हाल ही में, भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री और विपक्षी नेता खालिदा जिया (Khaleda Zia) के खराब स्वास्थ्य पर गहरी चिंता व्यक्त की है और ढाका को हर संभव चिकित्सा सहायता प्रदान करने का आश्वासन दिया है। यह कदम न केवल दोनों पड़ोसी देशों के बीच के मजबूत मानवीय बंधन को दर्शाता है, बल्कि यह भी साबित करता है कि भारत अपनी ‘पड़ोसी पहले’ (Neighbourhood First) की विदेश नीति में मानवीय आधार को कितना महत्व देता है।
खालिदा जिया, जो बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की अध्यक्ष हैं, लंबे समय से गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही हैं। जेल की सज़ा के कारण उन्हें चिकित्सा देखभाल तक पहुँचने में लगातार चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। इस संवेदनशील राजनीतिक माहौल में, पीएम मोदी का यह बयान कूटनीति और मानवता का एक दुर्लभ मिश्रण प्रस्तुत करता है।
खालिदा जिया का गंभीर स्वास्थ्य संकट
79 वर्षीय खालिदा जिया, जो तीन बार बांग्लादेश की प्रधानमंत्री रह चुकी हैं, कई वर्षों से भ्रष्टाचार के मामलों में दोषी ठहराए जाने के बाद से ही नजरबंद हैं। हालांकि, सरकार ने मानवीय आधार पर उनकी सज़ा को स्थगित कर दिया है, लेकिन उनकी स्वास्थ्य स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है।
प्रमुख स्वास्थ्य समस्याएँ:
•लिवर सिरोसिस (Liver Cirrhosis): यह उनकी सबसे गंभीर समस्या है, जिसके लिए विशेषज्ञ चिकित्सा हस्तक्षेप की आवश्यकता है।
•डायबिटीज (Diabetes): अनियंत्रित शर्करा स्तर उनकी अन्य जटिलताओं को बढ़ा रहा है।
•हृदय और किडनी संबंधी समस्याएँ: वह कार्डियक और गुर्दे की बीमारियों से भी पीड़ित हैं, जिससे उनके इलाज को और भी जटिल बना दिया गया है।
बीएनपी लगातार मांग कर रही है कि खालिदा जिया को विदेश में इलाज कराने की अनुमति दी जाए, क्योंकि उनका मानना है कि बांग्लादेश में उनकी बीमारी का पर्याप्त इलाज उपलब्ध नहीं है। राजनीतिक विवादों से घिरे इस मामले ने बांग्लादेश की घरेलू राजनीति में एक तनावपूर्ण स्थिति पैदा कर दी है।

