नई दिल्ली, 28 सितंबर 2026। देशभर में 28 सितंबर से प्रस्तावित तीन दिवसीय बैंक हड़ताल फिलहाल टल गई है। United Forum of Bank Unions (UFBU) और Indian Banks’ Association (IBA) के बीच रविवार रात हुई अहम बैठक के बाद यूनियनों ने हड़ताल और प्रस्तावित विरोध-प्रदर्शन वापस लेने का फैसला किया। हड़ताल शुरू होने से कुछ घंटे पहले हुए इस घटनाक्रम से बैंक ग्राहकों को बड़ी राहत मिली है।
रविवार रात करीब 9:30 बजे हुई बैठक में सभी शनिवार को बैंक अवकाश घोषित करने की मांग पर IBA और UFBU की संयुक्त समिति बनाने पर सहमति बनी। यह समिति इस मुद्दे के विभिन्न विकल्पों पर विचार करेगी और संबंधित पक्षों से चर्चा के बाद आगे का रास्ता तलाशेगी। समिति के विचार में ग्राहकों पर पड़ने वाले प्रभाव को भी शामिल किया जाएगा।
बैठक में Scale IV और उससे ऊपर के अधिकारियों के Performance Linked Incentive (PLI) scheme में बदलाव को लेकर भी बातचीत शुरू करने पर सहमति बनी। इसके अलावा 8 मार्च 2024 के बैठक विवरण में दर्ज अन्य लंबित मुद्दों पर भी आगे चर्चा कर उन्हें जल्द सुलझाने की बात कही गई है। इन सहमतियों के बाद UFBU ने फिलहाल अपनी प्रस्तावित हड़ताल और विरोध कार्यक्रम स्थगित कर दिए।
इससे पहले 28 से 30 सितंबर तक प्रस्तावित हड़ताल में करीब 8 लाख बैंक अधिकारी और कर्मचारियों के शामिल होने की संभावना थी। इसका असर देशभर की 1.81 लाख से अधिक बैंक शाखाओं पर पड़ सकता था। हड़ताल का प्रमुख मुद्दा सभी बैंकों में पांच दिन की बैंकिंग व्यवस्था लागू करना था, जबकि PLI scheme में बदलाव भी यूनियनों की प्रमुख मांगों में शामिल था।
पांच दिन की बैंकिंग को लेकर मार्च 2024 में IBA ने सैद्धांतिक रूप से सभी शनिवार को बैंक अवकाश रखने पर सहमति जताई थी। इसके बदले सोमवार से शुक्रवार तक कर्मचारियों के दैनिक कामकाज के समय में करीब 40 मिनट की बढ़ोतरी का प्रस्ताव था। यूनियनों का कहना है कि यह प्रस्ताव सरकार की मंजूरी के लिए भेजे जाने के बावजूद अब तक आगे नहीं बढ़ा है।
PLI scheme को लेकर भी बैंक यूनियनों ने आपत्ति जताई थी। NDTV की रिपोर्ट के अनुसार, Scale IV और उससे ऊपर के अधिकारियों के लिए प्रदर्शन के आधार पर अधिकतम 365 दिन के मूल वेतन तक प्रोत्साहन का प्रावधान है, जबकि Scale III तक के कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए अधिकतम 15 दिन के मूल वेतन के साथ महंगाई भत्ते का प्रावधान बताया गया है। यूनियनों ने इस व्यवस्था को लेकर अलग-अलग स्तर के कर्मचारियों के बीच असमानता का मुद्दा उठाया है।
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