Vaishali | 2 अप्रैल 2026: सफलता कभी भी सुख-सुविधाओं या अमीरी की मोहताज नहीं होती, यह बात हमारे देश के ग्रामीण और गरीब बच्चों ने बार-बार पूरी दुनिया के सामने साबित की है। हाल ही में घोषित हुए Bihar Board के दसवीं के परीक्षा परिणामों ने एक बार फिर पूरे प्रदेश और देशवासियों को गर्व से भावुक कर दिया है।
संसाधनों की भारी कमी और गरीबी के बावजूद, एक साधारण से टायर पंचर बनाने वाले की बेटी ने अपनी अटूट मेहनत से इतिहास रच दिया है। वैशाली जिले की रहने वाली सबरीन परवीन ने मैट्रिक की परीक्षा में पूरे राज्य में टॉप करके यह साफ दिखा दिया है कि मजबूत इरादों के आगे हर मुश्किल बहुत छोटी है।
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उनकी इस ऐतिहासिक कामयाबी के बाद न सिर्फ उनका परिवार, बल्कि उनका पूरा गांव और उन्हें जानने वाला हर व्यक्ति खुशी से रो पड़ा है। ‘खबर आंगन’ की स्पेशल एजुकेशन डेस्क ने जब सबरीन के इस संघर्षपूर्ण सफर को करीब से जाना, तो उनकी यह सच्ची कहानी किसी प्रेरणादायक फिल्म से बिल्कुल भी कम नहीं लगी।
पंचर बनाने वाले पिता की बेटी ने बिना कोचिंग रचा इतिहास
Vaishali जिले के चेहरा कलां ब्लॉक के छोटे से गांव चौरही की रहने वाली सबरीन परवीन का शुरुआती जीवन कभी भी सुख-सुविधाओं भरा और आसान नहीं रहा है। उनके पिता मोहम्मद शहजाद एक बेहद छोटी सी टायर की दुकान चलाते हैं, जिससे बड़ी मुश्किल से उनके परिवार का रोज का खर्च पूरा हो पाता है।
घर की बेहद कमजोर आर्थिक स्थिति के कारण सबरीन के पास महंगे प्राइवेट स्कूल या बड़े कोचिंग संस्थानों में जाने का कोई भी विकल्प कभी मौजूद नहीं था। उन्होंने अपने गांव के ही एक साधारण सरकारी स्कूल ‘उच्च माध्यमिक विद्यालय चौरही’ से अपनी पढ़ाई पूरी की और बिना किसी भी बाहरी मदद के यह कमाल कर दिखाया है।
जब Bihar Board के अंतिम नतीजे घोषित हुए, तो सबरीन ने 500 में से 492 अंक (98.40%) लाकर पूरे राज्य में पहला स्थान हासिल कर लिया। इस शानदार खबर ने उनके पिता मोहम्मद शहजाद की आंखों में खुशी के आंसू ला दिए, जिन्होंने दिन-रात हाड़-तोड़ मेहनत करके अपनी होनहार बेटी की पढ़ाई को कभी रुकने नहीं दिया।
यूट्यूब और एकाग्रता को बनाया अपनी सफलता का सबसे बड़ा हथियार
सबरीन की यह बहुत बड़ी सफलता उन लाखों छात्रों के लिए एक बहुत बड़ा और कड़ा सबक है, जो अक्सर संसाधनों की कमी का रोना रोकर बीच रास्ते में ही हार मान लेते हैं। सबरीन ने अपनी पूरी तैयारी सिर्फ ‘सेल्फ स्टडी’ और मुफ्त ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के जरिए पूरी की, जिसने उनकी एकाग्रता को और भी ज्यादा मजबूत बनाया।
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उन्होंने हाल ही में मीडिया से बातचीत में यह बताया कि वह रोजाना 8 से 10 घंटे बिना किसी नागे के पूरी ईमानदारी के साथ सिर्फ अपनी किताबों पर ध्यान देती थीं। जब भी उन्हें गणित या विज्ञान के किसी विषय में कोई बड़ी उलझन होती थी, तो वह यूट्यूब पर मौजूद फ्री एजुकेशनल वीडियो देखकर अपनी समस्या का तुरंत और सटीक समाधान कर लेती थीं।
उनके भावुक पिता ने बताया कि आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने पाई-पाई जोड़कर सबरीन की ऑनलाइन पढ़ाई के लिए एक साधारण से स्मार्टफोन का किसी तरह से जुगाड़ किया था। इसी एकमात्र स्मार्टफोन को सबरीन ने अपना सबसे बड़ा और धारदार हथियार बनाया और Bihar Board की परीक्षा में सफलता का वह परचम लहराया जो आज पूरे देश के लिए एक बड़ी मिसाल है।
भविष्य में एक बेहतरीन डॉक्टर बनकर समाज सेवा करने का है सपना
मैट्रिक जैसी बड़ी परीक्षा में पूरे राज्य की टॉपर बनने के बाद सबरीन के हौसले पूरी तरह से बुलंद हो चुके हैं और वह अब बिल्कुल भी रुकने वाली नहीं हैं। उनकी आंखों में अब एक और बहुत बड़ा और नेक सपना पल रहा है, वह भविष्य में मेडिकल की कड़ी पढ़ाई करके एक सफल और काबिल डॉक्टर बनना चाहती हैं।
सबरीन का यह स्पष्ट रूप से कहना है कि उन्होंने अपने गांव और आसपास के इलाकों में कई गरीब लोगों को उचित इलाज के अभाव में भारी तकलीफें सहते हुए देखा है। इसलिए, वह अब अपनी पूरी मेहनत से NEET की परीक्षा पास करके समाज के उस गरीब तबके की पूरे मन से सेवा करना चाहती हैं, जहां आज भी अच्छी चिकित्सा सुविधाएं नहीं पहुंच पाई हैं।
उनकी इस शानदार सोच और असाधारण कामयाबी ने आज यह फिर से साबित कर दिया है कि अगर कोई बच्चा दिल से कुछ करने की ठान ले, तो दुनिया की कोई ताकत उसे हरा नहीं सकती। वैशाली जिले के शीर्ष अधिकारी और कई स्थानीय सामाजिक संस्थाएं भी अब इस होनहार बेटी की आगे की पढ़ाई में हर संभव आर्थिक मदद करने के लिए खुलकर आगे आ रही हैं।
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हमारा निष्कर्ष
‘खबर आंगन’ की स्पेशल एजुकेशन डेस्क का यह स्पष्ट रूप से मानना है कि सबरीन परवीन की यह असाधारण सफलता हमारे देश के गिरते शिक्षा तंत्र के लिए एक बहुत बड़ी और सकारात्मक खबर है। यह परिणाम साफ तौर पर दर्शाता है कि इंटरनेट और डिजिटल क्रांति ने आज के समय में हर उस गरीब बच्चे तक ज्ञान की रोशनी पहुंचा दी है, जिसके पास पहले आगे बढ़ने का कोई साधन नहीं था।
एक छोटे से सुविधाहीन गांव से निकलकर Bihar Board में सर्वोच्च स्थान प्राप्त करना न केवल उनके परिवार की, बल्कि पूरे समाज और उस मजबूत इच्छाशक्ति की बहुत बड़ी जीत है। हमें पूरी और पक्की उम्मीद है कि राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन सबरीन जैसी होनहार बेटियों की आगे की उच्च शिक्षा के लिए हर तरह का जरूरी आर्थिक सहयोग जरूर प्रदान करेंगे, ताकि उनके सपने कभी भी पैसों की कमी की वजह से अधूरे न रहें।
Disclaimer: यह भावुक और प्रेरणादायक खबर ‘Khabar Aangan’ की एजुकेशन डेस्क द्वारा Bihar Board के हालिया आधिकारिक परीक्षा परिणामों, टॉपर सबरीन परवीन के मीडिया साक्षात्कारों और स्थानीय रिपोर्ट्स के विस्तृत विश्लेषण के आधार पर पूरी प्रमाणिकता के साथ तैयार की गई है।
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Ashutosh Kumar Jha Admin
Ashutosh Jha एक डिजिटल पत्रकार और न्यूज़ लेखक हैं, जो भारत की राजनीति, शिक्षा, सरकारी योजनाओं, टेक्नोलॉजी और सामाजिक मुद्दों से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं। वे तथ्य आधारित रिपोर्टिंग और विश्वसनीय स्रोतों के आधार पर समाचार लिखने के लिए जाने जाते हैं।डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहते हुए Ashutosh Jha ने कई महत्वपूर्ण विषयों पर विश्लेषणात्मक लेख और समाचार प्रकाशित किए हैं। उनका उद्देश्य पाठकों तक निष्पक्ष, प्रमाणिक और जनहित से जुड़ी जानकारी पहुँचाना है।वर्तमान में वे Khabar Aangan न्यूज़ प्लेटफॉर्म के माध्यम से देश-दुनिया की ताज़ा खबरों, सरकारी नीतियों, सामाजिक बदलाव और टेक्नोलॉजी से जुड़े विषयों पर नियमित लेखन और रिपोर्टिंग कर रहे हैं।