झांसी, उत्तर प्रदेश, 17 अगस्त 2026 — झांसी के चिरगांव खुर्द गांव में 2 बीघा जमीन के विवाद ने एक परिवार को ऐसी स्थिति में पहुंचा दिया, जहां पिता की मौत के बाद करीब 35 घंटे तक उनका शव घर में रखा रहा। दोनों बेटों ने बहन से जमीन वापस करने की मांग करते हुए पिता का अंतिम संस्कार करने से इनकार कर दिया।
मामला इतना बढ़ा कि जमीन की रजिस्ट्री कराने के लिए परिवार को रजिस्ट्रार कार्यालय तक जाना पड़ा, लेकिन वहां पहले ओटीपी और फिर सर्वर की समस्या ने विवाद को और लंबा कर दिया। आखिरकार बारिश के बीच शव को समथर ले जाया गया और पुलिस की समझाइश के बाद अंतिम संस्कार हुआ।
इलाज के दौरान बेटी के नाम कर दी थी 2 बीघा जमीन
समथर थाना क्षेत्र के चिरगांव खुर्द निवासी ठाकुरदास कुशवाहा के पास करीब 5 बीघा जमीन बताई गई है। उनके दो बेटे और तीन बेटियां थीं। रिपोर्ट के मुताबिक, तबीयत खराब रहने के दौरान उनकी दूसरी बेटी अंगूरी उन्हें अपने साथ ले गई थी और इलाज कराया था। इसी दौरान ठाकुरदास ने अपनी 2 बीघा जमीन बेटी के नाम कर दी थी। गुरुवार को इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। बेटी जब शव लेकर गांव पहुंची, तो परिवार में पहले से चला आ रहा जमीन का विवाद फिर सामने आ गया और अंतिम विदाई की तैयारी अचानक रुक गई।
बेटों ने रख दी जमीन वापस करने की शर्त
पिता की मौत के बाद दोनों बेटों ने कहा कि जब तक बहन 2 बीघा जमीन वापस नहीं करती, तब तक वे पिता का अंतिम संस्कार नहीं करेंगे। इसके बाद परिवार और ग्रामीणों ने दोनों पक्षों के बीच समझौता कराने की कोशिश शुरू की। बातचीत के बाद बहन जमीन वापस करने के लिए तैयार हो गई। इसके बाद दोनों भाई अपनी बहन के साथ मोठ स्थित रजिस्ट्रार कार्यालय पहुंचे, ताकि जमीन से जुड़ी लिखा-पढ़ी पूरी की जा सके। परिवार को उम्मीद थी कि कागजी प्रक्रिया पूरी होते ही विवाद खत्म हो जाएगा और पिता की अंतिम विदाई हो सकेगी।
पहले ओटीपी ने रोकी रजिस्ट्री, फिर सर्वर ने बढ़ाया इंतजार
रजिस्ट्रार कार्यालय में जमीन की प्रक्रिया शुरू हुई, लेकिन ओटीपी नहीं आने के कारण उस दिन रजिस्ट्री पूरी नहीं हो सकी। इसके बाद अगले दिन फिर कार्यालय जाने की बात तय हुई। शुक्रवार सुबह दोनों भाई बहन को लेकर दोबारा रजिस्ट्रार कार्यालय पहुंचे, लेकिन इस बार सर्वर की समस्या सामने आ गई। दिनभर कोशिश के बावजूद जमीन की लिखा-पढ़ी पूरी नहीं हो पाई। दोनों भाई देर शाम वापस गांव लौटे और पिता का अंतिम संस्कार करने की तैयारी शुरू की। लेकिन इतने समय में मामला सिर्फ जमीन की रजिस्ट्री तक सीमित नहीं रहा था, शव 35 घंटे से अंतिम विदाई का इंतजार कर रहा था।
बारिश शुरू हुई तो गांव से 5 किलोमीटर दूर ले जाना पड़ा शव
जमीन की प्रक्रिया पूरी नहीं होने के बावजूद परिवार ने आखिरकार अंतिम संस्कार की तैयारी शुरू कर दी। इसी दौरान अचानक बारिश होने लगी। परिजनों के मुताबिक, चिरगांव खुर्द में अंतिम संस्कार के लिए जमीन चिह्नित है, लेकिन वहां शेड की व्यवस्था नहीं है। बारिश के कारण गांव में अंतिम संस्कार करना मुश्किल हो गया। इसके बाद ठाकुरदास के शव को करीब पांच किलोमीटर दूर समथर कस्बे के मुक्तिधाम ले जाया गया। इस तरह जमीन का विवाद, रजिस्ट्रार कार्यालय की तकनीकी दिक्कत और मौसम की परेशानी—तीनों ने मिलकर अंतिम विदाई में लंबी देरी कर दी।
पुलिस की समझाइश के बाद हुआ अंतिम संस्कार
मामले की जानकारी मिलने पर समथर थाना पुलिस भी मौके पर पहुंची। थाना प्रभारी अतुल राजपूत के मुताबिक, पुलिस ने परिवार को समझाया, जिसके बाद शव का अंतिम संस्कार करा दिया गया। पुलिस के अनुसार, ठाकुरदास का पिता का अंतिम संस्कार करीब 35 घंटे बाद हो सका। हालांकि जमीन की रजिस्ट्री उस समय तक पूरी नहीं हुई थी। यानी अंतिम संस्कार तो हो गया, लेकिन जमीन को लेकर परिवार के बीच बना विवाद पूरी तरह खत्म हुआ या नहीं, इसकी स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। आगे की जमीन संबंधी प्रक्रिया के बारे में भी आधिकारिक रूप से कोई विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है।
2 बीघा जमीन ने परिवार को पहुंचाया इस मोड़ तक
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा सवाल यही है कि पिता की मौत के बाद भी परिवार जमीन के विवाद से बाहर क्यों नहीं निकल सका। 2 बीघा जमीन को लेकर बेटों और बहन के बीच पहले से मतभेद था। पिता के नाम बताई गई करीब 5 बीघा जमीन में से 2 बीघा बेटी के नाम किए जाने के बाद यह विवाद और गहरा गया। हालांकि जमीन के हस्तांतरण के कानूनी पहलुओं पर उपलब्ध जानकारी के आधार पर कोई अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है। इतना जरूर सामने आया है कि परिवार ने जमीन की लिखा-पढ़ी के जरिए विवाद सुलझाने की कोशिश की, लेकिन तकनीकी अड़चनों के कारण प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी।
अंततः पुलिस की समझाइश के बाद पिता का अंतिम संस्कार हो गया, लेकिन इस घटना ने परिवार के भीतर चल रहे संपत्ति विवाद की गंभीरता जरूर सामने ला दी। जिस समय घर में शोक का माहौल था, उसी समय जमीन को लेकर ऐसा गतिरोध बना कि शव करीब 35 घंटे तक अंतिम विदाई का इंतजार करता रहा। अब अंतिम संस्कार के बाद सबसे बड़ा सवाल जमीन की आगे की लिखा-पढ़ी और परिवार के बीच विवाद के समाधान को लेकर है। उपलब्ध जानकारी में यह पुष्टि नहीं है कि रजिस्ट्री बाद में पूरी हुई या नहीं।
Disclaimer: यह खबर उपलब्ध रिपोर्ट और पुलिस द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर तैयार की गई है। जमीन के स्वामित्व, हस्तांतरण और रजिस्ट्री से जुड़े कानूनी पहलुओं की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है।
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