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Darbhanga News: LNMU में पुलिस और छात्रों के बीच हाई-वोल्टेज ड्रामा, संगीत विभाग पर बुलडोजर चलने का खतरा,

पुलिस की गाड़ियों का काफिला यूनिवर्सिटी के गेट पर क्यों आ धमका? संगीत सीखने वाले छात्रों ने किसके सामने घुटने टेकने से मना कर दिया? 26 दिसंबर की वह तारीख आखिर क्यों बन गई है खौफ का दूसरा नाम? इस हाई-वोल्टेज ड्रामा की असली वजह आपको सन्न कर देगी।
Khabar Aangan Monday, 15 December 2025, 12:34 AM
Darbhanga News: LNMU में पुलिस और छात्रों के बीच हाई-वोल्टेज ड्रामा, संगीत विभाग पर बुलडोजर चलने का खतरा,
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मिथिला की शैक्षणिक धरोहर कहे जाने वाले LNMU (ललित नारायण मिथिला यूनिवर्सिटी) के इतिहास में आज का दिन काले अक्षरों में लिखा जाएगा। कैंपस में सुरों की जगह आज पुलिस के सायरन और छात्रों के आक्रोश ने ले ली है।

यूनिवर्सिटी का ऐतिहासिक संगीत एवं नाट्य विभाग अपने अस्तित्व की सबसे बड़ी जंग लड़ रहा है। कोर्ट के आदेश पर प्रशासन की टीम जब विभाग को खाली कराने पहुंची, तो वहां का मंजर देखकर हर कोई सहम गया।

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मामला इतना बढ़ चुका है कि LNMU के छात्र अब आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं। उन्होंने पुलिस के सामने मानव श्रृंखला बनाकर साफ कर दिया कि वे अपनी क्लासरूम को उजड़ने नहीं देंगे। प्रशासन ने भारी दबाव के बीच 26 दिसंबर तक का अल्टीमेटम दिया है।

यह तारीख अब एक टाइम बम की तरह टिक-टिक कर रही है। आखिर राज परिवार और यूनिवर्सिटी के बीच ऐसा क्या हुआ कि नौबत तालेबंदी तक आ गई?

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आज की इस रिपोर्ट में हम LNMU के इस सबसे बड़े विवाद की तह तक जाएंगे। जानेंगे कि कोर्ट का वह आदेश क्या है जिसने प्रशासन के हाथ बांध दिए हैं और हजारों छात्रों का भविष्य अब किस ओर जा रहा है।

कैंपस में पुलिस छावनी और छात्रों का घेराव

रविवार की सुबह LNMU के संगीत विभाग के बाहर जो हुआ, वह किसी फिल्म के दृश्य से कम नहीं था। सदर एसडीओ के नेतृत्व में भारी पुलिस बल और मजिस्ट्रेट जब विभाग पर कब्जा लेने पहुंचे, तो उन्हें अंदाजा नहीं था कि सामना छात्रों की दीवार से होगा। प्रशासन का मकसद साफ था—कोर्ट की डिक्री का पालन करते हुए जमीन का कब्जा असली मालिकों को सौंपना।

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लेकिन LNMU के छात्रों ने हार नहीं मानी। जो छात्र कल तक अपनी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे थे, वे आज गेट पर धरने पर बैठ गए। उनका कहना था कि बीच सत्र में विभाग को सील करना उनके भविष्य की हत्या करने जैसा है। पुलिस और छात्रों के बीच तीखी नोकझोंक हुई, जिससे तनाव चरम पर पहुंच गया। माहौल इतना गर्म था कि किसी भी वक्त लाठीचार्ज की नौबत आ सकती थी।

जमीन विवाद: राज परिवार बनाम यूनिवर्सिटी

इस पूरे बवाल की जड़ में एक पुराना जमीनी विवाद है। जिस जमीन पर LNMU का संगीत विभाग खड़ा है, उस पर दरभंगा राज परिवार के ‘कामेश्वर सिंह धार्मिक न्यास’ का दावा है। न्यास का कहना है कि यूनिवर्सिटी ने लीज की शर्तों का उल्लंघन किया है और लीज की अवधि भी समाप्त हो चुकी है।

कोर्ट ने इस मामले में न्यास के पक्ष में फैसला सुनाया है। आदेश के मुताबिक, LNMU प्रशासन को यह जमीन खाली करके वापस न्यास को सौंपनी होगी। यूनिवर्सिटी प्रशासन अपनी कानूनी लड़ाई हार चुका है, जिसके चलते अब प्रशासन पर कोर्ट की अवमानना का खतरा मंडरा रहा है। यही वजह है कि प्रशासन इतनी जल्दबाजी में विभाग खाली कराने पहुंचा था।

26 दिसंबर: राहत या कयामत की रात?

छात्रों के उग्र रूप और चल रही सेमेस्टर परीक्षाओं को देखते हुए जिला प्रशासन को बैकफुट पर आना पड़ा। LNMU की रजिस्ट्रार ने मौके पर पहुंचकर प्रशासन से समय की मांग की। उन्होंने तर्क दिया कि अभी परीक्षाएं चल रही हैं, ऐसे में कार्रवाई करने से कानून व्यवस्था बिगड़ सकती है।

काफी बातचीत के बाद प्रशासन ने LNMU को 26 दिसंबर 2025 तक की मोहलत दी है। लेकिन यह राहत कम और चेतावनी ज्यादा है। इसका मतलब है कि परीक्षाएं खत्म होते ही प्रशासन फिर से कार्रवाई कर सकता है। छात्रों को डर है कि क्रिसमस की छुट्टियों के बाद जब वे लौटेंगे, तो शायद उनका विभाग वहां से गायब हो चुका होगा।

विरासत बचाने की जद्दोजहद

यह सिर्फ एक जमीन का टुकड़ा नहीं है, बल्कि मिथिला की कला और संस्कृति का केंद्र है। LNMU का संगीत विभाग दशकों से ध्रुपद और ठुमरी जैसी गायन शैलियों को जीवित रखे हुए है। अगर यह विभाग बंद होता है, तो यहां के वाद्य यंत्रों, रिकॉर्डिंग स्टूडियो और विरासत को बचाना मुश्किल हो जाएगा।

पुराने छात्रों और एलुमनाई ने भी इस मुद्दे पर LNMU प्रशासन को घेरा है। उनका आरोप है कि अधिकारियों की लापरवाही के कारण आज यह नौबत आई है। अगर समय रहते वैकल्पिक व्यवस्था की गई होती, तो आज छात्रों को सड़क पर नहीं उतरना पड़ता।

क्या है आगे का रास्ता?

फिलहाल LNMU प्रशासन पटना हाई कोर्ट से स्टे (Stay) ऑर्डर लेने की कोशिश कर रहा है। इसके अलावा, सरकार से भी हस्तक्षेप की मांग की जा रही है। एक रास्ता यह भी है कि सरकार इस जमीन का अधिग्रहण कर ले।

लेकिन अगर 26 दिसंबर तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला, तो LNMU कैंपस में स्थिति विस्फोटक हो सकती है। छात्र संगठनों ने चेतावनी दी है कि वे किसी भी कीमत पर विभाग पर ताला नहीं लगने देंगे।

निष्कर्ष

कुल मिलाकर, LNMU अभी अपने सबसे चुनौतीपूर्ण दौर से गुजर रहा है। एक तरफ कोर्ट का डंडा है, तो दूसरी तरफ छात्रों का भविष्य। 26 दिसंबर की तारीख यह तय करेगी कि यूनिवर्सिटी अपनी विरासत बचा पाती है या उसे अपनी ही जमीन छोड़नी पड़ेगी।

Related Disclaimer : यह समाचार रिपोर्ट अदालती आदेशों और जमीनी स्तर पर हुए विरोध प्रदर्शन पर आधारित है। मामला न्यायालय के विचाराधीन है। हम पाठकों को सलाह देते हैं कि वे शांति बनाए रखें और आधिकारिक अपडेट्स का इंतजार करें।

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