा के खाने में मक्खन या अन्य अधिक संतृप्त वसा वाले विकल्पों को कम करके ऑलिव ऑयल जैसे विकल्पों को उचित मात्रा में शामिल किया जाए, तो यह डाइट में फैट की गुणवत्ता बेहतर करने का व्यावहारिक तरीका हो सकता है।
4. बादाम का मक्खन
बादाम का मक्खन मोनोअनसैचुरेटेड फैटी एसिड का अच्छा स्रोत हो सकता है। इसमें विटामिन ई, मैग्नीशियम और कैल्शियम जैसे पोषक तत्व भी पाए जाते हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार दो बड़े चम्मच बादाम के मक्खन से करीब 10.36 ग्राम मोनोअनसैचुरेटेड फैट मिल सकता है। इसे साबुत अनाज वाली ब्रेड या अन्य संतुलित भोजन के साथ लिया जा सकता है। हालांकि उत्पाद चुनते समय पोषण लेबल देखना जरूरी है।
बाजार में मिलने वाले कुछ नट बटर में अतिरिक्त चीनी, नमक या दूसरे घटक भी मिलाए जा सकते हैं। इसलिए संभव हो तो ऐसा उत्पाद चुनना बेहतर रहेगा जिसमें अनावश्यक चीनी और अत्यधिक नमक कम हो। साथ ही इसकी मात्रा भी नियंत्रित रखनी चाहिए, क्योंकि नट बटर ऊर्जा से भरपूर होता है। जिन लोगों को नट्स से एलर्जी है, उन्हें ऐसे उत्पादों से बचना चाहिए और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए।
5. दही
दही को भी हेल्दी फैट वाले खाद्य विकल्पों में शामिल किया गया है। करीब 170 ग्राम दही में लगभग 5 ग्राम फैट हो सकता है, हालांकि यह मात्रा उत्पाद के प्रकार के अनुसार बदल सकती है। दही से प्रोटीन और कैल्शियम जैसे पोषक तत्व भी मिलते हैं। लेकिन दही चुनते समय सिर्फ फैट की मात्रा देखना पर्याप्त नहीं है। अतिरिक्त चीनी, कुल कैलोरी और उत्पाद की पूरी पोषण संरचना पर भी ध्यान देना जरूरी है।
दही को फल, बीज या साबुत अनाज के साथ लिया जा सकता है, जिससे यह नाश्ते या हल्के भोजन का हिस्सा बन सकता है। हालांकि हर व्यक्ति के लिए फुल-फैट दही सबसे बेहतर विकल्प हो, ऐसा जरूरी नहीं है। खासकर जिन लोगों को पहले से कोलेस्ट्रॉल या हृदय संबंधी समस्या है, उन्हें अपनी डाइट में डेयरी उत्पादों की मात्रा और प्रकार तय करते समय डॉक्टर या योग्य आहार विशेषज्ञ की सलाह लेना ज्यादा उचित होगा।
6. सार्डिन जैसी तैलीय मछली
सार्डिन जैसी तैलीय मछलियां ओमेगा-3 फैटी एसिड का अच्छा स्रोत हैं। इनमें ईपीए और डीएचए जैसे फैटी एसिड के साथ प्रोटीन, विटामिन डी, आयरन, कैल्शियम, सेलेनियम और विटामिन बी12 जैसे पोषक तत्व भी मिलते हैं। हृदय के लिए बेहतर भोजन शैली में तैलीय मछली को शामिल करने की सलाह दी जाती है। सार्डिन के अलावा सैल्मन, मैकेरल और हेरिंग भी ओमेगा-3 वाले विकल्पों में शामिल हैं।
मछली को बहुत ज्यादा तेल में तलने के बजाय ग्रिल, बेक या दूसरे हल्के तरीके से तैयार करना बेहतर विकल्प हो सकता है। आहार संबंधी सलाह में सप्ताह में कम से कम दो बार गैर-तली हुई मछली को शामिल करने की बात कही जाती है। हालांकि भोजन का चुनाव व्यक्ति की पसंद, उपलब्धता और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार अलग हो सकता है। मछली से एलर्जी या किसी विशेष चिकित्सकीय डाइट की स्थिति में विशेषज्ञ की सलाह को प्राथमिकता देनी चाहिए।
7. अंडे
अंडे को लेकर लंबे समय से कोलेस्ट्रॉल की चर्चा होती रही है, लेकिन केवल एक खाद्य पदार्थ को देखकर पूरी डाइट और हृदय संबंधी जोखिम का आकलन नहीं किया जा सकता। अंडे में प्रोटीन के साथ फैट और ल्यूटिन तथा जेक्सैंथिन जैसे पोषक तत्व भी पाए जाते हैं। उपलब्ध रिपोर्ट में एक बड़े उबले अंडे में करीब 5.3 ग्राम फैट होने की जानकारी दी गई है।
हालांकि जिन लोगों का एलडीएल पहले से अधिक है, उनके लिए केवल अंडे की मात्रा नहीं बल्कि पूरी डाइट को देखना जरूरी है। अंडे अक्सर मक्खन, बेकन या अन्य अधिक संतृप्त वसा वाले खाद्य पदार्थों के साथ खाए जाते हैं, इसलिए भोजन का पूरा संयोजन मायने रखता है। व्यक्तिगत स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार अंडे की मात्रा अलग हो सकती है। ऐसे मामलों में डॉक्टर या आहार विशेषज्ञ की सलाह ज्यादा उपयोगी रहेगी।
हेल्दी फैट खाने का सबसे आसान तरीका
हेल्दी फैट को डाइट में शामिल करने का सबसे व्यावहारिक तरीका यह है कि संतृप्त वसा वाले खाद्य पदार्थों की जगह असंतृप्त वसा वाले विकल्प चुने जाएं। उदाहरण के लिए मक्खन की जगह जरूरत के अनुसार ऑलिव ऑयल, पैकेज्ड स्नैक्स की जगह बिना नमक वाले नट्स और ज्यादा तले हुए भोजन की जगह गैर-तली हुई तैलीय मछली को प्राथमिकता दी जा सकती है। इससे भोजन की कुल गुणवत्ता बेहतर हो सकती है।
इसी तरह सलाद या दही में थोड़े चिया बीज और नाश्ते में सीमित मात्रा में अखरोट शामिल किए जा सकते हैं। लेकिन हेल्दी फैट का मतलब ज्यादा फैट खाना नहीं है। नट्स, बीज और तेल कैलोरी से भरपूर होते हैं, इसलिए मात्रा नियंत्रित रखना जरूरी है। सबसे अच्छा तरीका यही है कि पूरी डाइट में फल, सब्जियां, साबुत अनाज, अच्छे प्रोटीन स्रोत और स्वस्थ वसा का संतुलन बनाया जाए।
बैड कोलेस्ट्रॉल के लिए क्या ज्यादा जरूरी है
एलडीएल यानी बैड कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने के लिए केवल यह देखना काफी नहीं है कि भोजन में फैट कितना है। फैट किस प्रकार का है, यह ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकता है। संतृप्त और ट्रांस फैट की जगह मोनोअनसैचुरेटेड तथा पॉलीअनसैचुरेटेड फैट वाले विकल्प लेना एलडीएल को कम करने में मदद कर सकता है और हृदय रोग के जोखिम को घटाने वाली भोजन शैली का हिस्सा बन सकता है।
इसका मतलब यह भी नहीं है कि केवल अखरोट, ऑलिव ऑयल या मछली खाने से कोलेस्ट्रॉल की समस्या खत्म हो जाएगी। अगर किसी व्यक्ति का एलडीएल अधिक है, तो नियमित जांच, शारीरिक गतिविधि, वजन प्रबंधन, संतुलित भोजन और जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय उपचार भी महत्वपूर्ण हो सकते हैं। कुछ लोगों में आनुवंशिक कारणों से कोलेस्ट्रॉल बढ़ सकता है, इसलिए ऐसे मामलों में सिर्फ डाइट पर निर्भर रहना उचित नहीं है।
रोज की डाइट में ये बदलाव कर सकते हैं
अगर आप अपनी डाइट में हेल्दी फैट बढ़ाना चाहते हैं तो शुरुआत छोटे बदलावों से की जा सकती है। रोज एक छोटी मात्रा में बिना नमक वाले नट्स लेना, सलाद या दही में चिया बीज मिलाना, खाना पकाने में जरूरत के मुताबिक स्वस्थ वनस्पति तेल इस्तेमाल करना और सप्ताह में तैलीय मछली को शामिल करना ऐसे कदम हैं जिन्हें भोजन की बाकी जरूरतों के साथ संतुलित किया जा सकता है।
सबसे अहम बात यह है कि हेल्दी फैट को किसी चमत्कारी इलाज की तरह नहीं देखा जाना चाहिए। हृदय और कोलेस्ट्रॉल के लिए पूरी जीवनशैली मायने रखती है। संतृप्त वसा और ट्रांस फैट को सीमित करना, फल-सब्जियों और साबुत अनाज को पर्याप्त जगह देना, स्वस्थ प्रोटीन चुनना और जरूरत के मुताबिक शारीरिक गतिविधि बनाए रखना ज्यादा व्यापक तरीका है। यदि पहले से कोलेस्ट्रॉल या हृदय रोग है, तो डाइट में बड़े बदलाव से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर है।
Disclaimer: यह लेख उपलब्ध पोषण संबंधी जानकारी और हृदय स्वास्थ्य से जुड़े विशेषज्ञ मार्गदर्शन के आधार पर तैयार किया गया है। हेल्दी फैट वाले खाद्य पदार्थ संतुलित आहार का हिस्सा हो सकते हैं, लेकिन किसी बीमारी का इलाज नहीं हैं। यदि आपको उच्च कोलेस्ट्रॉल, हृदय रोग, खाद्य एलर्जी या कोई अन्य स्वास्थ्य समस्या है, तो डाइट में बड़े बदलाव से पहले डॉक्टर या योग्य आहार विशेषज्ञ की सलाह लें।
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