नई दिल्ली | 14 अगस्त 2026: देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पूरे राष्ट्र को संबोधित किया। अपने इस ऐतिहासिक संबोधन में उन्होंने देशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं दीं और कहा कि आजादी का वास्तविक अर्थ केवल राजनीतिक स्वतंत्रता तक सीमित नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आजादी तभी सार्थक होती है जब समाज के हर नागरिक को अपनी आकांक्षाएं पूरी करने और आगे बढ़ने का समान अवसर प्राप्त हो।
राष्ट्रपति ने अपने भाषण में देश के बहुआयामी विकास, युवाओं के उज्ज्वल भविष्य, पारदर्शी परीक्षा प्रणाली, मजबूत राष्ट्रीय सुरक्षा और साल 2047 तक भारत को एक पूर्ण विकसित राष्ट्र बनाने के राष्ट्रीय संकल्प पर विस्तार से बात की। उन्होंने देश के किसानों, वैज्ञानिकों, जवानों, डॉक्टरों, शिक्षकों और श्रमवीरों की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए कहा कि प्रत्येक नागरिक अपनी निष्ठा और कर्तव्य पालन के जरिए राष्ट्र निर्माण का असली भागीदार है।
परीक्षा प्रणाली में सुधार और युवाओं के भविष्य की चिंता
अपने संबोधन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने देश के युवाओं और हाल के दिनों में चर्चा में रहे प्रतियोगी परीक्षा प्रणाली के मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक परीक्षाएं हमारे प्रतिभाशाली छात्रों के लिए नए अवसरों और करियर के द्वार खोलती हैं। इसलिए इनमें पारदर्शिता और शुचिता बनाए रखना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।
उन्होंने देशवासियों को आश्वस्त किया कि सरकार पेपर लीक और परीक्षाओं में होने वाले अनुचित साधनों के इस्तेमाल को पूरी तरह रोकने के लिए कड़े कानूनी और तकनीकी सुधार कर रही है। इन सुधारों का मुख्य उद्देश्य देश की परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह से पारदर्शी, सुरक्षित और युवाओं के लिए विश्वसनीय बनाना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि छात्रों के भविष्य की सुरक्षा के लिए पूरा समाज और प्रशासन एक साथ खड़ा है।
राष्ट्रपति ने इस बात पर विशेष प्रसन्नता जताई कि भारत का आज का युवा केवल नौकरी मांगने वाला नहीं, बल्कि अपनी प्रतिभा और स्टार्ट-अप्स के दम पर नौकरी देने वाला बन रहा है। देश का युवा वर्ग अब नए प्रयोगों, इनोवेशन और डिजिटल क्रांति का नेतृत्व कर रहा है, जो भारत के आर्थिक रूपांतरण की सबसे बड़ी ताकत है।
राष्ट्रीय सुरक्षा, आतंकवाद पर करारा प्रहार और सिंधु जल संधि
सशस्त्र बलों का जिक्र करते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने देश की सीमाओं की रक्षा में मुस्तैद जवानों, नौसेना और वायुसेना के अदम्य साहस और सर्वस्व समर्पण को नमन किया। उन्होंने कहा कि भारत अपनी संप्रभुता और सुरक्षा से किसी भी कीमत पर कोई समझौता नहीं करेगा। हमारी सेनाएं हर तरह की आंतरिक और बाहरी चुनौती से निपटने के लिए चौबीसों घंटे पूरी तरह तैयार हैं।
उन्होंने हालिया ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का उल्लेख करते हुए कहा कि इस कार्रवाई ने यह साबित कर दिया है कि भारतीय सेनाएं सीमा पार सक्रिय आतंकवादी नेटवर्क के खिलाफ सटीक, कठोर और निर्णायक कार्रवाई करने में सक्षम हैं। राष्ट्रपति ने कड़े शब्दों में संदेश दिया कि आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले और उन्हें पनाह देने वाले तत्वों को भारी कीमत चुकानी ही पड़ेगी, चाहे वे किसी भी कोने में क्यों न छिपे हों।
इसके साथ ही, सीमा पार से होने वाले प्रायोजित आतंकवाद के जवाब में सिंधु जल संधि को स्थगित किए जाने के निर्णय को उन्होंने राष्ट्रीय हित में लिया गया एक दूरदर्शी कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह फैसला विशेष रूप से भारत के किसानों के हक की रक्षा करने और देश के जल संसाधनों का सही उपयोग सुनिश्चित करने की दिशा में ऐतिहासिक सिद्ध होगा।
सुलभ न्याय, किसानों का सशक्तीकरण और पर्यावरण संरक्षण
देश की न्यायिक व्यवस्था पर चर्चा करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि न्यायपालिका से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति का यह प्राथमिक दायित्व है कि पैसों या साधनों के अभाव में देश का कोई भी गरीब नागरिक न्याय से वंचित न रहे। उन्होंने न्याय प्रक्रिया को सरल, सुलभ और आम भाषा में उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर बल दिया ताकि हर व्यक्ति को त्वरित न्याय मिल सके।
उन्होंने देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ कहे जाने वाले अन्नदाता किसानों की अनथक मेहनत की सराहना की। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र का तकनीकी सशक्तीकरण और फसलों का उचित मूल्य सुनिश्चित करना ही ग्रामीण भारत की खुशहाली और देश की खाद्यान्न सुरक्षा की असली नींव है। सरकार किसानों को आधुनिक तकनीक और टिकाऊ खेती से जोड़ने के लिए लगातार काम कर रही है।
पर्यावरण संरक्षण के विषय पर राष्ट्रपति ने कहा कि तीव्र आर्थिक प्रगति के साथ-साथ प्रकृति के संतुलन को बनाए रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। जलवायु परिवर्तन की वैश्विक चुनौती से निपटने के लिए भारत ने अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति की है। उन्होंने नागरिकों से आह्वान किया कि वे भावी पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए अपनी जीवनशैली में पर्यावरण अनुकूल आदतों को शामिल करें।
‘विकसित भारत 2047’ के संकल्प की ओर बढ़ते कदम
संबोधन के समापन चरण में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पूर्ण विश्वास व्यक्त किया कि 140 करोड़ देशवासियों के अटूट संकल्प और सामूहिक प्रयास से भारत बहुत जल्द एक समृद्ध, स्वावलंबी और शक्तिशाली राष्ट्र के रूप में स्थापित होगा। उन्होंने कहा कि आज वैश्विक मंचों पर भारत की साख, कूटनीतिक प्रभाव और आर्थिक साख में ऐतिहासिक वृद्धि हुई है।
उन्होंने दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में रह रहे प्रवासी भारतीयों और भारतीय राजनयिकों के योगदान की भी सराहना की, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का मान बढ़ा रहे हैं। राष्ट्रपति ने अंत में सभी नागरिकों से आग्रह किया कि वे संविधान में उल्लेखित अपने मौलिक कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक पालन करें और साल 2047 में आजादी के शताब्दी वर्ष तक भारत को एक पूर्ण विकसित राष्ट्र बनाने के सपने को साकार करने के लिए समर्पित रहें।
sclaimer: ‘खबर आंगन’ पर प्रकाशित यह रिपोर्ट राष्ट्रपति भवन द्वारा जारी आधिकारिक संबोधन, दूरदर्शन समाचार और आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के तथ्यों पर आधारित है।
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