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सुबह के शुरुआती घंटों में मतदान की रफ्तार धीमी रही, लेकिन दोपहर बाद बूथों पर मतदाताओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं।
अंतिम आंकड़ा: लगभग 64.46 % मतदान
सबसे ज्यादा मतदान बेगूसराय (67.32%) जिला में दर्ज किया गया, जबकि राजधानी पटना में सबसे कम (55.02%)मतदाता ही मतदान केंद्रों तक पहुंचे।
चुनाव आयोग ने बताया कि इस बार महिला मतदाताओं की भागीदारी पुरुषों से अधिक रही, जो राज्य में राजनीतिक जागरूकता और लैंगिक समानता की ओर एक मजबूत संकेत है।
पहले चरण में किन सीटों पर मतदान हुआ
पहले चरण में मतदान मुख्य रूप से बिहार के उत्तर और मध्य भागों की 121 सीटों पर हुआ। इन सीटों पर 1375 से अधिक उम्मीदवार मैदान में थे।
मुख्य मुकाबला महागठबंधन (राजद-कांग्रेस-वामदल) और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के बीच देखा गया। कई सीटों पर स्थानीय उम्मीदवारों ने भी दिलचस्प त्रिकोणीय और चतुष्कोणीय मुकाबले की स्थिति बना दी थी।
युवाओं और महिलाओं की बढ़ती भागीदारी
पहले चरण के मतदान में युवाओं की भूमिका बेहद अहम रही। 18-19 वर्ष की आयु के लगभग 17 लाख नए मतदाता इस बार पहली बार वोट देने पहुंचे।
चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार:
•महिलाओं की वोटिंग दर 65 % से अधिक रही
•पुरुष मतदाताओं की भागीदारी 63 % के आसपास रही
विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी उल्लेखनीय रही, जहाँ वे सुबह से ही कतारों में लगी दिखाई दीं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बढ़ती महिला भागीदारी से चुनाव परिणामों पर निर्णायक असर पड़ सकता है।
शांतिपूर्ण मतदान और सुरक्षा प्रबंधन
पहले चरण में मतदान के दौरान राज्य भर में सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए थे।
•200 से अधिक कंपनियों के अर्धसैनिक बलों की तैनाती
•संवेदनशील और अति-संवेदनशील बूथों पर वेबकास्टिंग और सीसीटीवी निगरानी
•ड्रोन कैमरों से भी नजर रखी गई
मुख्य चुनाव अधिकारी ने बताया कि मतदान प्रक्रिया “पूरी तरह शांतिपूर्ण और निष्पक्ष” रही। कुछ इलाकों से इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) में तकनीकी खराबी की मामूली शिकायतें आईं, जिन्हें तुरंत बदल दिया गया।
चुनाव आयोग की व्यवस्था और डिजिटल पारदर्शिता
इस बार आयोग ने पारदर्शिता और मतदाता सुविधा के लिए कई नई तकनीकें लागू कीं।
•‘वोटर हेल्पलाइन ऐप’ के माध्यम से मतदाताओं ने बूथ जानकारी और मतदान प्रतिशत प्राप्त किया।
•‘cVIGIL’ ऐप से मॉडल कोड उल्लंघन की शिकायतें रीयल-टाइम में ली गईं।
•पहली बार कई जिलों में QR कोड आधारित मतदाता पहचान सत्यापन किया गया।
इन सुधारों से मतदान प्रक्रिया अधिक विश्वसनीय और पारदर्शी बनी।
नेताओं की प्रतिक्रियाएँ
मतदान खत्म होते ही विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने जनता को धन्यवाद दिया और जीत का दावा किया।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने ट्वीट किया,
“पहले चरण के शांतिपूर्ण मतदान के लिए बिहार की जनता और चुनाव आयोग को धन्यवाद। लोकतंत्र की यह मजबूती बिहार की पहचान है।”
वहीं राजद नेता तेजस्वी यादव ने कहा,
“बिहार के लोगों ने बदलाव का मन बना लिया है। युवाओं और महिलाओं ने जो जोश दिखाया, वही असली परिणाम तय करेगा।”
भाजपा और कांग्रेस दोनों ने अपने-अपने उम्मीदवारों की जीत का विश्वास जताया है, जबकि राजनीतिक विश्लेषक इसे “कड़ी टक्कर वाला चुनाव” बता रहे हैं।
मतदान के दौरान चुनौतियाँ
हालाँकि मतदान शांतिपूर्ण रहा, लेकिन कुछ जिलों में मामूली तकनीकी और प्रशासनिक समस्याएँ सामने आईं:
•कुछ बूथों पर शुरुआती घंटों में EVM में गड़बड़ी
•कई ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति बाधित होने से मतदान थोड़ी देर रुका
•कुछ इलाकों में मतदाता सूची से नाम न मिलने की शिकायतें
चुनाव आयोग ने इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए सुधारात्मक कदम उठाने की बात कही है।
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राजनीतिक मायने और भविष्य की दिशा
पहले चरण में उच्च मतदान दर ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि बढ़ा हुआ मतदान विरोधी लहर (Anti-Incumbency) या परिवर्तन की चाह का संकेत हो सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार:
•महिला मतदाताओं की अधिक भागीदारी सामाजिक योजनाओं और रोजगार नीति से जुड़ी उम्मीदों को दर्शाती है।
•युवाओं का झुकाव नए विकल्पों की तलाश में देखा जा रहा है।
•ग्रामीण-शहरी अंतर ने इस बार भी मतदान पैटर्न को प्रभावित किया है।
पहले चरण का यह रुझान आने वाले चरणों में राजनीतिक दलों की रणनीतियों को काफी हद तक प्रभावित कर सकता है।
आगे क्या
चुनाव का दूसरा चरण 11 नवंबर 2025 को होगा, जिसमें राज्य की 122 सीटों पर मतदान होगा।चुनाव परिणाम 14 नवंबर को घोषित किये जायेंगे.
राज्य में चुनाव परिणाम का असर न केवल बिहार बल्कि राष्ट्रीय राजनीति पर भी गहरा पड़ सकता है, क्योंकि बिहार की सियासत हमेशा से देश की राजनीति का प्रतिबिंब रही है।
निष्कर्ष
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 का पहला चरण यह साबित करता है कि राज्य के मतदाता अब पहले से अधिक राजनीतिक रूप से सजग और सक्रिय हैं।
लगातार बढ़ता मतदान प्रतिशत, युवाओं और महिलाओं की बढ़ती भागीदारी तथा शांतिपूर्ण माहौल ने इस चुनाव को लोकतंत्र का असली पर्व बना दिया है।
अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि यह उच्च मतदान दर किसके पक्ष में जाती है — सत्ता की निरंतरता या बदलाव की बयार?
जो भी परिणाम हो, इतना तो तय है कि बिहार ने एक बार फिर साबित किया है —
“लोकतंत्र की असली ताकत जनता के हाथ में है।”
Bihar – Khabar Aangan
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