नई दिल्ली: देश की राजधानी और आसपास के इलाकों में बढ़ते वायु प्रदूषण को देखते हुए सरकार ने ‘Pollution Under Control’ (PUC) सर्टिफिकेट को लेकर अब तक का सबसे सख्त रुख अपनाया है। आज यानी 19 दिसंबर 2025 की दोपहर तक मिली ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर में ‘No PUC, No Fuel’ की नीति को पूरी तरह से लागू कर दिया गया है।
कल यानी 18 दिसंबर से ही दिल्ली के सभी पेट्रोल और सीएनजी पंपों पर केवल उन्हीं वाहनों को ईंधन दिया जा रहा है, जिनके पास वैध पीयूसी सर्टिफिकेट है। पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने स्पष्ट किया है कि यह नियम अगले आदेश तक प्रभावी रहेगा। इस फैसले का उद्देश्य उन लाखों वाहनों को नियंत्रित करना है जो तय मानकों से अधिक जहरीला धुआं उगल रहे हैं।
खबर आंगन रिसर्च डेस्क ने पाया कि इस नए नियम के पहले ही दिन दिल्ली के विभिन्न केंद्रों पर पीयूसी जांच करवाने वालों की लंबी कतारें देखी गईं। यदि आप भी अपनी गाड़ी लेकर सड़क पर निकलने वाले हैं, तो यह रिपोर्ट आपके लिए पढ़ना बेहद ज़रूरी है। लापरवाही बरतने पर आपको न केवल ईंधन से वंचित होना पड़ेगा, बल्कि भारी जुर्माना भी भरना पड़ सकता है।
पीयूसी (PUC) सर्टिफिकेट: क्यों बना यह अचानक अनिवार्य?
पीयूसी सर्टिफिकेट एक आधिकारिक दस्तावेज है जो यह प्रमाणित करता है कि आपके वाहन से निकलने वाले प्रदूषण का स्तर केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित मानकों (CPCB) के भीतर है। 19 दिसंबर 2025 की सुबह तक राजधानी का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) ‘गंभीर’ श्रेणी में बना हुआ है, जिसके बाद सरकार को यह कड़ा कदम उठाना पड़ा।
पिछले कुछ हफ्तों में आयोग (CAQM) ने पाया कि दिल्ली की सड़कों पर चल रहे करीब 8 लाख वाहनों का पीयूसी एक्सपायर हो चुका है। इसी को ध्यान में रखते हुए पेट्रोल पंपों पर एनपीआर (ANPR) कैमरे लगाए गए हैं जो वाहन के नंबर प्लेट से ही उसके पीयूसी स्टेटस की जांच कर लेते हैं।
