मुंबई, 13 सितंबर 2026: टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी Tata Sons के शेयर बाजार में आने की राह अब और साफ होती दिख रही है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने Tata Sons की Core Investment Company के रूप में अपना पंजीकरण सरेंडर करने की अर्जी खारिज कर दी है। इसके साथ कंपनी के लिए Upper Layer NBFC से जुड़े नियमों का पालन करना जरूरी होगा, जिसमें शेयर बाजार में लिस्टिंग की शर्त भी शामिल है।
यह मामला इसलिए अहम है क्योंकि Tata Sons लंबे समय से निजी कंपनी बनी हुई है और उसने लिस्टिंग की बाध्यता से बाहर निकलने के लिए मार्च 2024 में RBI के पास अपना NBFC पंजीकरण समाप्त करने का आवेदन दिया था। अब RBI के फैसले ने उस रास्ते को बंद कर दिया है। हालांकि, Tata Sons का IPO कब आएगा, इसकी तारीख अभी तय नहीं हुई है।
RBI के फैसले से क्या बदला
RBI ने Tata Sons को Upper Layer NBFC के रूप में वर्गीकृत किया था। RBI के Scale Based Regulation के तहत Upper Layer में रखी गई NBFC को अनिवार्य रूप से सूचीबद्ध होना होता है। RBI के आधिकारिक नियमों में NBFC-UL के लिए पहचान के तीन साल के भीतर लिस्टिंग की व्यवस्था दी गई है।
RBI की 2024-25 की आधिकारिक सूची में भी Tata Sons Private Limited को Core Investment Company के रूप में Upper Layer NBFC में शामिल किया गया था। उस समय RBI ने यह भी कहा था कि कंपनी का Upper Layer में शामिल होना उसके डी-रजिस्ट्रेशन आवेदन के नतीजे के अधीन है।
अब 11 सितंबर 2026 को लिखे पत्र के जरिए RBI ने Tata Sons की स्वैच्छिक डी-रजिस्ट्रेशन की मांग स्वीकार नहीं की। इसके बाद कंपनी को Upper Layer NBFC पर लागू नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई करनी होगी।
Tata Sons ने आखिर NBFC पंजीकरण क्यों छोड़ना चाहा था
Tata Sons ने मार्च 2024 में RBI से अपना Core Investment Company पंजीकरण सरेंडर करने की मांग की थी। इसका सीधा संबंध उस नियामकीय व्यवस्था से था जिसके तहत Upper Layer NBFC के लिए शेयर बाजार में लिस्टिंग जरूरी है।
रिपोर्टों के अनुसार कंपनी ने 2024 में ₹21,000 करोड़ से अधिक का कर्ज चुकाया और खुद को कर्ज-मुक्त बनाया। इसके बाद NBFC ढांचे से बाहर निकलने की कोशिश की गई थी, ताकि कंपनी निजी रूप में बनी रह सके। RBI ने इस आवेदन पर लंबे समय तक विचार जारी रखा और इस बीच Tata Sons को Upper Layer की सूचियों में शामिल रखा।
अब IPO को लेकर क्यों बढ़ी हलचल
RBI के ताजा फैसले के बाद Tata Sons के सार्वजनिक होने की संभावना काफी मजबूत हो गई है। कंपनी की होल्डिंग में Tata Consultancy Services, Tata Motors, Tata Steel और Air India जैसे समूह के बड़े कारोबार शामिल हैं। इसलिए Tata Sons की लिस्टिंग केवल एक सामान्य IPO नहीं होगी, बल्कि इससे पूरे Tata Group की होल्डिंग संरचना और निवेशकों की नजर में कंपनी के मूल्यांकन पर असर पड़ सकता है।
हालांकि, यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है। RBI का फैसला Tata Sons के लिए लिस्टिंग की नियामकीय बाध्यता को मजबूत करता है, लेकिन इससे यह तय नहीं होता कि IPO किस तारीख को आएगा या उसका आकार कितना होगा। अभी कंपनी की ओर से IPO की अंतिम तारीख, शेयरों की संख्या या इश्यू प्राइस जैसी कोई आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है।
Tata Trusts और Shapoorji Pallonji की अलग-अलग राय
Tata Sons की संभावित लिस्टिंग का असर उसके बड़े शेयरधारकों पर भी पड़ेगा। Tata Trusts के पास कंपनी में करीब 66 प्रतिशत हिस्सेदारी है और रिपोर्टों के अनुसार ट्रस्ट्स निजी ढांचे को बनाए रखने के पक्ष में रहे हैं। दूसरी ओर Shapoorji Pallonji Group के पास लगभग 18 प्रतिशत हिस्सेदारी है और वह लिस्टिंग के पक्ष में रहा है।
Shapoorji Pallonji Group के लिए Tata Sons की लिस्टिंग अपनी हिस्सेदारी के मूल्य को बाजार के सामने लाने का रास्ता खोल सकती है। वहीं Tata Trusts के लिए मामला केवल शेयर मूल्य का नहीं, बल्कि Tata Sons की मौजूदा संरचना और समूह पर नियंत्रण से भी जुड़ा हुआ है।
Tata Sons के सामने अब आगे क्या
RBI के फैसले के बाद Tata Sons के सामने अब Upper Layer NBFC से जुड़े नियामकीय निर्देशों के अनुपालन का रास्ता है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक कंपनी का बोर्ड 17 सितंबर को RBI के फैसले पर चर्चा कर सकता है। कंपनी की ओर से इस घटनाक्रम पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं थी।
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा असर यही है कि Tata Sons के दशकों पुराने निजी ढांचे पर अब नियामकीय दबाव काफी बढ़ गया है। आने वाले समय में कंपनी किस तरीके से लिस्टिंग की प्रक्रिया आगे बढ़ाती है, यही इस कहानी का अगला बड़ा अध्याय होगा।
Disclaimer – यह खबर RBI के फैसले और उपलब्ध विश्वसनीय रिपोर्टों के आधार पर तैयार की गई है। Tata Sons के IPO की तारीख, आकार, मूल्यांकन या इश्यू प्राइस को लेकर अभी कोई अंतिम आधिकारिक घोषणा उपलब्ध नहीं है। जहां लिस्टिंग को लेकर भविष्य की स्थिति का उल्लेख है, उसे नियामकीय घटनाक्रम के संदर्भ में प्रस्तुत किया गया है।
- मुकेश अंबानी ने फिर अपनाया ₹10 वाला दांव, आइसक्रीम बाजार में Bombay Creamery से मचेगी हलचल
- सोना 3 लाख और चांदी 6 लाख तक पहुंचेगी? रॉबर्ट कियोसाकी के दावे से मची हलचल
- भारतीय दवा कंपनियों पर गिरेगी बड़ी गाज? ट्रंप ने लगाया 100% फार्मा टैरिफ, जानिए भारत पर इसका पूरा असर
- Robin Liu का इस्तीफा, क्या OnePlus India का कारोबार समेटने की चल रही है तैयारी?
आपका छोटा सा सहयोग हमारी पत्रकारिता को नई मजबूती देता है।



