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‘यह उनकी समस्या है!’ Putin डिनर पर Shashi Tharoor को न्यौते से Congress में महासंग्राम, Manoj Tiwari ने खोल दी अंदर की ‘कलह’

‘यह उनकी समस्या है!’ Putin डिनर पर Shashi Tharoor को न्यौते से Congress में महासंग्राम, Manoj Tiwari ने खोल दी अंदर की ‘कलह’

Ravi Prakash Published on: 6 दिसम्बर 2025
‘यह उनकी समस्या है!’ Putin डिनर पर Shashi Tharoor को न्यौते से Congress में महासंग्राम, Manoj Tiwari ने खोल दी अंदर की ‘कलह’
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रूस के राष्ट्रपति Vladimir Putin के सम्मान में राष्ट्रपति भवन में आयोजित रात्रिभोज (डिनर) में कांग्रेस सांसद Shashi Tharoor को आमंत्रित किए जाने और पार्टी के शीर्ष नेताओं, विशेष रूप से लोकसभा और राज्यसभा में विपक्ष के नेता (LoP) राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे को आमंत्रित न किए जाने के बाद खड़ा हुआ राजनीतिक विवाद गरमा गया है। इसी बीच, भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद Manoj Tiwari ने कांग्रेस की आलोचना करते हुए तीखा हमला बोला है। 
तिवारी ने कांग्रेस पार्टी के भीतर चल रहे इस विवाद पर हैरानी जताते हुए कहा, “यह उनकी समस्या है। शशि थरूर एक अनुभवी नेता और उत्कृष्ट वक्ता हैं। अगर उन्हें देश के लिए किसी कार्यक्रम में आमंत्रित किया जाता है, तो उनकी पार्टी को खुशी होनी चाहिए।”

न्यौते पर कांग्रेस में आंतरिक कलह

दरअसल, रूसी राष्ट्रपति putin की भारत यात्रा के दौरान आयोजित राजकीय रात्रिभोज में थरूर को उनकी संसदीय विदेश मामलों की स्थायी समिति के अध्यक्ष (Chairman of the Parliamentary Standing Committee on External Affairs) के रूप में आमंत्रित किया गया था, जबकि कांग्रेस के दोनों सदनों के LoP को न्यौता नहीं मिला।

 
इस पर कांग्रेस नेताओं ने न केवल केंद्र सरकार पर प्रोटोकॉल तोड़ने का आरोप लगाया, बल्कि अपने ही सांसद Shashi Tharoor के न्यौता स्वीकार करने पर भी सार्वजनिक रूप से नाराजगी व्यक्त की। कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने थरूर की आलोचना करते हुए कहा कि जब पार्टी के शीर्ष नेताओं को आमंत्रित नहीं किया गया, तो उन्हें “खेल” को समझना चाहिए था और न्यौता स्वीकार नहीं करना चाहिए था। 

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प्रोटोकॉल का पेंच और कांग्रेस का ‘अपमान’

विवाद की जड़ प्रोटोकॉल है। कांग्रेस का तर्क है कि राजकीय यात्राओं और महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में दोनों सदनों के विपक्ष के नेताओं को आमंत्रित करने की एक स्थापित परंपरा रही है। यह आमंत्रण केवल एक सम्मान नहीं, बल्कि संसदीय लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका का आधिकारिक प्रतिनिधित्व होता है। कांग्रेस के शीर्ष नेताओं को जानबूझकर बाहर रखकर केंद्र सरकार ने न केवल एक परंपरा को तोड़ा है, बल्कि विपक्ष का “अपमान” भी किया है, जैसा कि पार्टी के प्रवक्ता पवन खेड़ा और अन्य नेताओं ने आरोप लगाया।


हालांकि, सरकार के सूत्रों ने स्पष्ट किया कि Shashi Tharoor को उनकी व्यक्तिगत क्षमता में नहीं, बल्कि संसदीय विदेश मामलों की स्थायी समिति के अध्यक्ष (Chairman of the Parliamentary Standing Committee on External Affairs) के रूप में आमंत्रित किया गया था। समिति के अध्यक्ष को विदेश नीति से जुड़े राजकीय कार्यक्रमों में बुलाना भी एक स्थापित मानक है।


कांग्रेस की समस्या यहीं से शुरू होती है। सरकार ने तकनीकी रूप से प्रोटोकॉल का पालन किया, लेकिन राजनीतिक रूप से एक ऐसी स्थिति पैदा कर दी, जिसमें पार्टी के अनुभवी नेता थरूर को न्यौता मिला, लेकिन पार्टी अध्यक्ष या LoP को नहीं। यह कांग्रेस के लिए एक राजनीतिक ट्रैप था, जिसमें वह बुरी तरह फँस गई।

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