वाराणसी, 23 अगस्त 2026: भाजपा सांसद और भोजपुरी गायक-अभिनेता मनोज तिवारी के बड़े भाई साधु शरण तिवारी का रविवार को वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर अंतिम संस्कार किया गया। परिवार और करीबी लोगों की मौजूदगी में वैदिक परंपराओं के अनुसार अंतिम संस्कार की रस्में पूरी हुईं। छोटे बेटे उदय तिवारी ने मुखाग्नि दी। साधु शरण तिवारी के निधन से परिवार में शोक का माहौल है।
दिल्ली AIIMS में हुआ था साधु शरण तिवारी का निधन
साधु शरण तिवारी का शनिवार को दिल्ली स्थित एम्स में इलाज के दौरान निधन हुआ था। रिपोर्टों के अनुसार उनकी उम्र करीब 72 वर्ष थी और वह कुछ समय से स्वास्थ्य संबंधी परेशानी से जूझ रहे थे। गंभीर हालत में उन्हें उपचार के लिए दिल्ली लाया गया था, जहां शनिवार दोपहर करीब 1:15 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर सामने आने के बाद परिवार, रिश्तेदारों और परिचितों के बीच शोक की लहर दौड़ गई।
परिवार में सबसे बड़े थे, ONGC से GM पद से हुए थे रिटायर
साधु शरण तिवारी परिवार में चार भाइयों और एक बहन में सबसे बड़े थे। परिवार में बड़े भाई होने के कारण उनकी भूमिका केवल रिश्ते तक सीमित नहीं थी, बल्कि वह अभिभावक और मार्गदर्शक के तौर पर भी महत्वपूर्ण माने जाते थे। उन्होंने काशी हिंदू विश्वविद्यालय से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी। इसके बाद उन्होंने ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन यानी ONGC में लंबे समय तक सेवाएं दीं और जनरल मैनेजर के पद से सेवानिवृत्त हुए।
ONGC में नौकरी के दौरान साधु शरण तिवारी की तैनाती अलग-अलग शहरों में रही। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक उन्होंने असम के नाजीरा-शिवसागर, कोलकाता और मुंबई सहित कई जगहों पर काम किया। सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने काशी में रहना शुरू किया था। उनका जीवन पेशेवर जिम्मेदारियों के साथ परिवार से गहरे जुड़ाव वाला रहा और मनोज तिवारी सहित उनके छोटे भाई-बहनों के लिए वह मार्गदर्शक की भूमिका निभाते रहे।
मनोज तिवारी ने भाई को बताया था ईश्वर समान
बड़े भाई के निधन के बाद मनोज तिवारी ने भावुक होकर उन्हें याद किया। उन्होंने कहा कि साधु शरण तिवारी उनके लिए सिर्फ बड़े भाई नहीं थे, बल्कि ईश्वर के समान थे। मनोज तिवारी के मुताबिक उनके बड़े भाई ने उनके संगीत करियर को दिशा देने और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। वह जब भी उनसे मिलते थे, उन्हें कुछ न कुछ सीखने और आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती थी।
मनोज तिवारी ने अपनी आखिरी मुलाकात को भी याद किया। उन्होंने बताया कि अंतिम बार जब दोनों भाई मिले थे, तब साधु शरण तिवारी ने उन्हें एक कविता सुनाई थी। उस समय परिवार के किसी सदस्य को यह अंदाजा नहीं था कि यह उनकी आखिरी मुलाकात बन जाएगी। बड़े भाई के निधन के बाद यह स्मृति मनोज तिवारी के लिए बेहद भावुक क्षण बन गई।
मणिकर्णिका घाट पर वैदिक परंपरा से हुआ अंतिम संस्कार
रविवार को साधु शरण तिवारी के पार्थिव शरीर को अंतिम संस्कार के लिए काशी लाया गया। दोपहर करीब 12:30 बजे मणिकर्णिका घाट पर अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की गई। छोटे बेटे उदय तिवारी ने वैदिक परंपराओं के अनुसार मुखाग्नि दी। इस दौरान परिवार के सदस्य और करीबी लोग घाट पर मौजूद रहे और उन्होंने दिवंगत साधु शरण तिवारी को अंतिम विदाई दी।
अंतिम संस्कार में मनोज तिवारी के छोटे भाई दुर्गा शंकर तिवारी, उनके बेटे उदय तिवारी, रवि तिवारी सहित परिवार के अन्य सदस्य मौजूद रहे। इसके अलावा परिवार से जुड़े करीबी लोगों ने भी मणिकर्णिका घाट पहुंचकर श्रद्धांजलि दी। अंतिम संस्कार की रस्मों के दौरान परिवार के सदस्यों की आंखें नम नजर आईं और माहौल बेहद भावुक रहा।
राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र से भी मिली श्रद्धांजलि
साधु शरण तिवारी के निधन की खबर के बाद राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक क्षेत्र से जुड़े लोगों ने भी शोक व्यक्त किया। उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री डॉ. दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’, गीतकार कन्हैया दुबे ‘केडी’ और अन्य लोगों ने उनके निधन पर श्रद्धांजलि दी। परिवार के लिए यह क्षति इसलिए भी बड़ी है क्योंकि साधु शरण तिवारी लंबे समय तक परिवार के बड़े सदस्य और मार्गदर्शक की भूमिका में रहे थे।
साधु शरण तिवारी की पहचान भले ही सार्वजनिक जीवन में उनके छोटे भाई मनोज तिवारी की तरह व्यापक नहीं रही, लेकिन परिवार के भीतर उनका स्थान बेहद महत्वपूर्ण था। इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद ONGC में लंबा करियर बनाने और GM पद से सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने काशी को अपना निवास बनाया। अब मणिकर्णिका घाट पर अंतिम संस्कार के साथ परिवार ने उन्हें अंतिम विदाई दी है।
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