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‘ब्रेन डेड’ महिला को एंबुलेंस के झटके ने किया जिंदा, क्या सड़क के गड्ढे से हुआ चमत्कार? : Pilibhit

डॉक्टरों ने 50 वर्षीय विनीता शुक्ला को 'ब्रेन डेड' घोषित कर दिया था और परिवार वाले अंतिम संस्कार की तैयारी कर रहे थे। लेकिन रास्ते में सड़क के एक गड्ढे से एंबुलेंस को ऐसा कौन सा जादुई झटका लगा कि मृतप्राय महिला फिर से जिंदा हो गई?
Khabar Aangan Published on: 11 मार्च 2026
‘ब्रेन डेड’ महिला को एंबुलेंस के झटके ने किया जिंदा, क्या सड़क के गड्ढे से हुआ चमत्कार? : Pilibhit
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Pilibhit | 11 मार्च 2026: भारत में अक्सर खराब सड़कें और जानलेवा गड्ढे गंभीर सड़क हादसों का कारण बनते हैं। लेकिन उत्तर प्रदेश के Pilibhit जिले से एक ऐसा अकल्पनीय और हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां सड़क के एक गड्ढे ने मृतप्राय महिला को नया जीवन दे दिया।

डॉक्टरों द्वारा आधिकारिक रूप से ‘ब्रेन डेड’ (Brain Dead) घोषित की जा चुकी 50 वर्षीय विनीता शुक्ला को उनके निराश परिजन अंतिम संस्कार के लिए घर ले जा रहे थे। रास्ते में एंबुलेंस को लगे एक जोरदार झटके ने उनकी रुकी हुई सांसें वापस लौटा दीं।

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22 फरवरी को घर के काम करते वक्त हुई थीं बेहोश

यह पूरी चमत्कारिक घटना Pilibhit के न्यायिक न्यायालय (Judicial Courts) की कॉपी शाखा में वरिष्ठ सहायक के पद पर कार्यरत विनीता शुक्ला से जुड़ी हुई है।

22 फरवरी 2026 की शाम को वह अपने घर का सामान्य कामकाज कर रही थीं। अचानक उन्हें भारी शारीरिक परेशानी महसूस हुई और वह बुरी तरह से बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़ीं।

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उनके पति कुलदीप कुमार शुक्ला बिना कोई समय गंवाए उन्हें तुरंत Pilibhit के सरकारी मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचे। वहां उनकी गंभीर और लगातार बिगड़ती हालत को देखते हुए, डॉक्टरों ने उन्हें बेहतर इलाज के लिए बरेली के एक निजी अस्पताल में रेफर कर दिया।

बरेली के डॉक्टरों ने घोषित कर दिया था ‘ब्रेन डेड’

बरेली के उस उच्च स्तरीय अस्पताल में विनीता शुक्ला को वेंटिलेटर और लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर रखकर उनका सघन इलाज शुरू किया गया।

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हालांकि, कई गहन जांचों के बाद वहां के डॉक्टरों ने परिवार को एक बेहद ही दिल दहला देने वाली खबर दी। डॉक्टरों ने बताया कि विनीता के ‘ब्रेन स्टेम रिफ्लेक्सेस’ पूरी तरह से खत्म हो चुके हैं।

उनका ग्लासगो कोमा स्केल (GCS) गिरकर 3 पॉइंट पर आ गया था। मेडिकल भाषा में उन्हें ‘ब्रेन डेड’ मान लिया गया और डॉक्टरों ने उनके पति से साफ कह दिया कि अब उनके बचने की कोई उम्मीद नहीं बची है।

अंतिम संस्कार की तैयारी और एंबुलेंस का वह सफर

24 फरवरी को भारी मन और आंसुओं के साथ कुलदीप कुमार शुक्ला अपनी बेहोश पत्नी को एंबुलेंस में लेकर Pilibhit स्थित अपने घर की ओर लौट रहे थे।

उन्होंने रोते हुए घर पर अपने रिश्तेदारों को अंतिम संस्कार की सभी तैयारियां करने की सूचना भी दे दी थी। पूरे परिवार और आस-पड़ोस में मातम पसरा हुआ था।

लेकिन नियति को शायद कुछ और ही मंजूर था। जब उनकी एंबुलेंस बरेली-हरिद्वार नेशनल हाईवे-74 (NH-74) से तेज गति से गुजर रही थी, तभी हाफिजगंज के पास सड़क पर एक बहुत बड़ा गड्ढा आ गया।

गड्ढे के जोरदार झटके से अचानक लौट आईं सांसें

एंबुलेंस चालक उस बड़े गड्ढे को समय रहते देख नहीं पाया और गाड़ी उसमें जोर से टकरा गई। इस गड्ढे में पहिया जाने के कारण एंबुलेंस में बैठे सभी लोगों को एक बेहद ही भयानक झटका लगा।

लेकिन यही वह जादुई झटका था, जिसने विनीता शुक्ला के मृतप्राय शरीर में अचानक एक नई हलचल पैदा कर दी। पति कुलदीप के अनुसार, झटके के तुरंत बाद उन्होंने देखा कि विनीता की सांसे फिर से चलने लगी हैं।

यह दुर्लभ दृश्य देखकर वे खुशी और हैरानी से स्तब्ध रह गए। कुलदीप ने बिना एक पल गंवाए तुरंत परिवार वालों को फोन किया और कहा, “अंतिम संस्कार की सभी तैयारियां फौरन रोक दो, मेरी पत्नी जिंदा है।”

न्यूरोसिटी अस्पताल में शुरू हुआ चमत्कारिक इलाज

झटके के बाद उम्मीद की नई किरण के साथ एंबुलेंस का रुख सीधे Pilibhit के न्यूरोसिटी अस्पताल (Neurocity Hospital) की ओर मोड़ दिया गया। वहां मशहूर न्यूरोसर्जन डॉ. राकेश सिंह की देखरेख में विनीता को आईसीयू में भर्ती किया गया।

डॉक्टरों की टीम ने वहां फिर से सभी मेडिकल टेस्ट किए, जिसमें एक चौंकाने वाला सच सामने आया। विनीता के ब्लड सिस्टम में भारी मात्रा में ‘न्यूरोटॉक्सिन’ (Neurotoxins) पाए गए।

चिकित्सकों का यह पुख्ता शक है कि घर पर काम करते समय विनीता को किसी जहरीले सांप ने काट लिया था। इसी जहर के कारण उनका नर्वस सिस्टम काम करना बंद कर गया था और वह डीप कोमा में चली गई थीं।

13 दिन बाद मौत को मात देकर लौटीं घर

डॉ. राकेश सिंह की टीम ने बिना कोई देरी किए इस खतरनाक जहर को बेअसर करने का सटीक इलाज शुरू किया। इस इलाज का असर बहुत तेजी से हुआ और विनीता की हालत में जादुई सुधार होने लगा।

करीब 13 दिनों तक चले इस क्रिटिकल केयर इलाज के बाद, 9 मार्च को विनीता शुक्ला पूरी तरह से स्वस्थ होकर अपने पैरों पर चलकर घर लौट आईं।

विशेषज्ञों का मानना है कि एंबुलेंस को लगे उस तेज झटके ने संभवतः उनके रुके हुए तंत्रिका तंत्र को एक मजबूत स्टिम्युलेशन (Stimulation) दिया, जिससे उनका चेतना तंत्र दोबारा सक्रिय हो उठा।

हमारा निष्कर्ष

यह पूरी घटना किसी थ्रिलर फिल्म की रोमांचक कहानी से कम नहीं है। ‘खबर आंगन’ की डेस्क का यह साफ मानना है कि यह घटना हमारे देश के प्राइवेट मेडिकल सिस्टम की जांच प्रक्रियाओं पर एक बहुत बड़ा सवालिया निशान खड़ा करती है।

एक अस्पताल द्वारा बिना कड़े प्रोटोकॉल के किसी जीवित इंसान को ‘ब्रेन डेड’ घोषित कर देना एक भयानक चिकित्सीय लापरवाही है। वहीं दूसरी ओर, हमारे देश की खस्ताहाल सड़कें, जो अक्सर लोगों की जान लेती हैं, उन्होंने इस बार एक परिवार को उजड़ने से बचा लिया।

विनीता शुक्ला का यह पुनर्जन्म हमें सिखाता है कि जब तक इंसान की सांसें चल रही हैं, तब तक उम्मीद का दामन कभी नहीं छोड़ना चाहिए।

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