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इस साल का Diwali 2025 पर्व रहेगा बहुत खास

इस साल Diwali 2025 का पर्व रहेगा बेहद खास—18 से 23 अक्टूबर तक पूरे छह दिन की रौशनी, परंपरा और उल्लास से भरपूर। जानिए हर दिन की खासियत और क्यों यह दिवाली बनेगी यादगार
Ravi Prakash Jha Published on: 17 अक्टूबर 2025
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Diwali 2025 का पर्व इस साल बहुत खास रहेगा क्योंकि यह पांच नहीं बल्कि पूरे छह दिनों तक मनाया जाएगा। 18 अक्टूबर से शुरू होकर 23 अक्टूबर तक चलने वाला यह दीपोत्सव हिन्दू धर्म का सबसे बड़ा और उल्लसित पर्व है, जो अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक माना जाता है। इस बार धनतेरस के अगले दिन से लेकर भाई दूज तक लगातार त्योहारों की श्रृंखला देखने को मिलेगी।आइए जानते हैं इस साल दिवाली के छह दिनों का पूरा कैलेंडर, धार्मिक महत्व और सरकारी छुट्टियों की स्थिति धनतेरस 2025: 18 अक्टूबर, शनिवार:-धनतेरस से दिवाली की शुरुआत होती है। यह दिन कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन भगवान धन्वंतरि और कुबेर की पूजा की जाती है। धनतेरस के दिन सोना, चांदी, बर्तन और नई वस्तुएं खरीदना शुभ माना जाता है। इस वर्ष यह तिथि 18 अक्टूबर को पड़ रही है, जो शनिवार के दिन है। समुद्र मंथन की कथा के अनुसार, इस दिन भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे, इसलिए यह दिन आरोग्य और धन की स्थिरता का प्रतीक माना गया है।नरक चतुर्दशी या छोटी दिवाली: 19 अक्टूबर, रविवार:-दिवाली के दूसरे दिन नरक चतुर्दशी, जिसे छोटी दिवाली भी कहा जाता है, मनाई जाती है। यह दिन भगवान कृष्ण द्वारा राक्षस नरकासुर के वध की स्मृति में मनाया जाता है, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। घरों में यमराज के नाम का दीपक दक्षिण दिशा में जलाया जाता है, जिससे अकाल मृत्यु से रक्षा का आशीर्वाद मिलता है। इस वर्ष छोटी दिवाली 19 अक्टूबर (रविवार) को मनाई जाएगीबड़ी दिवाली और लक्ष्मी-गणेश पूजा: 20 अक्टूबर, सोमवार:-कार्तिक अमावस्या की रात को लक्ष्मी-गणेश पूजा का आयोजन होता है, जो दिवाली का मुख्य दिन है। इस दिन घरों में दीप जलाए जाते हैं ताकि अंधकार (अज्ञान) पर प्रकाश (ज्ञान) की विजय हो। भगवान गणेश, देवी लक्ष्मी और कुबेर देव की पूजा होती है। व्यापारी अपने बही-खाते खोलते हैं और नए कार्यों की शुरुआत करते हैं। इस वर्ष बड़ी दिवाली 20 अक्टूबर सोमवार को पड़ेगी, जो भारत सरकार की ओर से राष्ट्रीय अवकाश (Gazetted Holiday) भी घोषित है।गोवर्धन पूजा और अन्नकूट: 22 अक्टूबर, बुधवार:-दिवाली के चौथे दिन गोवर्धन पूजा मनाई जाती है। इसे अन्नकूट के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन भगवान कृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत उठाकर इंद्र के अभिमान को तोड़ने की कथा का स्मरण किया जाता है। भक्तगण गोबर से गोवर्धन पर्वत का प्रतीक बनाकर पूजा करते हैं और मंदिरों में विभिन्न प्रकार के अन्न का भोग लगाया जाता है। इस वर्ष गोवर्धन पूजा 22 अक्टूबर, बुधवार को मनाई जाएगी।भाई दूज 2025: 23 अक्टूबर, गुरुवार:-दिवाली के अंतिम दिन भाई दूज का पर्व मनाया जाता है, जो भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक है। बहनें अपने भाइयों को तिलक कर उनकी लंबी आयु, सुख-समृद्धि और सुरक्षा की प्रार्थना करती हैं। बदले में भाई उपहार देकर प्रेम का आदान-प्रदान करते हैं। इस वर्ष भाई दूज 23 अक्टूबर, गुरुवार को मनाया जाएगा। यह दिन परिवारिक संबंधों की मधुरता का संदेश देता है।इस बार दिवाली क्यों 6 दिन की है?आमतौर पर दिवाली का पर्व पांच दिनों तक चलता है, लेकिन इस बार त्रयोदशी तिथि (धनतेरस) के विस्तारित समय और पंचांग में पड़ने वाले बदलावों के कारण यह पर्व छह दिनों तक मनाया जाएगा। इस अतिरिक्त तिथि को ज्योतिषीय आधार पर शुभ माना जा रहा है, जिसके कारण कई स्थानों पर “गोवत्स द्वादशी” (17 अक्टूबर) को भी मान्यता मिली है। इस तरह 17 अक्टूबर से 23 अक्टूबर तक कुल छह दिन का दीपोत्सव रहेगा, जो एक दुर्लभ परंपरागत स्थिति है।आधिकारिक छुट्टियां और सार्वजनिक अवकाश:-केंद्रीय सरकार के 2025 कैलेंडर के अनुसार, 20 अक्टूबर (सोमवार) को दीपावली का Gazetted Holiday रहेगा। इसके साथ ही 22 अक्टूबर (गोवर्धन पूजा) और 23 अक्टूबर (भाई दूज) Restricted Holidays घोषित हैं। यानी सरकारी दफ्तर और बैंक 20 अक्टूबर को पूर्णतः बंद रहेंगे, जबकि कर्मचारी 22 और 23 अक्टूबर को वैकल्पिक अवकाश ले सकते हैं।दिवाली का धार्मिक और सामाजिक महत्व:-दिवाली भारतीय संस्कृति में प्रकाश, समृद्धि, परिवारिक बंधन और सामाजिक एकता का पर्व है। यह केवल दीपक जलाने तक सीमित नहीं, बल्कि आत्मिक शुद्धता और जीवन में सकारात्मकता का प्रतीक है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान राम ने 14 वर्ष के वनवास और रावण वध के बाद अयोध्या लौटकर इस दिन का उत्सव मनाया था। वहीं, जैनियों के अनुसार यह भगवान महावीर के निर्वाण का दिन है, और सिख परंपरा में यह गुरु हरगोविन्द सिंह जी की जेल मुक्ति दिवस के रूप में मनाया जाता है।निष्कर्ष:-दिवाली 2025 न केवल रोशनी और आनंद का प्रतीक है, बल्कि यह हिंदू पंचांग के अनुसार एक दुर्लभ अवसर भी है, जब छह दिनों तक धार्मिक और पारिवारिक उल्लास देखने को मिलेगा। इस बार के पंचांग में तिथियों की स्थिति ऐसी है कि धनतेरस से पहले “गोवत्स द्वादशी” और दिवाली के बाद “खाली मंगलवार” के रूप में एक अंतराल का दिन मिल रहा है। यह समय आत्मिक शांति, परिवारिक आनंद और सामाजिक समर्पण का अद्भुत संगम साबित होगा।
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Diwali 2025 का पर्व इस साल बहुत खास रहेगा क्योंकि यह पांच नहीं बल्कि पूरे छह दिनों तक मनाया जाएगा। 18 अक्टूबर से शुरू होकर 23 अक्टूबर तक चलने वाला यह दीपोत्सव हिन्दू धर्म का सबसे बड़ा और उल्लसित पर्व है, जो अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक माना जाता है। इस बार धनतेरस के अगले दिन से लेकर भाई दूज तक लगातार त्योहारों की श्रृंखला देखने को मिलेगी।

आइए जानते हैं इस साल दिवाली के छह दिनों का पूरा कैलेंडर, धार्मिक महत्व और सरकारी छुट्टियों की स्थिति

धनतेरस 2025: 18 अक्टूबर, शनिवार:-

धनतेरस से दिवाली की शुरुआत होती है। यह दिन कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन भगवान धन्वंतरि और कुबेर की पूजा की जाती है। धनतेरस के दिन सोना, चांदी, बर्तन और नई वस्तुएं खरीदना शुभ माना जाता है। इस वर्ष यह तिथि 18 अक्टूबर को पड़ रही है, जो शनिवार के दिन है। समुद्र मंथन की कथा के अनुसार, इस दिन भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे, इसलिए यह दिन आरोग्य और धन की स्थिरता का प्रतीक माना गया है।


नरक चतुर्दशी या छोटी दिवाली: 19 अक्टूबर, रविवार:-

दिवाली के दूसरे दिन नरक चतुर्दशी, जिसे छोटी दिवाली भी कहा जाता है, मनाई जाती है। यह दिन भगवान कृष्ण द्वारा राक्षस नरकासुर के वध की स्मृति में मनाया जाता है, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। घरों में यमराज के नाम का दीपक दक्षिण दिशा में जलाया जाता है, जिससे अकाल मृत्यु से रक्षा का आशीर्वाद मिलता है। इस वर्ष छोटी दिवाली 19 अक्टूबर (रविवार) को मनाई जाएगी

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बड़ी दिवाली और लक्ष्मी-गणेश पूजा: 20 अक्टूबर, सोमवार:-

कार्तिक अमावस्या की रात को लक्ष्मी-गणेश पूजा का आयोजन होता है, जो दिवाली का मुख्य दिन है। इस दिन घरों में दीप जलाए जाते हैं ताकि अंधकार (अज्ञान) पर प्रकाश (ज्ञान) की विजय हो। भगवान गणेश, देवी लक्ष्मी और कुबेर देव की पूजा होती है। व्यापारी अपने बही-खाते खोलते हैं और नए कार्यों की शुरुआत करते हैं। इस वर्ष बड़ी दिवाली 20 अक्टूबर सोमवार को पड़ेगी, जो भारत सरकार की ओर से राष्ट्रीय अवकाश (Gazetted Holiday) भी घोषित है।


गोवर्धन पूजा और अन्नकूट: 22 अक्टूबर, बुधवार:-


दिवाली के चौथे दिन गोवर्धन पूजा मनाई जाती है। इसे अन्नकूट के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन भगवान कृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत उठाकर इंद्र के अभिमान को तोड़ने की कथा का स्मरण किया जाता है। भक्तगण गोबर से गोवर्धन पर्वत का प्रतीक बनाकर पूजा करते हैं और मंदिरों में विभिन्न प्रकार के अन्न का भोग लगाया जाता है। इस वर्ष गोवर्धन पूजा 22 अक्टूबर, बुधवार को मनाई जाएगी।

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