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Uttarakhand में मदरसा बोर्ड खत्म, सभी संस्थान अब एक ही शिक्षा बोर्ड के तहत

Education Reform की दिशा में Uttarakhand ने बड़ा कदम उठाते हुए मदरसा बोर्ड को समाप्त कर दिया है। राज्य के सभी अल्पसंख्यक संस्थान अब Uttarakhand Board of School Education के अधीन होंगे।
Khabar Aangan Thursday, 13 November 2025, 04:16 PM
Uttarakhand में मदरसा बोर्ड खत्म, सभी संस्थान अब एक ही शिक्षा बोर्ड के तहत

Uttarakhand ने रचा इतिहास: देश का पहला राज्य बना जिसने मदरसा बोर्ड किया खत्म, अब सभी संस्थानों पर लागू होगा एक समान शिक्षा मॉडल

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Uttarakhand ने देश में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए खुद को भारत का पहला राज्य बना दिया है जिसने मदरसा बोर्ड को पूरी तरह समाप्त कर दिया है। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (Retd.) ने Uttarakhand Minority Education Bill 2025 को मंजूरी दे दी, जिसके बाद राज्य के सभी अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान—जिनमें मदरसे भी शामिल हैं—अब सीधे Uttarakhand Board of School Education के अधीन आ गए हैं।

यह निर्णय भारतीय शिक्षा मॉडल में एक बड़ा परिवर्तन माना जा रहा है, क्योंकि पहली बार मदरसे भी उसी मुख्यधारा के पाठ्यक्रम का हिस्सा बनेंगे जिसे सरकारी और निजी विद्यालयों में लागू किया जाता है। उद्देश्य यह है कि हर बच्चा, चाहे वह धार्मिक पृष्ठभूमि से आता हो या सामान्य पृष्ठभूमि से, आधुनिक विषयों और रोजगार-केंद्रित कौशलों से जुड़ सके।

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आधुनिक और पारंपरिक शिक्षा के बीच की दूरी खत्म

इस सुधार का सबसे बड़ा प्रभाव मदरसों के छात्रों पर होगा। अब वे धार्मिक शिक्षा के साथ-साथ गणित, विज्ञान, कंप्यूटर शिक्षा, अंग्रेज़ी और सामाजिक विज्ञान जैसे विषय पढ़ेंगे। लंबे समय से यह चर्चा चलती रही थी कि धार्मिक संस्थानों में पढ़ने वाले छात्र आधुनिक विषयों से कटे रहते हैं, जिससे उनके भविष्य के विकल्प सीमित हो जाते हैं।

Uttarakhand की इस पहल ने यह अंतर पहली बार खत्म कर दिया है। अब मदरसों में पढ़ने वाले छात्र भी उसी करिकुलम को समझेंगे जो किसी साधारण स्कूल में पढ़ाया जाता है, जिससे उन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं, नौकरियों और उच्च शिक्षा में समान अवसर मिलेंगे।

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State – Khabar Aangan

नई प्राधिकरण की स्थापना और NEP 2020 का अनुपालन

इस बिल के साथ राज्य सरकार ने Uttarakhand State Minority Education Authority की स्थापना भी की है, जो सभी अल्पसंख्यक संस्थानों की निगरानी, मान्यता, पाठ्यक्रम और कार्यप्रणाली की देखरेख करेगी। यह व्यवस्था सुनिश्चित करेगी कि मदरसे और अन्य संस्थान National Education Policy (NEP 2020) और National Curriculum Framework (NCF) के अनुसार चलें।

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इससे शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ेगी, जवाबदेही तय होगी और छात्रों को समान गुणवत्ता वाली शिक्षा उपलब्ध होगी।


समर्थन और विरोध — दोनों आवाज़ें तेज

जहाँ इस सुधार की देशभर में सराहना हो रही है, वहीं कुछ संगठन और धर्मगुरु इसे संस्थागत स्वतन्त्रता पर चोट बताते हैं। उनका कहना है कि मदरसों की अपनी पारंपरिक शिक्षण प्रणाली है, जिसे बदलना सांस्कृतिक ढांचे के लिए चुनौती हो सकता है।

दूसरी तरफ, इस फैसले के समर्थक इसे समावेशन, समानता और आधुनिक भारत की दिशा में एक निर्णायक कदम मानते हैं। उनका कहना है कि यह सुधार उन लाखों बच्चों का भविष्य बना सकता है जो अभी तक केवल एक सीमित शिक्षा व्यवस्था के दायरे में थे।


एक राष्ट्र — एक शिक्षा मॉडल की ओर बड़ा कदम

Uttarakhand की यह पहल देश में शिक्षा सुधारों के लिए एक नया मानक तय कर सकती है। अगर यह मॉडल सफल होता है, तो आने वाले वर्षों में अन्य राज्य भी इसे अपनाने पर विचार कर सकते हैं। यह फैसला सिर्फ एक बोर्ड को खत्म करने का नहीं, बल्कि एकीकृत, आधुनिक और समान शिक्षा व्यवस्था की ओर बढ़ने का संकेत है — ऐसी व्यवस्था जो हर बच्चे को बराबर अवसर दे सके।

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⚠️ Disclaimer:

यह लेख उपलब्ध आधिकारिक घोषणाओं और शिक्षा सुधार से जुड़े तथ्यों पर आधारित है। आगे की सरकारी अधिसूचनाओं और नियमों के अनुसार बदलाव संभव हैं।

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