पटना/दिल्ली/मुंबई (रिपोर्ट): Chhath Puja का चार दिवसीय महापर्व आज अपने मुख्य और सबसे प्रतीकात्मक चरण में पहुँच गया है। Kharna की समाप्ति के बाद, व्रती (Parvaitin) 36 घंटे के कठोर निर्जला व्रत (बिना अन्न और जल के उपवास) के साथ आज शाम Sandhya Arghya (संध्या अर्घ्य) देंगे ।
सूर्य देव और उनकी बहन छठी मैया के प्रति अटूट आस्था का यह पर्व आज देश और दुनिया भर के घाटों पर एक अविस्मरणीय दृश्य प्रस्तुत करेगा। लाखों श्रद्धालु नदी, तालाब और जलाशयों के किनारों पर इकट्ठा हो चुके हैं, जहाँ डूबते हुए सूर्य को पहला अर्घ्य देकर जीवन और ऊर्जा के स्रोत के प्रति आभार व्यक्त किया जाएगा ।
यह विशेष न्यूज़ आर्टिकल Sandhya Arghya की विधि, इसके गहरे दार्शनिक महत्व और इस दौरान घाटों पर बनने वाले सामुदायिक वातावरण का वर्णन करता है।
Sandhya Arghya: डूबते सूर्य की अद्वितीय उपासना
Sandhya Arghya का अनुष्ठान Chhath Puja को अन्य सभी हिंदू त्योहारों से अलग करता है। यह इकलौता पर्व है, जहाँ उगते सूर्य के साथ-साथ डूबते सूर्य की भी पूजा की जाती है ।
1. 36 घंटे का कठोर संकल्प
Kharna के बाद व्रती कल शाम से ही निर्जला व्रत पर हैं। Sandhya Arghya के समय, वे व्रत के लगभग 24 घंटे पूरे कर चुके होते हैं। यह कठोर तपस्या व्रती की शारीरिक सहनशक्ति और आध्यात्मिक दृढ़ता की पराकाष्ठा है ।