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“महंगाई पर भारी पड़ी आस्था, धनतेरस 2025 पर रिकार्ड कारोबार और निवेश का उबाल”

“महंगाई पर भारी पड़ी आस्था, धनतेरस 2025 पर रिकार्ड कारोबार और निवेश का उबाल”

Khabar Aangan Published on: 18 अक्टूबर 2025
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धनतेरस 2025 भारत में आर्थिक समृद्धि और खुशहाली का प्रतीक त्योहार है, जो दिवाली से दो दिन पहले मनाया जाता है। इस दिन खासतौर पर सोना, चांदी और नए घरेलू सामान की खरीदारी की जाती है। हालाँकि, 2025 में बढ़ती महंगाई के बावजूद, धनतेरस का व्यापार गजब का चला है, जो इस त्योहार की सांस्कृतिक और आर्थिक अहमियत को दर्शाता है।

महंगाई की मार के बावजूद सोना और चांदी का कारोबार बरकरार:


2025 में भारत में महंगाई दर में मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो खासकर उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतों में इजाफे के कारण हुई है। लेकिन इसके बावजूद सोने और चांदी की मांग में कमी नहीं आई है। इस साल सोने के दाम पिछले एक वर्ष में लगभग 66% तक बढ़ गए हैं, जिसकी वजह से यह निवेशकों के लिए सबसे सुरक्षित और आकर्षक संपत्ति बन गई है। कई जगहों पर सोने और चांदी के सिक्कों की बिक्री में 40% तक की वृद्धि हुई है, जिससे आभूषण कारोबारी भी खुश हैं।सोने की कीमतें इस वर्ष ₹1,30,000 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गई हैं, जो छत के पार माना जा रहा है। इसके बावजूद, त्योहार के अवसर पर खरीदारी का मज़ा कम नहीं हुआ क्योंकि लोग इसे केवल आभूषण नहीं बल्कि निवेश का मजबूत माध्यम मानते हैं।

महंगाई और उपभोक्ता व्यवहार:


खर्च में संतुलन बनाना महंगाई के प्रभाव से उपभोक्ता अपने खर्चों को लेकर अधिक सतर्क हो गए हैं, लेकिन धनतेरस जैसे महत्वपूर्ण त्योहार पर वह निवेश को नजरअंदाज नहीं करते। इस साल देखा गया कि लोग विशाल और भारी आभूषणों की जगह छोटे, हल्के और सिक्कों/बार्स जैसी वस्तुएं खरीदना पसंद कर रहे हैं। यह पारंपरिक खरीदारी से हटकर विवेकपूर्ण खरीदारी का संकेत है।साथ ही, डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए गोल्ड ईटीएफ, म्यूचुअल फंड्स और सोवरिन गोल्ड बॉन्ड्स में भी निवेश का क्रेज बढ़ा है, जो महंगाई को मात देने के लिए स्मार्ट निवेश का विकल्प समझे जा रहे हैं।

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व्यापारियों की प्रतिक्रिया:महंगाई से जूझता बाजार, पर उत्साह बरकरार


उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जैसे प्रमुख ज्वेलरी बाजारों में दुकानदारों ने माना कि महंगाई का व्यापारी वर्ग पर असर जरूर हुआ है। ग्राहक कम आए हैं, लेकिन खरीदी के लिहाज से कारोबार अभी भी मजबूत दिख रहा है। मंडी में सोना और चांदी के सिक्कों की मांग बढ़ी है और लोग निवेश के लिहाज से भी खरीदारी कर रहे हैं।हिमाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों में प्राकृतिक आपदाओं और स्थानीय प्रतिबंधों के चलते व्यापारिक गतिविधियां थोड़ी सुस्त रहीं, लेकिन त्योहार की महत्ता के कारण बिक्री में कोई बड़ी गिरावट नहीं आई।महंगाई के बीच धनतेरस पर निवेश के 10 स्मार्ट विचारधनतेरस पर सिर्फ फिजिकल सोना ही नहीं, डिजिटल गोल्ड, सोवरिन गोल्ड बॉन्ड, गोल्ड ईटीएफ जैसी विविध निवेश विधियों का सुझाव वित्तीय विशेषज्ञ दे रहे हैं। ये विकल्प न केवल निवेश की उपलब्धता को बढाते हैं बल्कि टैक्स बचत के लिहाज से भी फायदेमंद होते हैं।


•डिजिटल गोल्ड: भंडारण और सुरक्षा का झंझट नहीं
•सोवरिन गोल्ड बॉन्ड: निश्चित ब्याज के साथ टैक्स फ्री मुनाफा
•गोल्ड ईटीएफ और म्यूचुअल फंड्स: पेशेवर प्रबंधन और तरलता
ऐसे निवेश से महंगाई के प्रभाव को दूर किया जा सकता है और संपत्ति की वैल्यू को समय के साथ बढ़ाया जा सकता है।

सांस्कृतिक महत्व और अच्छे कारोबार का मेल:-


धनतेरस पर केवल व्यापार ही नहीं, बल्कि पूजा-अर्चना का महत्त्व भी रहता है। लक्ष्मी और गणेश की पूजा के साथ सोने-चांदी की वस्तुएं खरीदना शुभ माना जाता है। पूजा थाली में सोने या चांदी के सिक्के रखना सुख और समृद्धि का प्रतीक है। इसलिए, इस दिन के अवसर पर खरीदारी का क्रेज कम नहीं होता।महंगाई के चलते कीमतें जरूर बढ़ी हैं, लेकिन इसका असर उत्सव के बाजार पर ज्यादा पड़ा नहीं है। लोगों की आस्था ने व्यापार को बढ़ावा दिया है, और पारंपरिक खरीदारी के साथ-साथ आधुनिक वित्तीय निवेश भी इस मौके पर जोर पकड़ रहे हैं।यह पूरे देश में एक ऐसा समय है जब महंगाई के बावजूद व्यापार में उम्मीद जगती है और आर्थिक गतिविधियां चलती हैं। धनतेरस का त्योहार न सिर्फ धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व रखता है, बल्कि यह निवेशकों और व्यापारियों के लिए भी आशा और अवसर लाता है।

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