Jammu Kashmir Rajya Sabha Election: 370 के बाद भाजपा का ‘मास्टरस्ट्रोक’—सत शर्मा की जीत के 4 एक्सट्रा वोट का राज!
Jammu and Kashmir Rajya Sabha Election में बड़ा राजनीतिक उलटफेर: भाजपा के सत शर्मा ने चौथी सीट जीतकर अनुच्छेद 370 के बाद पार्टी का खाता खोला। 32 वोटों का रहस्य, क्रॉस-वोटिंग के आरोप और चुनावी गणित का विस्तृत विश्लेषण पढ़ें। जानें, क्यों विपक्षी गठबंधन की एकता हुई तार-तार।
Jammu Kashmir Rajya Sabha Election 2025: Special Report
भाग 1: निर्णायक जीत और तात्कालिक राजनीतिक भूकंप
370 के बाद की पहली बड़ी प्रतीकात्मक जीत
जम्मू-कश्मीर की राजनीति में हालिया राज्यसभा चुनाव के नतीजों ने एक नया और निर्णायक अध्याय लिख दिया है। लंबे इंतजार के बाद केंद्र शासित प्रदेश की चार राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव संपन्न हुए, जिसने क्षेत्र की उभरती हुई राजनीतिक गतिशीलता को स्पष्ट कर दिया है। इन चार सीटों में से भले ही नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) ने तीन सीटों पर जीत दर्ज करके अपना प्रभुत्व बनाए रखा, लेकिन चौथी सीट पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उम्मीदवार और प्रदेश अध्यक्ष सत शर्मा की जीत ने पूरे राजनीतिक परिदृश्य में एक बड़ा भूचाल ला दिया है।
यह जीत महज़ एक सीट हासिल करने तक सीमित नहीं है। इसका महत्व इस तथ्य में निहित है कि यह अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद और 2024 के विधानसभा चुनाव के बाद गठित नई विधानसभा द्वारा आयोजित किया गया पहला उच्च सदन चुनाव था। यह परिणाम भाजपा के लिए एक महत्वपूर्ण प्रतीकात्मक प्रमाण के रूप में सामने आया है, जो दर्शाता है कि पार्टी केंद्र शासित प्रदेश में अपनी पकड़ लगातार मजबूत कर रही है। यह चुनाव, जो जम्मू-कश्मीर के लिए उच्च सदन में प्रतिनिधित्व की बहाली का प्रतीक था, अब विपक्षी एकता के भीतर मौजूद दरारों को उजागर करने का माध्यम बन गया है।
चुनाव परिणाम की घोषणा और सत शर्मा का प्रोफाइल
जम्मू-कश्मीर की चार सीटों के लिए हुए मतदान में नेशनल कॉन्फ्रेंस के उम्मीदवार चौधरी मोहम्मद रमजान ने 58 वोट, सज्जाद किचलू ने 56 वोट और गुरविंदर सिंह ओबेरॉय उर्फ शम्मी ओबेरॉय ने 31 वोट हासिल कर तीन सीटों पर निर्णायक जीत दर्ज की। हालाँकि, चौथी सीट के लिए मुकाबला बेहद रोमांचक रहा, जहाँ भाजपा के दिग्गज नेता सत शर्मा ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के उम्मीदवार इमरान नबी डार को पराजित किया।
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सत शर्मा 32 वोट पाकर चौथे और अंतिम विजेता बने, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी इमरान नबी डार को केवल 21 वोट ही मिल पाए। यह जीत शर्मा के लिए व्यक्तिगत और संगठनात्मक दोनों स्तरों पर बड़ी उपलब्धि मानी जाती है। वह जम्मू-कश्मीर भाजपा इकाई के एक अनुभवी और कद्दावर नेता हैं, जिन्होंने 2014 के जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव में जम्मू पश्चिम विधानसभा क्षेत्र से जीत हासिल की थी और कुछ समय के लिए आवास एवं विकास मंत्री के रूप में भी कार्य किया था। वर्तमान में वह प्रदेश भाजपा अध्यक्ष के रूप में संगठन का नेतृत्व करते हैं।
इस जीत के बाद, सत शर्मा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने विशेष रूप से उन अतिरिक्त विधायकों को धन्यवाद दिया, जिन्होंने पार्टी का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने सभी दलों के विधायकों से संपर्क किया और उन्होंने अपनी “अंतरात्मा की आवाज़” (Inner Voice) सुनकर ऐसे उम्मीदवार को वोट दिया जो व्यापक हित में काम करेगा। हालांकि, यह ‘अंतरात्मा की आवाज़’ का तर्क जल्द ही राजनीतिक खरीद-फरोख्त (हार्स ट्रेडिंग) के आरोपों से घिर गया।
Jammu and Kashmir Rajya Sabha Election 2025: अंतिम परिणाम (सीट 4)
उम्मीदवार
पार्टी
प्राप्त मत
परिणाम
संदर्भ
चौधरी मुहम्मद रमजान
NC
58
विजयी
[1]
सज्जाद किचलू
NC
56
विजयी
[1]
गुरविंदर सिंह ओबेरॉय/शम्मी ओबेरॉय
NC
31
विजयी
[1]
सत शर्मा
BJP
32
विजयी
[2, 1]
इमरान नबी डार
NC
21
पराजित
[1]
भाग 2: चुनावी अंकगणित और 32 वोटों का रहस्य
जम्मू-कश्मीर विधानसभा का चुनावी कॉलेज और राजनीतिक ताकत
यह राज्यसभा चुनाव 2024 में हुए विधानसभा चुनावों के बाद नवगठित विधानसभा के 90 सदस्यों के द्वारा किया गया था। राज्यसभा के चुनाव एकल संक्रमणीय मत (STV) प्रणाली के माध्यम से आयोजित किए जाते हैं, जिसमें विधायकों को प्राथमिकता के आधार पर वोट देना होता है। इस चुनाव में कुल 87 वोट डाले गए थे।
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2024 के विधानसभा चुनावों के बाद, नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) 42 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, जबकि भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 29 सीटें हासिल कीं। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) ने 6 सीटें और जम्मू-कश्मीर पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) ने 3 सीटें जीतीं, जबकि शेष सीटें अन्य छोटे दलों और निर्दलीय उम्मीदवारों के पास थीं। चार सीटों पर जीत सुनिश्चित करने के लिए, गठबंधन को मतों का प्रभावी प्रबंधन करना आवश्यक था। गणितीय गणना के आधार पर, एक सीट जीतने के लिए आवश्यक कोटा लगभग 18 या 19 वोटों का अनुमान लगाया जा सकता था।
विपक्षी एकता की विफलता: गणितीय विसंगति का विश्लेषण
नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) को अपनी विधानसभा सीटों (42) के अलावा भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (6) और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (3) का समर्थन प्राप्त था। पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती के निर्देश पर पीडीपी के तीनों सदस्यों ने NC उम्मीदवारों को वोट दिया। इस प्रकार, विपक्षी ‘इंडिया गठबंधन’ (INDIA Alliance) की ताकत न्यूनतम 51 विधायक थी। निर्दलीय विधायकों का एक वर्ग भी NC को समर्थन देने का वादा कर चुका था।
51 से अधिक विधायकों की स्पष्ट संख्या होने के बावजूद, NC के लिए चौथी सीट पर जीत सुनिश्चित करना असंभव हो गया। NC ने पहली दो सीटों पर तो बड़े अंतर से जीत हासिल की, जहाँ वोटों का क्रमशः 58 और 56 तक पहुँचना उनकी गठबंधन ताकत को दर्शाता है। हालाँकि, जब चौथी सीट का नंबर आया, तो NC के उम्मीदवार इमरान नबी डार को केवल 21 वोट मिले।
इसके विपरीत, भाजपा के पास सदन में केवल 29 विधायक थे। फिर भी, उनके उम्मीदवार सत शर्मा ने 32 वोट हासिल किए। यह सीधा गणितीय विरोधाभास इस बात की पुष्टि करता है कि भाजपा को विरोधी खेमे के कम से कम 3 से 4 अतिरिक्त वोट मिले। यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि विरोधी गठबंधन, जिसकी शक्ति कागज़ पर 51 से अधिक थी, आंतरिक रूप से एकजुट नहीं रह सका।
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क्रॉस-वोटिंग और हार्स ट्रेडिंग के गंभीर आरोप
चौथी सीट पर भाजपा की अप्रत्याशित जीत ने नेशनल कॉन्फ्रेंस को सीधे तौर पर ‘खरीद-फरोख्त’ और ‘हार्स ट्रेडिंग’ का आरोप लगाने पर मजबूर कर दिया। NC उम्मीदवार इमरान नबी डार ने सार्वजनिक रूप से दावा किया कि चुनाव में गड़बड़ी हुई है और विधायकों की खरीद ज़रूर हुई है, क्योंकि भाजपा के पास एक सीट बचाने के लिए भी पर्याप्त विधायक नहीं थे (केवल 29), ऐसे में 32 वोट आना अनैतिक प्रलोभन के बिना संभव नहीं था।
डार ने उन विधायकों को बेनकाब करने की धमकी भी दी, जिन्होंने गठबंधन से किया गया अपना वादा तोड़ा। उनका मानना था कि यदि गठबंधन के पास स्पष्ट बहुमत था, तो यह राजनीतिक दबाव या वित्तीय प्रलोभन के बिना संभव नहीं था। यह घटना क्षेत्रीय दलों के बीच विश्वास में गंभीर कमी लाती है और आगामी विधानसभा चुनावों से पहले विपक्षी एकता के टूटने का स्पष्ट संकेत देती है।
इसके जवाब में, सत शर्मा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए तर्क दिया कि विधायकों ने ‘अंतरात्मा की आवाज़’ सुनी और उन्हें वोट दिया। भाजपा ने इस राजनीतिक लाभ के लिए ‘नैतिकता’ के आवरण का उपयोग किया, जो दर्शाता है कि केंद्र में मजबूत सत्ताधारी दल किस प्रकार क्षेत्रीय राजनीति में सूक्ष्म रणनीतिक प्रबंधन और प्रभाव का उपयोग करके स्थानीय विधायकों को अपनी ओर आकर्षित करने में सफल रहा है। यह रणनीति क्षेत्रीय दलों की कमजोरी को उजागर करती है, जहाँ विधायक सत्ताधारी दल के साथ जुड़ने में अपना भविष्य देखते हैं।
भाग 3: संवैधानिक और राजनीतिक निहितार्थ: 370 के बाद का विमर्श
प्रतिनिधित्व की बहाली और संवैधानिक महत्व
अनुच्छेद 370 के निरस्त होने और बाद में जम्मू-कश्मीर विधानसभा के गठन में देरी के कारण, उच्च सदन में केंद्र शासित प्रदेश का प्रतिनिधित्व एक लंबे समय से शून्य था। फरवरी में राज्यसभा के चार सदस्यों का कार्यकाल समाप्त हो जाने से जम्मू-कश्मीर की आवाज़ राष्ट्रीय पटल पर अनुपस्थित हो गई थी। इस चुनाव ने उच्च सदन में J&K के प्रतिनिधियों की वापसी को सुनिश्चित किया है।
यह चुनाव न केवल एक राजनीतिक प्रक्रिया थी, बल्कि केंद्र सरकार के उस दावे को मजबूत करने वाला एक संवैधानिक कदम भी था कि क्षेत्र में लोकतांत्रिक प्रक्रियाएं, संवैधानिक बदलावों के बावजूद, लगातार जारी हैं। उच्च सदन में अब इन चार सदस्यों के माध्यम से जम्मू-कश्मीर के मुद्दों को राष्ट्रीय मंच पर उठाया जा सकेगा।
क्षेत्रीय ध्रुवीकरण: जम्मू की आकांक्षाओं का प्रतीक
सत शर्मा की जीत केंद्र शासित प्रदेश में चल रहे राजनीतिक ध्रुवीकरण को भी दर्शाती है। सत शर्मा जम्मू क्षेत्र से आते हैं, जबकि नेशनल कॉन्फ्रेंस के तीनों विजेता (चौधरी मोहम्मद रमजान, सज्जाद किचलू, शम्मी ओबेरॉय) मुख्य रूप से कश्मीर और चेनाब घाटी क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
भाजपा की यह जीत, जो एक जम्मू-आधारित नेता की सफलता है, भाजपा को जम्मू क्षेत्र में अपने जनाधार को मजबूत करने का मौका देती है, खासकर आगामी विधानसभा चुनावों से पहले। यह परिणाम दर्शाता है कि भाजपा क्षेत्रीय मुद्दों पर केंद्रित रणनीति को बढ़ावा देगी, जबकि NC ने कश्मीर घाटी में अपना पारंपरिक प्रभुत्व बनाए रखा है। यह क्षेत्रीय संतुलन का विमर्श आगामी चुनावी रणनीति का केंद्रीय बिंदु बन सकता है।
सज्जाद लोन का ‘फिक्स्ड मैच’ आरोप और तीसरे ध्रुव की संभावना
पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के चेयरमैन सज्जाद गनी लोन ने राज्यसभा चुनाव के मतदान से न केवल परहेज किया, बल्कि मतदान पैटर्न को देखते हुए नेशनल कॉन्फ्रेंस और भाजपा पर मिलीभगत का सनसनीखेज आरोप भी लगाया। लोन ने इसे ‘फिक्स्ड मैच’ बताते हुए दोनों दलों को ‘शैतानी धुरी’ (Axis of Evil. NC and BJP) करार दिया।
लोन का यह बयान दर्शाता है कि वह क्षेत्रीय राजनीति में खुद को NC और BJP दोनों से अलग देखना चाहते हैं। उनका बहिष्कार NC के हार्स ट्रेडिंग आरोपों के समानांतर एक अलग ही राजनीतिक विमर्श को जन्म देता है, जो यह संकेत देता है कि विधानसभा चुनावों से पहले जम्मू-कश्मीर में एक ‘तीसरा मोर्चा’ या एक वैकल्पिक राजनीतिक ध्रुव उभरने की संभावना है। लोन जैसे नेता, जो प्रमुख दलों की आंतरिक कलह और कथित मिलीभगत से असंतुष्ट हैं, वे असंतुष्ट वोट बैंक को लक्षित कर सकते हैं, जिससे मुख्य दलों के लिए प्रतिस्पर्धा और भी कठिन हो जाएगी।
भाग 4: नेशनल कॉन्फ्रेंस के लिए चेतावनी और भविष्य के राजनीतिक समीकरण
इंडिया गठबंधन की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल
यह राज्यसभा चुनाव नेशनल कॉन्फ्रेंस और उसके सहयोगी दलों (कांग्रेस और पीडीपी) के लिए एक गंभीर चेतावनी है। पीडीपी और कांग्रेस ने व्हिप जारी करके अपने विधायकों को NC उम्मीदवारों के पक्ष में मतदान करने का निर्देश दिया था, इसके बावजूद क्रॉस-वोटिंग हुई। यह घटनाक्रम ‘इंडिया गठबंधन’ की जम्मू-कश्मीर इकाई की आंतरिक कमजोरी और अनुशासन में कमी को उजागर करता है।
गठबंधन के भीतर विश्वास का टूटना भविष्य के चुनावों, विशेषकर महत्वपूर्ण विधानसभा चुनावों में एकता बनाए रखने की क्षमता पर गंभीर संदेह पैदा करता है। यदि व्हिप जारी होने के बावजूद विधायक पाला बदल रहे हैं, तो यह केंद्रीय नेतृत्व के नियंत्रण में कमी और क्षेत्रीय असंतोष का स्पष्ट संकेत है। NC उम्मीदवार इमरान नबी डार द्वारा असंतुष्ट विधायकों को बेनकाब करने की सार्वजनिक धमकी भी राजनीतिक तनाव को बढ़ाएगी, लेकिन गठबंधन में अनुशासन बनाए रखने के लिए यह आवश्यक कदम माना जा रहा है।
सत शर्मा की जीत का संगठनात्मक महत्व और भाजपा की रणनीति
सत शर्मा की जीत आगामी विधानसभा चुनावों से पहले भाजपा कार्यकर्ताओं के लिए एक बड़ा मनोबल बढ़ाने वाला कारक है। यह परिणाम यह दर्शाता है कि भाजपा क्षेत्रीय राजनीति में केवल अपने दम पर नहीं, बल्कि राजनीतिक प्रबंधन और सूक्ष्म रणनीति के माध्यम से भी निर्णायक जीत हासिल कर सकती है। भाजपा ने सफलतापूर्वक उन निर्दलीय और असंतुष्ट विधायकों को लक्षित किया, जो क्षेत्रीय दलों की आंतरिक कलह से त्रस्त थे।
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यह परिणाम भविष्य में छोटे दलों और निर्दलीय उम्मीदवारों को अपनी तरफ खींचने की भाजपा की क्षमता को मजबूत करता है। भाजपा इस जीत को एक संदेश के रूप में प्रसारित करेगी कि केंद्र शासित प्रदेश में विकास और स्थायित्व केवल केंद्र में सत्तारूढ़ दल के माध्यम से ही संभव है।
STV प्रणाली में NC का कुप्रबंधन
क्रॉस-वोटिंग के राजनीतिक पहलू के अलावा, इस हार का एक तकनीकी पहलू भी है जो नेशनल कॉन्फ्रेंस की खराब वोट प्रबंधन रणनीति को दर्शाता है। राज्यसभा चुनाव एकल संक्रमणीय मत (STV) प्रणाली पर आधारित होते हैं, जहाँ वोटों को विभिन्न उम्मीदवारों के बीच उनकी वरीयता के अनुसार संतुलित तरीके से विभाजित करना होता है।
नेशनल कॉन्फ्रेंस ने पहले दो उम्मीदवारों (चौधरी मोहम्मद रमजान और सज्जाद किचलू) के लिए अत्यधिक वरीयता वोट का उपयोग किया, जहाँ उन्हें क्रमशः 58 और 56 वोट मिले। यह अत्यधिक केंद्रीकरण दर्शाता है कि NC ने वोटों को कुशलतापूर्वक हस्तांतरित करने की रणनीति पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया। इसका सीधा परिणाम यह हुआ कि चौथे उम्मीदवार (इमरान नबी डार) के लिए केवल 21 वोट ही बच पाए, जबकि गठबंधन के पास 51 से अधिक विधायकों की संख्या थी। यदि वे वोटों को अधिक संतुलित तरीके से विभाजित करते और प्रत्येक उम्मीदवार के लिए अपेक्षित कोटा (लगभग 19 वोट) सुनिश्चित करते, तो चौथी सीट सुरक्षित की जा सकती थी, भले ही कुछ क्रॉस-वोटिंग हुई हो। इस तकनीकी चूक ने भाजपा को अपने 29 वोटों को अधिकतम प्रभाव के साथ प्रबंधित करने और 3-4 अतिरिक्त मतों के बल पर जीत हासिल करने का अवसर दिया।
भाग 5: निष्कर्ष और भविष्य की राजनीतिक राह
प्रमुख निष्कर्ष और उपसंहार
जम्मू-कश्मीर का यह Jammu and Kashmir Rajya Sabha Election क्षेत्र की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ है। यह केवल चार सीटों का बंटवारा नहीं था, बल्कि अनुच्छेद 370 के बाद क्षेत्रीय राजनीतिक गठबंधन की ताकत और कमजोरी की पहली कड़ी परीक्षा थी। इस परिणाम ने स्पष्ट कर दिया है कि नेशनल कॉन्फ्रेंस ने तीन सीटें जीतकर अपनी ताकत बरकरार रखी है, लेकिन भाजपा ने राजनीतिक प्रबंधन और असंतुष्ट विधायकों को लक्षित करने की अपनी रणनीति के बल पर एक महत्वपूर्ण प्रतीकात्मक जीत हासिल की।
सत शर्मा को मिले 32 वोटों ने विपक्षी गठबंधन की आंतरिक दरारों को उजागर कर दिया है। ‘अंतरात्मा की आवाज़’ बनाम ‘हार्स ट्रेडिंग’ का विमर्श आगामी राजनीतिक संघर्षों का केंद्र बिंदु रहेगा। इस जीत ने केंद्र सरकार को जम्मू-कश्मीर में लोकतंत्र की बहाली और विकास के एजेंडे को उच्च सदन में मजबूत करने का मौका दिया है।
आगामी विधानसभा चुनावों पर प्रभाव
यह परिणाम NC और व्यापक INDIA गठबंधन को अपनी संगठनात्मक रणनीति, आंतरिक अनुशासन और छोटे दलों के साथ तालमेल पर तुरंत पुनर्विचार करने के लिए मजबूर करेगा। गठबंधन को उन विधायकों को बेनकाब करने और अनुशासित करने की चुनौती का सामना करना पड़ेगा, जिन्होंने पाला बदला। यदि यह अनुशासनहीनता नियंत्रित नहीं की गई, तो आगामी विधानसभा चुनावों में इसका व्यापक नकारात्मक असर पड़ सकता है।
दूसरी ओर, भाजपा इस जीत का उपयोग जम्मू-कश्मीर में अपनी राजनीतिक पकड़ और विकास के एजेंडे को मजबूत करने के लिए करेगी। सत शर्मा की जीत यह संकेत देती है कि राजनीतिक प्रबंधन के माध्यम से भाजपा क्षेत्रीय दलों के गढ़ में सेंध लगा सकती है। यह परिणाम विधानसभा चुनावों से पहले जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक अस्थिरता और क्षेत्रीय ध्रुवीकरण की संभावनाओं को बढ़ाएगा, जिससे आने वाले चुनावी मुकाबले बेहद प्रतिस्पर्धी और जटिल होंगे।
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