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Vaishali : गरीब बच्चे ने कर दिखाया कमाल! टायर पंचर बनाने वाले की बेटी बनी राज्य की टॉपर, कहानी जानकर छलक आएंगे आंसू

Vaishali : गरीब बच्चे ने कर दिखाया कमाल! टायर पंचर बनाने वाले की बेटी बनी राज्य की टॉपर, कहानी जानकर छलक आएंगे आंसू

Ashutosh Kumar Jha Published on: 3 अप्रैल 2026
Vaishali : गरीब बच्चे ने कर दिखाया कमाल! टायर पंचर बनाने वाले की बेटी बनी राज्य की टॉपर, कहानी जानकर छलक आएंगे आंसू
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Vaishali | 2 अप्रैल 2026: सफलता कभी भी सुख-सुविधाओं या अमीरी की मोहताज नहीं होती, यह बात हमारे देश के ग्रामीण और गरीब बच्चों ने बार-बार पूरी दुनिया के सामने साबित की है। हाल ही में घोषित हुए Bihar Board के दसवीं के परीक्षा परिणामों ने एक बार फिर पूरे प्रदेश और देशवासियों को गर्व से भावुक कर दिया है।

संसाधनों की भारी कमी और गरीबी के बावजूद, एक साधारण से टायर पंचर बनाने वाले की बेटी ने अपनी अटूट मेहनत से इतिहास रच दिया है। वैशाली जिले की रहने वाली सबरीन परवीन ने मैट्रिक की परीक्षा में पूरे राज्य में टॉप करके यह साफ दिखा दिया है कि मजबूत इरादों के आगे हर मुश्किल बहुत छोटी है।

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उनकी इस ऐतिहासिक कामयाबी के बाद न सिर्फ उनका परिवार, बल्कि उनका पूरा गांव और उन्हें जानने वाला हर व्यक्ति खुशी से रो पड़ा है। ‘खबर आंगन’ की स्पेशल एजुकेशन डेस्क ने जब सबरीन के इस संघर्षपूर्ण सफर को करीब से जाना, तो उनकी यह सच्ची कहानी किसी प्रेरणादायक फिल्म से बिल्कुल भी कम नहीं लगी।

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पंचर बनाने वाले पिता की बेटी ने बिना कोचिंग रचा इतिहास

Vaishali जिले के चेहरा कलां ब्लॉक के छोटे से गांव चौरही की रहने वाली सबरीन परवीन का शुरुआती जीवन कभी भी सुख-सुविधाओं भरा और आसान नहीं रहा है। उनके पिता मोहम्मद शहजाद एक बेहद छोटी सी टायर की दुकान चलाते हैं, जिससे बड़ी मुश्किल से उनके परिवार का रोज का खर्च पूरा हो पाता है।

घर की बेहद कमजोर आर्थिक स्थिति के कारण सबरीन के पास महंगे प्राइवेट स्कूल या बड़े कोचिंग संस्थानों में जाने का कोई भी विकल्प कभी मौजूद नहीं था। उन्होंने अपने गांव के ही एक साधारण सरकारी स्कूल ‘उच्च माध्यमिक विद्यालय चौरही’ से अपनी पढ़ाई पूरी की और बिना किसी भी बाहरी मदद के यह कमाल कर दिखाया है।

जब Bihar Board के अंतिम नतीजे घोषित हुए, तो सबरीन ने 500 में से 492 अंक (98.40%) लाकर पूरे राज्य में पहला स्थान हासिल कर लिया। इस शानदार खबर ने उनके पिता मोहम्मद शहजाद की आंखों में खुशी के आंसू ला दिए, जिन्होंने दिन-रात हाड़-तोड़ मेहनत करके अपनी होनहार बेटी की पढ़ाई को कभी रुकने नहीं दिया।

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