6 नवंबर 2025 को 18 जिलों की 121 सीटों पर पड़े मतों की संख्या और प्रतिशत (65.08%) आजादी के बाद Bihar के किसी भी विधानसभा या लोकसभा चुनाव से अधिक रही है। पिछला रिकॉर्ड 1998 के लोकसभा चुनाव (64.6%) और 2000 के विधानसभा चुनाव (62.57%) में था, जिसे 2025 के इस चुनाव ने पीछे छोड़ दिया।
•पहचान स्थापित करने की जिज्ञासा: मतदाता लिस्ट विवादों के चलते लोग अपने नाम की पुष्टि के लिए विशेष रूप से वोट डालने पहुंचे।
किन मुद्दों पर जनता ने किया मतदान?
इस बार Bihar के चुनावी माहौल में कई मुद्दे छाए रहे —
1. रोजगार और पलायन: बिहार के युवाओं के लिए रोजगार सबसे बड़ा मुद्दा रहा।
2. महिलाओं की सुरक्षा और शिक्षा: महिला मतदाताओं की संख्या इस बार काफी अधिक रही, जिससे साफ संकेत मिलता है कि वे बदलाव चाहती हैं।
3. महंगाई और भ्रष्टाचार: बढ़ती महंगाई और भ्रष्टाचार ने जनता को नाराज़ किया।
4. विकास का सवाल: सड़क, बिजली, पानी और स्वास्थ्य सेवाओं पर भी जनता ने अपने अनुभव के आधार पर मतदान किया।
5.जतिगत आधार: Bihar अब तक जाति की राजनीति से उबर नहीं पाया है।
युवाओं का झुकाव किस ओर?
Bihar की राजनीति में युवा वोटरों की भूमिका इस बार निर्णायक मानी जा रही है। पहली बार वोट डालने वाले लाखों युवा मतदाता राज्य की दिशा तय कर सकते हैं। सोशल मीडिया पर युवाओं का ट्रेंडिंग मूड देखकर यह कहा जा सकता है कि वे इस बार पारंपरिक राजनीति से हटकर “काम और अवसर” को प्राथमिकता दे रहे हैं।
युवाओं के बीच बेरोजगारी और पलायन जैसे मुद्दे सबसे बड़ा चुनावी फैक्टर साबित हो सकते हैं। ऐसे में यह वर्ग सत्ता परिवर्तन में प्रमुख भूमिका निभा सकता है।
महिलाएं बनेंगी ‘गेम चेंजर’!
इस बार महिला मतदाताओं की भागीदारी ऐतिहासिक रही। रिपोर्टों के अनुसार, कई जिलों में महिलाओं ने पुरुषों से अधिक मतदान किया। यह संकेत देता है कि महिलाएं अब राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं और वे अपने मुद्दों — जैसे सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य और सम्मान — को लेकर गंभीर हैं।
कई राजनीतिक पंडितों का मानना है कि यह महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है और अगर यह जोश विपक्ष के पक्ष में गया, तो सत्ता परिवर्तन तय माना जा सकता है।
क्या यह सत्ता परिवर्तन का संकेत है?
इतिहास गवाह है, जब-जब Bihar में वोटिंग प्रतिशत में 5% से ज्यादा का बदलाव आया, सियासी नतीजे भी बदले। 2015 और 2020 के चुनाव इसका उदाहरण हैं। हालांकि, इस बार विशेषज्ञों की राय बंटी हुई है—
•कुछ का मानना है कि उच्च मतदान प्रतिशत सत्ता विरोधी (anti-incumbency) लहर का संकेत है—यानी जनता बदलाव चाहती है।
•वहीं सरकार पक्ष इसे “प्रो-इंकम्बेंसी”—अर्थात मौजूदा सरकार के पक्ष में उत्साह के रूप में देख रहा है।
•पीएम मोदी ने इसे एनडीए के पक्ष में “65 वोल्ट का शॉक” बताया, जबकि प्रशांत किशोर ने इसे बदलाव का संकेत कहा।
सीटवार खास असर और सामाजिक समीकरण
•बेगूसराय में 67% से ज्यादा टर्नआउट दर्ज हुआ, शेखपुरा में सबसे कम।
•100 से अधिक सीटों पर वोटर रोल में बदलाव के चलते समीकरण बदले हैं, कुछ इलाकों में महिला और युवा वोटर्स ने बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया।
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•कुछ जगह चुनावी हिंसा, EVM विवाद, बिजली कटौती, लेकिन कुल मिलाकर शांतिपूर्ण चुनाव।
काउंटिंग के दिन पर टिकी उम्मीदें
सूत्र यही बताते हैं कि Bihar की रिकॉर्ड वोटिंग सत्ता परिवर्तन की खबर का सबसे मजबूत संकेत बन सकती है—लेकिन किस ओर, यह 14 नवंबर की काउंटिंग के दिन ही साफ हो पाएगा। बरसों के अनुभव के अनुसार उच्च मतदान सरकार बदल सकता है, मगर ग्राउंड समीकरण, जातिगत मोड़, युवा और महिला भागीदारी, लोकल मुद्दे, और स्ट्रैटेजिक वोटिंग इस “मतदान महाकुंभ” की सच्ची दिशा तय करेंगे।इसलिए, “Bihar चुनाव 2025 का रिकॉर्ड मतदान सत्ता परिवर्तन का संकेत भी हो सकता है, लेकिन यह तब्दील होगा या टिकेगा—इसका फैसला 14 नवंबर” को ही होगा।
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