दरभंगा, 9 सितंबर 2026: दरभंगा और मिथिला के लिए प्रस्तावित पशुपतिनाथ धाम-बैद्यनाथ धाम हाई-स्पीड कॉरिडोर को लेकर एक महत्वपूर्ण कदम सामने आया है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने सांसद गोपाल जी ठाकुर के प्रस्तावित मार्ग को मंत्रालय के नए राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण कार्यक्रम में शामिल करने की दिशा में अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए हैं। इस प्रस्तावित मार्ग में भेजा, गंडौल, कुशेश्वरनाथ धाम और खगड़िया को जोड़ने की मांग की गई है।
गडकरी को भेजे पत्र के जवाब में आया महत्वपूर्ण पत्र
7 सितंबर 2026 को केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी की ओर से सांसद गोपाल जी ठाकुर को भेजे गए पत्र में उनके 3 अप्रैल 2026 के पत्र का संदर्भ दिया गया है। उस पत्र में पशुपतिनाथ धाम से बैद्यनाथ धाम तक प्रस्तावित हाई-स्पीड कॉरिडोर को भेजा-गंडौल-कुशेश्वरनाथ-खगड़िया होकर बनाने का अनुरोध किया गया था।

गडकरी के पत्र में कहा गया है कि नए राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित करने की नीति के तहत मंत्रालय यातायात घनत्व, माल ढुलाई, यात्री आवाजाही, क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक महत्व, पर्यटन और राष्ट्रीय राजमार्गों को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण सड़कों जैसे पहलुओं को ध्यान में रखकर निर्णय करता है। इसी आधार पर प्रस्तावित मार्ग को नए राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण कार्यक्रम में शामिल करने के लिए अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं।
अभी क्या हुआ है और क्या बाकी है
यहां एक बात समझना जरूरी है। पत्र में अधिकारियों को प्रस्तावित मार्ग को नए राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण कार्यक्रम में शामिल करने के लिए निर्देश देने की बात है। इसका मतलब यह नहीं है कि इस समय सड़क निर्माण को अंतिम मंजूरी, बजट स्वीकृति या निर्माण शुरू करने की तारीख घोषित हो गई है।
यानी फिलहाल यह मामला प्रस्ताव को आगे बढ़ाने और मंत्रालय के स्तर पर उसे कार्यक्रम में शामिल करने की प्रक्रिया से जुड़ा है। आगे की औपचारिक प्रक्रिया के बाद ही परियोजना की वास्तविक स्थिति और निर्माण संबंधी निर्णय स्पष्ट होंगे।
कुशेश्वरनाथ धाम को कॉरिडोर से जोड़ने की मांग
सांसद गोपाल जी ठाकुर ने अप्रैल में लोकसभा के शून्यकाल के दौरान भी इस मुद्दे को उठाया था। आकाशवाणी की रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने पशुपतिनाथ धाम-बैद्यनाथ धाम हाई-स्पीड कॉरिडोर को भेजा-जंडोल, कुशेश्वरस्थान और खगड़िया होते हुए बनाने की मांग रखी थी और इसे क्षेत्रीय आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया था।
बाद में दरभंगा की सड़क परियोजनाओं को लेकर भी सांसद की ओर से कुशेश्वरस्थान को इस प्रस्तावित कॉरिडोर से जोड़ने की पहल की जानकारी सामने आई थी।
पहले से प्रस्तावित है पशुपतिनाथ-बैद्यनाथ धाम कॉरिडोर
पशुपतिनाथ धाम से झारखंड के देवघर स्थित बैद्यनाथ धाम तक हाई-स्पीड कॉरिडोर का प्रस्ताव बिहार में पहले ही सामने आ चुका है। फरवरी 2026 में बिहार के पथ निर्माण मंत्री ने विधानसभा में बताया था कि प्रस्तावित कॉरिडोर नेपाल के काठमांडू से शुरू होकर भीमनगर और बीरपुर के रास्ते बिहार में प्रवेश करेगा तथा सुपौल, मधेपुरा, सहरसा, खगड़िया, मुंगेर और बांका होते हुए देवघर पहुंचेगा।
अब दरभंगा के कुशेश्वरनाथ धाम को भेजा-गंडौल के रास्ते इस प्रस्तावित कनेक्टिविटी से जोड़ने की मांग ने मिथिला के हिस्से को भी इस बड़े धार्मिक और क्षेत्रीय संपर्क नेटवर्क में शामिल करने की दिशा में नया कदम बढ़ाया है।
कुशेश्वरनाथ के लिए क्यों अहम है यह कनेक्टिविटी
कुशेश्वरनाथ धाम दरभंगा जिले के कुशेश्वरस्थान क्षेत्र में स्थित प्रमुख धार्मिक स्थल है। प्रस्तावित मार्ग में इसे जोड़ने से इस इलाके की सड़क कनेक्टिविटी मजबूत होने की संभावना बनती है। इससे श्रद्धालुओं के साथ-साथ स्थानीय लोगों की आवाजाही और क्षेत्रीय संपर्क को भी फायदा हो सकता है।
हालांकि इन लाभों को अभी संभावित प्रभाव के रूप में ही देखा जाना चाहिए। परियोजना का अंतिम स्वरूप, मार्ग की स्वीकृति, भूमि अधिग्रहण, निर्माण लागत और समय-सीमा जैसी बातें आगे की सरकारी प्रक्रिया में स्पष्ट होंगी।
गोपाल जी ठाकुर ने जताया आभार
सांसद गोपाल जी ठाकुर ने अपने संदेश में इस पहल को दरभंगा-मिथिला के विकास से जोड़ते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के प्रति आभार जताया है। उन्होंने कहा कि यह पहल पशुपतिनाथ धाम, कुशेश्वरनाथ धाम और बैद्यनाथ धाम को बेहतर कनेक्टिविटी से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
उन्होंने यह भी उम्मीद जताई कि प्रस्तावित कॉरिडोर से कुशेश्वरनाथ धाम के धार्मिक और पर्यटन विकास के साथ बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में आवागमन, श्रद्धालुओं की यात्रा तथा मिथिला के व्यापार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को लाभ मिल सकता है। इन लाभों पर अंतिम असर हालांकि परियोजना के वास्तविक स्वरूप और निर्माण के बाद ही स्पष्ट होगा।
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