दरभंगा, 17 सितंबर 2026: मजदूरी कितनी मिलनी चाहिए, बच्चों से काम क्यों नहीं कराया जाना चाहिए, दुर्घटना के बाद परिवार को कौन-सी सरकारी मदद मिल सकती है और निर्माण श्रमिकों का पंजीकरण क्यों जरूरी है—दरभंगा में आयोजित एक दिवसीय जागरूकता शिविर में ग्रामीण और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को ऐसी कई जरूरी जानकारियां दी गईं।
श्रम कल्याण दिवस के अवसर पर उप श्रमायुक्त कार्यालय सभागार में आयोजित प्रशिक्षण शिविर-सह-कार्यशाला में जिले के अलग-अलग पंचायतों से महिला और पुरुष श्रमिक पहुंचे। यहां उन्हें श्रम कानूनों, सरकारी कल्याणकारी योजनाओं, न्यूनतम मजदूरी, बाल श्रम और प्रवासी श्रमिकों से जुड़ी व्यवस्थाओं के बारे में बताया गया। कार्यक्रम के दौरान कई लाभुकों को सांकेतिक चेक भी दिए गए और बेहतर काम करने वाले कुछ कर्मियों को सम्मानित किया गया।
शिविर में श्रमिकों को मिली अपने अधिकारों की जानकारी
कार्यक्रम का उद्घाटन उप श्रमायुक्त दरभंगा राकेश रंजन, श्रम अधीक्षक प्रिया राज, जिला अग्निशमन पदाधिकारी, विभिन्न क्षेत्रों के श्रम प्रवर्तन पदाधिकारियों, कार्यालय कर्मियों और कामगार यूनियन के प्रतिनिधियों ने दीप प्रज्वलित कर किया।
उप श्रमायुक्त राकेश रंजन ने पंचायतों से आए श्रमिकों का स्वागत करते हुए कहा कि शिविर में मिलने वाली जानकारी को केवल अपने तक सीमित न रखें। उन्होंने श्रमिकों से अपने पंचायत में कम से कम 100 लोगों तक श्रम कानूनों और सरकारी योजनाओं की जानकारी पहुंचाने की अपील की, ताकि शिविर का उद्देश्य ज्यादा लोगों तक पहुंच सके।
उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण का मकसद श्रम संसाधन एवं प्रवासी श्रमिक कल्याण विभाग की योजनाओं को जिले की सभी पंचायतों तक पहुंचाना है।
14 साल से कम उम्र के बच्चों से काम न कराने की अपील
शिविर में बाल श्रम का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। श्रम विभाग के अधिकारियों ने कहा कि 14 वर्ष की उम्र तक बच्चों का स्थान स्कूल और खेल का मैदान है, किसी दुकान, ढाबे या दूसरे प्रतिष्ठान में काम करना नहीं।
बताया गया कि दरभंगा को बाल श्रम मुक्त बनाने के लिए अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत जिले के 18 प्रखंडों की तीन-तीन पंचायतों को बाल श्रम मुक्त कराने के लिए चुना गया है और इसके लिए प्रक्रिया जारी है।
अधिकारियों ने यह भी समझाया कि बच्चों को स्कूल भेजने में परिवार की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। कार्यक्रम में महिलाओं से विशेष रूप से अपील की गई कि वे बच्चों को काम पर भेजने के बजाय उनकी पढ़ाई जारी रखने के लिए प्रोत्साहित करें।
निर्माण श्रमिकों से पंजीकरण कराने को कहा
शिविर में बिहार भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड से जुड़ी योजनाओं की जानकारी भी दी गई। अधिकारियों ने निर्माण क्षेत्र में काम करने वाले ज्यादा से ज्यादा श्रमिकों को बोर्ड के तहत पंजीकरण कराने की सलाह दी।
इसके साथ ही असंगठित क्षेत्र के किसी कामगार की मृत्यु होने की स्थिति में उसके परिवार को मिलने वाली सहायता के बारे में भी बताया गया। श्रमिकों को बिहार शताब्दी असंगठित कार्यक्षेत्र कामगार एवं शिल्पकार सामाजिक सुरक्षा योजना और बिहार राज्य प्रवासी मजदूर दुर्घटना अनुदान योजना के तहत प्रखंड या जिला कार्यालय में आवेदन करने की प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी गई।
न्यूनतम मजदूरी से कम भुगतान पर कर सकते हैं शिकायत
शिविर में श्रमिकों के लिए सबसे उपयोगी जानकारी में न्यूनतम मजदूरी की दर भी शामिल रही। उप श्रमायुक्त ने बताया कि 1 अप्रैल 2026 से निर्धारित दर के अनुसार सामान्य अनुसूचित नियोजन में 8 घंटे के काम के लिए अकुशल कामगार की न्यूनतम मजदूरी 436 रुपये प्रतिदिन है।
इसी तरह अर्द्धकुशल कामगार के लिए 452 रुपये, कुशल कामगार के लिए 551 रुपये और अतिकुशल कामगार के लिए 672 रुपये प्रतिदिन की दर बताई गई। पर्यवेक्षकीय और लिपिकीय कार्य के लिए 14,326 रुपये प्रतिमाह की दर की जानकारी दी गई।
अधिकारियों ने बताया कि यदि किसी नियोजक की ओर से निर्धारित न्यूनतम मजदूरी से कम भुगतान किया जाता है, तो श्रमिक इसकी लिखित शिकायत जिले में श्रम अधीक्षक और प्रखंड स्तर पर श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी के पास कर सकते हैं।
कई लाभुकों को दिए गए सांकेतिक चेक
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न सरकारी योजनाओं के लाभुकों को सांकेतिक चेक वितरित किए गए। इनमें मीरा देवी को दुर्घटना में मृत्यु के मामले में बिहार शताब्दी असंगठित कार्यक्षेत्र कामगार एवं शिल्पकार सामाजिक सुरक्षा योजना के तहत सहायता दी गई।
राम देवी को बिहार राज्य प्रवासी मजदूर दुर्घटना अनुदान योजना के तहत सांकेतिक चेक दिया गया। भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड की योजनाओं के तहत राज कुमार साह, पानो देवी, शीला देवी, राज कुमार दास, श्रवण राय और सुशील दास को विवाह सहायता मिली।
आनंद कुमार को पितृत्व योजना, पंकज कुमार और नरेश मांझी को साइकिल क्रय अनुदान तथा मंजु देवी को मृत्युहित अनुदान का लाभ दिया गया। गोविन्द साहू और शंभु प्रसाद राय को नगद पुरस्कार अनुदान योजना के तहत सांकेतिक चेक मिला। वहीं कृष्ण कुमार महतो और मोहम्मद सितारे को बाल श्रम के तहत मुख्यमंत्री राहत कोष से सांकेतिक चेक दिया गया।
बेहतर काम करने वाले कर्मियों को भी किया गया सम्मानित
शिविर में अलग-अलग संस्थानों की ओर से बेहतर कार्य करने वाले कर्मियों को भी सम्मानित किया गया। गावर कन्स्ट्रक्शन कंपनी की ओर से सतीश कुमार, रितेश कुमार और प्रमोद कुमार को पुरस्कार दिया गया। मां अम्बे फूड प्रोडक्ट की ओर से विशाल कुमार और अभिषेक कुमार तथा मिथिला फ्लावर मिल की ओर से प्रवीण कुमार, राकेश कुमार सिंह और गणेश कुमार पंडित को कंपनी प्रतिनिधियों ने सम्मानित किया।
श्रमिकों का पहले पंजीकरण, फिर दी गई योजनाओं की जानकारी
शिविर में आए श्रमिकों का संबंधित श्रम प्रवर्तन पदाधिकारियों ने पहले पंजीकरण किया। इसके बाद उन्हें श्रम संसाधन एवं प्रवासी श्रमिक कल्याण विभाग की विभिन्न योजनाओं से संबंधित पंपलेट और फोल्डर दिए गए।
अलग-अलग अधिकारियों ने सामाजिक सुरक्षा, बाल एवं किशोर श्रम, बंधुआ श्रमिक, प्रवासी कामगार, ई-श्रम, निर्माण श्रमिकों का पंजीकरण, नवीकरण और दुर्घटना सहायता जैसी योजनाओं की जानकारी दी।
कार्यक्रम के समापन पर श्रमिकों में उत्साह दिखाई दिया। कई श्रमिकों ने कहा कि शिविर में आने के बाद उन्हें पहली बार अपने श्रमिक अधिकारों और सरकारी योजनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी मिली।
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