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G-RAM-G Bill 2025: संसद में मनरेगा का नाम बदलने वाला विवादित विधेयक पास, सियासी टकराव तेज़

मनरेगा का नाम बदलकर G-RAM-G Bill लोकसभा से पारित हो गया, कांग्रेस ने विरोध जताया, क्या है वजह? जानने के लिए पढ़ें विस्तार से।
Ravi Prakash Jha Published on: 18 दिसम्बर 2025
G-RAM-G Bill 2025: संसद में मनरेगा का नाम बदलने वाला विवादित विधेयक पास, सियासी टकराव तेज़
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नया G-RAM-G Bill या VB-G RAM G Bill संसद के शीतकालीन सत्र में पेश किया गया, जिसका उद्देश्य महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) को समाप्त कर उसे बदलकर एक नए कानून के रूप में लागू करना है। इस विधेयक पर संसद में प्रचंड बहस और विरोध प्रदर्शन देखने को मिले।

संसद की लोकसभा ने आज इस विधेयक को विरोध के बीच पारित कर दिया है। इससे जुड़ी कार्यवाही के दौरान सदन में हलचल और हंगामा भी हुआ और उसके बाद कार्यवाही कई बार स्थगित भी हुई।

सरकार का कहना है कि इस बिल से ग्रामीण रोजगार और आजीविका के अवसरों को मजबूत किया जाएगा। वहीं विपक्षी दलों का आरोप है कि इससे न केवल गांधीजी के नाम को हटा दिया गया है, बल्कि भारत का सबसे बड़ा ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून कमजोर होगा।

G-RAM-G Bill क्या है और क्यों लाया गया?

सरकार ने इस सत्र में Viksit Bharat Guarantee for Rozgar and Ajeevika Mission (Gramin) यानी VB-G RAM G Bill 2025 पेश किया, ताकि MGNREGA को नया रूप प्रदान किया जा सके। विधेयक के अनुसार योजना का नाम बदलकर G-RAM-G Bill रखा गया है।

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रोजगार की गारंटी 100 दिन से बढ़ाकर 125 दिन प्रतिवर्ष की बात शामिल है।राज्य और केंद्र के बीच खर्च का अनुपात बदलकर 60:40 प्रस्तावित किया गया है।सरकार का कहना है कि यह ग्रामीण विकास व रोजगार को “Viksit Bharat 2047” के लक्ष्य से जोड़ देगा।

सरकार का दावा है कि पिछली व्यवस्था में कई व्यवस्थागत समस्याएं और गड़बड़ियां थीं, जिन्हें सुधारने के लिए यह बिल जरुरी है। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सदन में बिल पेश करते समय कहा कि यह कानून गांधीजी के गांवों के विकास के सपनों को आगे ले जाने वाला है।

प्रत्यक्ष बदलाव और प्रस्तावित प्रावधान

नई बिल में प्रमुख प्रस्ताव इस प्रकार हैं:
1. नाम में बदलाव – MGNREGA को पूरी तरह से नए नाम से लॉ में स्थान दिया जा रहा है।
2. गारंटी दिनों में वृद्धि – सालाना रोजगार की गारंटी 100 से 125 दिनों तक।
3. वित्तीय भागीदारी का बदलाव – केंद्र:राज्य खर्च का अनुपात अब 60:40।
4. लक्ष्य व ढांचा – ग्रामीण आजीविका और बुनियादी ढांचे को एकीकृत करने के लक्ष्य के साथ नया संरचनात्मक मॉडल प्रस्तावित है।
सरकार का दावा है कि इससे ग्रामीण क्षेत्र में स्थायी आधार पर रोजगार और आजीविका सुनिश्चित होगी और यह देश के 2047 के विकास लक्ष्यों से जुड़ा होगा।

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विपक्ष का विरोध — नाम परिवर्तन और गांधीजी के प्रति सम्मान

विपक्षी दलों ने इस बदलाव का तेज़ विरोध किया है। कांग्रेस सहित अन्य पार्टियों ने आरोप लगाया कि महात्मा गांधी का नाम पूरी तरह हटाने का निर्णय अनुचित और विवादास्पद है। उन्होंने इसे गांधीजी की पहचान और उनकी सोच का अपमान बताया।


कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि इस निर्णय को बिना विस्तृत चर्चा और परामर्श के लागू करना सही नहीं है। विपक्ष का कहना रहा कि मनरेगा नाम और उसमें गांधीजी का नाम हटना जनता के बीच असंतोष का विषय बन गया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने इसे BJP-RSS की मनरेगा खत्म करने की साजिश बताया, जबकि पी चिदंबरम ने नाम बदलना गांधीजी की ‘दूसरी हत्या’ कहा।

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TMC सांसद महुआ मोइत्रा ने राम राज्य की अवधारणा को नष्ट करने का आरोप लगाया वहीं CPI(M) और समाजवादी पार्टी ने भी इसे गांधी अपमान और नाम बदलने की सनक बताया।
कई विरोधी सांसदों ने तर्क दिया कि नाम बदलने के साथ-साथ केंद्रीय शेयरिंग मॉडल और रोजगार गारंटी में बदलाव से ग्रामीण मजदूरों को न्याय मिलेगा या नहीं, यह स्पष्ट नहीं है।

राज्य स्तर और आम जनता की प्रतिक्रिया

देश के कई हिस्सों में जैसे मध्य प्रदेश, मिज़ोरम आदि जगहों पर विरोध प्रदर्शन भी हुए हैं। स्थानीय कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार के फैसले के खिलाफ नारेबाजी और प्रदर्शन किये।

कई राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस विधेयक के नाम परिवर्तन के अलावा भी इस योजना की सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था में क्या बड़ा बदलाव आएगा, यह देखना बाकी है। आलोचकों का कहना है कि केवल नाम बदलकर योजना का लक्ष्य पूरा नहीं होगा।

वर्तमान स्थिति और आगे की सम्भावनाएँ

लोकसभा में बिल पास हो चुका है, लेकिन अब यह राज्यसभा में चर्चा और मतदान के लिए जाएगा। विपक्ष ने इसका विरोध जारी रखा हुआ है और कई सांसदों ने कहा है कि इसे स्थायी समिति को भेजकर विस्तृत अध्ययन करना चाहिए।
सरकार का लक्ष्य है कि 1 अप्रैल 2026 से यह नया विधान पूरे देश में लागू हो जाए, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आजीविका का नया ढांचा लागू हो सके।

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Ravi Prakash Jha

Ravi Prakash Jha Editor

Ravi Prakash Jha एक डिजिटल पत्रकार और न्यूज़ लेखक हैं, जो राजनीति, सरकारी नीतियों, शिक्षा, टेक्नोलॉजी और सामाजिक मुद्दों से जुड़ी खबरों पर रिपोर्टिंग करते हैं। वे तथ्य-आधारित पत्रकारिता और विश्वसनीय स्रोतों की पुष्टि के बाद समाचार प्रकाशित करने के लिए जाने जाते हैं।समसामयिक घटनाओं की गहरी समझ के साथ Ravi Prakash Jha महत्वपूर्ण राष्ट्रीय और क्षेत्रीय विषयों पर विश्लेषणात्मक लेख लिखते हैं, जिनका उद्देश्य पाठकों तक स्पष्ट, सटीक और निष्पक्ष जानकारी पहुँचाना है।वर्तमान में वे Khabar Aangan न्यूज़ प्लेटफॉर्म के साथ जुड़े हुए हैं और देश-दुनिया की ताज़ा खबरों, सार्वजनिक नीति, सामाजिक बदलाव और डिजिटल ट्रेंड्स से संबंधित विषयों पर नियमित लेखन और रिपोर्टिंग करते हैं।

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