प्रतिष्ठित St Xaviers कॉलेज में राष्ट्रीय सेमिनार के दौरान 10 से ज़्यादा छात्राओं ने शिकायत दर्ज कराई, कैंपस में मची सनसनी
मुंबई के सबसे प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में से एक, St Xaviers कॉलेज इस समय एक गंभीर विवाद के केंद्र में है। कॉलेज में आयोजित एक राष्ट्रीय सेमिनार के लिए बुलाए गए एक अतिथि वक्ता (Guest Speaker) पर छात्राओं ने यौन उत्पीड़न और गलत व्यवहार के गंभीर आरोप लगाए हैं। कम से कम 10 छात्राओं ने इस संबंध में कॉलेज की आंतरिक शिकायत समिति (Internal Complaints Committee – ICC) में लिखित शिकायत दर्ज कराई है। यह घटना St Xaviers जैसे प्रतिष्ठित परिसर की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करती है।
कॉलेज प्रशासन ने इस गंभीर शिकायत पर तुरंत कार्रवाई करते हुए अतिथि वक्ता को परिसर छोड़ने का आदेश दिया और उनके मूल विश्वविद्यालय को भी इस घटना की जानकारी दी है। हालांकि, छात्रों का आरोप है कि कॉलेज प्रशासन ने इस मामले को दबाने की कोशिश की, जिससे कार्रवाई में थोड़ी देरी हुई। St Xaviers कॉलेज प्रशासन ने कहा है कि उनकी नीति यौन उत्पीड़न के प्रति शून्य-सहिष्णुता की है और छात्रों की सुरक्षा उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है।
1. St Xaviers विवाद: गेस्ट स्पीकर पर लगे गंभीर आरोप क्या हैं?
यह पूरी घटना इसी सप्ताह हुई राष्ट्रीय चर्चासत्र के दौरान हुई, जब अतिथि वक्ता को कैंपस में ही ठहराया गया था।
- आपत्तिजनक व्यवहार: छात्राओं ने आरोप लगाया है कि वक्ता ने बिना उनकी सहमति के उनकी तस्वीरें लीं। इसके अलावा, छात्रों ने दावा किया कि वक्ता ने कैंपस में घूमते समय कई छात्राओं को आपत्तिजनक तरीके से छुआ और उनके साथ दुर्व्यवहार किया।
- छात्रों की पहल: छात्रों ने बताया कि जब उन्हें वक्ता के आपत्तिजनक व्यवहार की जानकारी मिली, तो उन्होंने खुद इस मामले की छानबीन शुरू की। छात्रों के अनुसार, वक्ता के फ़ोन में छात्राओं की कई आपत्तिजनक तस्वीरें मिलीं, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि उनकी शिकायतें सही थीं। इस घटना ने St Xaviers के छात्रों को हिलाकर रख दिया।
- तत्काल निष्कासन: जब यह शिकायत St Xaviers प्रशासन तक पहुँची, तो प्रिंसिपल ने वक्ता को उसी दिन परिसर छोड़कर जाने का आदेश दिया, जबकि उन्हें अगले दिन भी सत्र लेना था।
2. प्रशासन पर आरोप: St Xaviers में क्यों हुई कार्रवाई में देरी?
St Xaviers कॉलेज प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई का दावा किया, लेकिन छात्रों के एक वर्ग ने प्रशासन पर मामले को दबाने या कार्रवाई में देरी करने का आरोप लगाया है।
- विरोध और मांग: छात्रों के एक समूह ने आरोप लगाया कि शिकायत मिलने के बावजूद, प्रिंसिपल की अनुपस्थिति के कारण तत्काल कार्रवाई नहीं हुई। छात्रों ने स्पष्ट कहा कि अगर वक्ता पर कार्रवाई नहीं हुई, तो वे कार्यक्रम में काम करना बंद कर देंगे।
- गोपनीयता का दबाव: कुछ छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि St Xaviers प्रशासन ने उन्हें इस विषय पर सार्वजनिक रूप से बोलने से मना किया था, जिससे उन्हें लगा कि कॉलेज घटना को दबाने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, कॉलेज प्रशासन ने इस आरोप को खारिज कर दिया है।
- कमिटी का गठन: प्रिंसिपल डॉ. करुणा गोकर्ण ने मीडिया को बताया कि St Xaviers हमेशा अपने छात्रों के साथ खड़ा रहा है। उन्होंने पुष्टि की कि आईसीसी (ICC) को लिखित शिकायत मिलते ही विस्तृत जाँच शुरू कर दी गई है।
3. St Xaviers विवाद का परिसर सुरक्षा पर असर
यह घटना St Xaviers जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में बाहरी वक्ताओं की पृष्ठभूमि की जाँच की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
- सुरक्षा प्रोटोकॉल: St Xaviers कॉलेज अब सभी भविष्य के अतिथि वक्ताओं के लिए पृष्ठभूमि जाँच (Background Checks) की प्रक्रिया को और मजबूत करने की योजना बना रहा है।
- महिला सुरक्षा: मुंबई में सबसे सुरक्षित माने जाने वाले कैंपस में इस तरह की घटना होना, छात्राओं की सुरक्षा और आत्मविश्वास के लिए एक बड़ा झटका है। St Xaviers को अब अपनी सुरक्षा प्रोटोकॉल की समीक्षा करनी होगी।
4. निष्कर्ष: St Xaviers को विश्वसनीयता बहाल करनी होगी
St Xaviers का यह विवाद दर्शाता है कि प्रतिष्ठा और विरासत सुरक्षा की गारंटी नहीं हो सकती। St Xaviers प्रशासन को अब पूरी पारदर्शिता दिखानी होगी और ICC की जाँच रिपोर्ट को सार्वजनिक करना होगा ताकि छात्रों का भरोसा बहाल हो सके। यह घटना भारतीय शिक्षण संस्थानों के लिए एक चेतावनी है कि अतिथि वक्ताओं को बुलाते समय सुरक्षा नियमों में कोई ढील नहीं दी जा सकती।
Disclaimer (संबंधित अस्वीकरण): यह समाचार रिपोर्ट St Xaviers कॉलेज में छात्रों द्वारा आंतरिक शिकायत समिति (ICC) को दी गई शिकायत और मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है। यह यौन उत्पीड़न के आरोपों की सत्यता को सत्यापित नहीं करता है। St Xaviers कॉलेज की ICC और पुलिस इस मामले की गहन जांच कर रही है।
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