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परीक्षा पर बड़ा संकट! JKPSC के पेपर लीक होने का ‘राज़’ क्या है? छात्रों ने क्यों माँगा सभी परीक्षाओं को रद्द करने का हिसाब?

परीक्षा पर बड़ा संकट! JKPSC के पेपर लीक होने का ‘राज़’ क्या है? छात्रों ने क्यों माँगा सभी परीक्षाओं को रद्द करने का हिसाब?

Khabar Aangan Published on: 29 नवम्बर 2025

7 दिसंबर की प्रारंभिक परीक्षा से पहले JKPSC पर बड़ा दबाव, जानिए क्यों छात्रों को लग रहा है कि उनके भविष्य के साथ ‘खेल’ हो रहा है

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जम्मू और कश्मीर लोक सेवा आयोग (JKPSC) इस समय छात्रों के विरोध और गंभीर आरोपों का सामना कर रहा है। जहाँ एक ओर आयोग ने 7 दिसंबर 2025 को होने वाली संयुक्त प्रतियोगी प्रारंभिक परीक्षा (CCE Prelims) की तारीख़ का ऐलान कर दिया है, वहीं दूसरी ओर, पिछले दिनों हुई लेक्चरर भर्ती परीक्षा में पेपर लीक और धांधली के आरोपों के कारण छात्रों में भारी आक्रोश है। यह विवाद JKPSC की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।

छात्रों का आरोप है कि 9 नवंबर 2025 को हुई इंग्लिश लेक्चरर की परीक्षा का पेपर 6 नवंबर को ही एक निजी कोचिंग सेंटर में पढ़ा दिया गया था, जिसके स्क्रीन रिकॉर्डिंग सबूत भी हैं। इस गंभीर आरोप ने JKPSC की कार्यप्रणाली पर संदेह पैदा कर दिया है। छात्र अब मांग कर रहे हैं कि केवल कुछ परीक्षाएं ही नहीं, बल्कि सभी विवादित परीक्षाओं को रद्द किया जाए और एक स्वच्छ और पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

1. JKPSC पर लगे पेपर लीक के गंभीर आरोप

JKPSC की विश्वसनीयता पर सबसे बड़ा खतरा हाल ही में हुई कुछ परीक्षाओं में अनियमितताओं के कारण आया है।

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छात्रों का दावा है कि लेक्चरर भर्ती परीक्षा, जिसका आयोजन 9 नवंबर 2025 को हुआ था, उसमें बड़ा ‘खेल’ हुआ है। आरोप है कि यह पेपर 6 नवंबर को ही होम एकेडमी जैसे कोचिंग संस्थानों को उपलब्ध करा दिया गया था। यह साफ़ तौर पर दर्शाता है कि JKPSC के अंदर कुछ अफ़सरों और कोचिंग माफिया के बीच सांठगांठ है। छात्र सवाल उठा रहे हैं कि अगर पेपर परीक्षा से तीन दिन पहले लीक हो जाता है, तो लाखों छात्रों की मेहनत का क्या फायदा? यह JKPSC के इतिहास में सबसे गंभीर आरोपों में से एक है।

2. JKPSC की कार्यप्रणाली पर छात्रों का आक्रोश

JKPSC के फैसलों के कारण छात्र लगातार असंतोष व्यक्त कर रहे हैं।

पिछले दिनों सिविल जज की प्रारंभिक परीक्षा को भी रद्द कर दिया गया था, जिससे छात्रों में भ्रम की स्थिति पैदा हुई थी। छात्र सवाल कर रहे हैं कि जब JKPSC एक परीक्षा को रद्द करता है, तो दूसरी परीक्षा को क्यों नहीं? यह असंतुलित निर्णय छात्रों के दिमाग पर नकारात्मक असर डाल रहा है। सिविल जज के छात्रों को जहां अपनी परीक्षा के लिए और समय मिला है, वहीं अन्य भर्ती परीक्षाओं के छात्रों को लगातार JKPSC के बदलते शेड्यूल से जूझना पड़ रहा है।

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