मिथिलांचल की हृदयस्थली दरभंगा में इन दिनों शिक्षा और विरासत के बीच एक अजीबोगरीब जंग छिड़ी हुई है। ललित नारायण मिथिला यूनिवर्सिटी, जिसे आम बोलचाल में LNMU कहा जाता है, आज अपने सबसे बड़े अस्तित्व के संकट से जूझ रही है।
बीते 7 दिसंबर को जब यूनिवर्सिटी कैंपस में पुलिस की गाड़ियां सायरन बजाते हुए दाखिल हुईं, तो किसी को यकीन नहीं हुआ कि यह वही जगह है जहां सरस्वती की वंदना होती है। मामला संगीत और नाट्य विभाग को खाली कराने का है, लेकिन इसके तार दशकों पुराने उस इतिहास से जुड़े हैं जब दरभंगा महाराज ने अपनी संपत्ति दान की थी।
आज हर किसी की जुबान पर बस एक ही सवाल है—आखिर LNMU और कामेश्वर सिंह धार्मिक न्यास के बीच का यह विवाद क्या है? क्यों राज परिवार का ट्रस्ट अपनी ही दी हुई जमीन वापस मांग रहा है?
और कोर्ट ने ऐसा क्या फैसला सुनाया है कि प्रशासन को बुलडोजर लेकर आना पड़ा? यह कहानी सिर्फ एक जमीन के टुकड़े की नहीं, बल्कि लीज, कानून और लापरवाही के उस कॉकटेल की है जिसने हजारों छात्रों के भविष्य को दांव पर लगा दिया है।
आज की इस विस्तृत रिपोर्ट में हम आपको इस विवाद की एक-एक परत खोलकर समझाएंगे। हम इतिहास के पन्नों से लेकर 7 दिसंबर की पुलिस कार्रवाई और 26 दिसंबर की डेडलाइन तक, सब कुछ विस्तार से बताएंगे ताकि आप समझ सकें कि आखिर गलती किसकी है।