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सरकार के दबाव में Adani समूह में हुए हजारों करोड़ के निवेश? LIC पर अमेरिकी मीडिया का बड़ा हमला!

सरकार के दबाव में Adani समूह में हुए हजारों करोड़ के निवेश? LIC पर अमेरिकी मीडिया का बड़ा हमला!

Khabar Aangan Published on: 1 नवम्बर 2025
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पिछले कुछ दिनों से, भारत की सबसे बड़ी और भरोसेमंद बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) एक सनसनीखेज़ ख़बर को लेकर अंतर्राष्ट्रीय मीडिया की सुर्खियों में है। अमेरिका के प्रतिष्ठित अखबार ‘द वॉशिंगटन पोस्ट’ (The Washington Post) की एक रिपोर्ट में यह कहकर एक बड़ा भूचाल ला दिया गया कि भारतीय सरकारी अधिकारियों ने LIC पर दबाव डालकर अडानी समूह की कंपनियों में लगभग $3.9 बिलियन (भारतीय रुपये में लगभग ₹34,000 करोड़) का निवेश कराया।

यह आरोप अपने आप में बेहद गंभीर हैं क्योंकि LIC करोड़ों भारतीयों का पैसा मैनेज करती है। हालांकि, इस रिपोर्ट के छपते ही, LIC और भारत सरकार दोनों की ओर से कड़ा और त्वरित खंडन आया है।

यह खबर क्यों महत्वपूर्ण है? क्या सच में LIC के निवेश निर्णय बाहरी ताकतों से प्रभावित होते हैं? और सबसे ज़रूरी, इस पूरे विवाद का आप, LIC के एक आम पॉलिसीहोल्डर या शेयरधारक पर क्या असर पड़ेगा?

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🚨 क्या है ‘वॉशिंगटन पोस्ट’ की सनसनीखेज़ रिपोर्ट?

‘द वॉशिंगटन पोस्ट’ ने अपनी रिपोर्ट में कई दस्तावेज़ों और अज्ञात सरकारी अधिकारियों के हवाले से दावा किया कि भारतीय वित्त मंत्रालय के अधीन वित्तीय सेवा विभाग (DFS) के अधिकारियों ने मई 2025 में LIC के फंड को अडानी समूह के व्यवसायों में निर्देशित करने के लिए एक प्रस्ताव का मसौदा (Draft Proposal) तैयार किया था।

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रिपोर्ट के मुख्य आरोप:

  1. सरकारी हस्तक्षेप: रिपोर्ट में दावा किया गया कि सरकारी अधिकारियों ने LIC को अडानी समूह के बॉन्ड्स और शेयरों में निवेश करने के लिए प्रेरित किया, खासकर तब जब अडानी समूह पिछले हिंडनबर्ग संकट के बाद वैश्विक निवेशकों के बीच हिचकिचाहट का सामना कर रहा था।
  2. दस्तावेज़ों का हवाला: अखबार ने कथित तौर पर DFS के दस्तावेज़ों का ज़िक्र किया, जिसमें अडानी को ‘दूरदर्शी उद्यमी’ बताया गया और यह भी स्वीकार किया गया कि समूह की प्रतिभूतियों में निवेश ‘जोखिम भरा’ हो सकता है।
  3. ₹5,000 करोड़ का बॉन्ड निवेश: रिपोर्ट में विशेष रूप से मई 2025 में हुए अडानी पोर्ट्स एंड SEZ (APSEZ) के ₹5,000 करोड़ के बॉन्ड इश्यू का ज़िक्र किया गया, जिसे अकेले LIC ने पूरी तरह सब्सक्राइब किया था। रिपोर्ट में इस पर सवाल उठाया गया कि यह सार्वजनिक धन का दुरुपयोग हो सकता है।

यह खबर सामने आते ही भारतीय विपक्षी दलों ने सरकार पर ‘पब्लिक सेक्टर की कंपनियों’ का दुरुपयोग करके ‘एक निजी समूह’ को बचाने का आरोप लगाया, जिससे यह मुद्दा बाज़ार से निकलकर राजनीतिक गलियारों में पहुंच गया।


🛑 LIC और सरकार का आधिकारिक खंडन: ‘निराधार और सच्चाई से कोसों दूर’

वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट आने के कुछ ही घंटों के भीतर, भारतीय जीवन बीमा निगम ने एक आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। इसके बाद, भारत सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी स्पष्टीकरण जारी किया।

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