करीब 600 किलोग्राम (1,323 पाउंड) वजनी यह भारी-भरकम अंतरिक्ष यान पिछले लगभग 14 सालों से पृथ्वी की कक्षा में लगातार चक्कर लगा रहा था। लेकिन अब इसका ईंधन और नियंत्रण पूरी तरह से खत्म हो चुका है।
दुनिया भर की रडार प्रणालियां इस बात की पुष्टि कर चुकी हैं कि यह सैटेलाइट अब किसी भी वक्त पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश कर सकता है। इस खबर के बाद से लोगों के मन में कई तरह के डरावने सवाल उठ रहे हैं।
इसे इसके जुड़वां सैटेलाइट ‘वैन एलेन प्रोब बी’ के साथ एक बेहद ही खास और जटिल मिशन पर भेजा गया था। इस मिशन का मुख्य उद्देश्य पृथ्वी के चारों ओर मौजूद खतरनाक ‘रेडिएशन बेल्ट’ (Radiation Belts) का गहराई से अध्ययन करना था।
मूल रूप से इस यान को सिर्फ 2 साल के लिए डिजाइन किया गया था, लेकिन इसने पूरे 7 साल तक शानदार काम किया। इस सैटेलाइट ने अंतरिक्ष के मौसम और सौर तूफानों के बारे में कई अहम जानकारियां वैज्ञानिकों तक पहुंचाई थीं।
2034 में गिरना था, तो अब 8 साल पहले क्यों?
वैज्ञानिकों और खगोलविदों के मूल अनुमान के अनुसार, इस NASA Satellite को साल 2034 तक अंतरिक्ष की कक्षा में ही सुरक्षित बने रहना था। इसे साल 2019 में ईंधन खत्म होने के बाद हमेशा के लिए डिएक्टिवेट (Deactivate) कर दिया गया था।
लेकिन पिछले कुछ समय में हमारे सूर्य की गतिविधियां (Solar Activity) अचानक बहुत ज्यादा और अप्रत्याशित रूप से बढ़ गई हैं। इस ‘सोलर मैक्सिमम’ (Solar Maximum) के कारण पृथ्वी का ऊपरी वायुमंडल थोड़ा ज्यादा फैल गया है।
वायुमंडल के इस फैलाव की वजह से इस निष्क्रिय सैटेलाइट पर गुरुत्वाकर्षण का दबाव और खिंचाव (Atmospheric Drag) कई गुना बढ़ गया। इसी भारी खिंचाव ने इसे अनुमानित समय से 8 साल पहले ही धरती की ओर खींच लिया।
क्या धरती पर मौजूद इंसानों को है कोई खतरा?
600 किलो के इस विशाल NASA Satellite के क्रैश होने की खबर से सोशल मीडिया पर आम लोगों में काफी दहशत का माहौल है। लेकिन नासा और अमेरिकी ‘स्पेस फोर्स’ (US Space Force) ने लोगों को पूरी तरह से आश्वस्त किया है।
स्पेस फोर्स के विशेषज्ञों के मुताबिक, जैसे ही यह सैटेलाइट भारी गति के साथ पृथ्वी के वायुमंडल (Atmosphere) में प्रवेश करेगा, हवा के भयंकर घर्षण के कारण इसका तापमान 1500 डिग्री सेल्सियस के पार चला जाएगा।
इतनी भयंकर और जानलेवा गर्मी में इस अंतरिक्ष यान का 90 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा हवा में ही जलकर पूरी तरह राख हो जाएगा। इसलिए धरती की सतह तक इसका कोई बड़ा मलबा पहुंचने की संभावना बहुत ही कम है।
समंदर में गिरेगा बचा हुआ धातु का मलबा!
नासा के वैज्ञानिकों का साफ तौर पर अनुमान है कि इस NASA Satellite के कुछ बेहद मजबूत और छोटे टाइटेनियम या धातु वाले हिस्से ही जलने से बच पाएंगे। लेकिन इन टुकड़ों से किसी इंसान को चोट पहुंचने की संभावना मात्र 0.02 प्रतिशत (4,200 में 1) है।
चूंकि हमारी पृथ्वी का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा विशाल महासागरों और अथाह पानी से ढका हुआ है, इसलिए यदि कोई मलबा धरती तक पहुंचता भी है, तो वह किसी आबादी वाले इलाके की बजाय सीधे गहरे समुद्र में ही गिरेगा।
इसके जुड़वां भाई ‘प्रोब बी’ की बात करें तो उसकी स्थिति अभी स्थिर है। नासा के अनुसार वह सैटेलाइट साल 2030 के बाद ही धरती के वायुमंडल में वापस लौटेगा।
क्या है स्पेस जंक और यह क्यों है खतरनाक?
आज के समय में पृथ्वी की निचली कक्षा (Low Earth Orbit) में हजारों की संख्या में एक्टिव और डेड सैटेलाइट्स मौजूद हैं। जब कोई सैटेलाइट काम करना बंद कर देता है, तो वह अंतरिक्ष का कचरा यानी ‘स्पेस जंक’ (Space Junk) बन जाता है।
यह मलबा 27,000 किलोमीटर प्रति घंटे से भी ज्यादा की रफ्तार से पृथ्वी का चक्कर लगाता है। इस भयंकर रफ्तार पर चने के दाने के बराबर का एक छोटा सा टुकड़ा भी किसी चालू सैटेलाइट या इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) को तबाह कर सकता है।
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इसलिए वैज्ञानिक लगातार इस बात पर जोर दे रहे हैं कि अंतरिक्ष को कचरा मुक्त बनाने के लिए कड़े अंतरराष्ट्रीय नियम बनाए जाएं, ताकि भविष्य के अंतरिक्ष मिशन पूरी तरह से सुरक्षित रह सकें।
हमारा निष्कर्ष
अंतरिक्ष में घूम रहे पुराने और निष्क्रिय सैटेलाइट्स का इस तरह धरती पर गिरना अब एक आम खगोलीय घटना बनती जा रही है। ‘खबर आंगन’ की साइंस डेस्क का यह स्पष्ट और वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित मानना है कि इस NASA Satellite के क्रैश होने से आम जनता को घबराने या पैनिक करने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं है।
अमेरिकी रक्षा विभाग और दुनिया भर की स्पेस एजेंसियां इस सैटेलाइट की पल-पल की ट्रैकिंग कर रही हैं। हमारे पृथ्वी का वायुमंडल एक बहुत ही मजबूत सुरक्षा कवच है, जो हमें ऐसे हजारों उल्कापिंडों और अंतरिक्ष मलबे से हर रोज बचाता है।
हालांकि, इस घटना से हमें यह जरूर समझना चाहिए कि अंतरिक्ष में लगातार बढ़ रहा ‘स्पेस जंक’ मानव जाति के भविष्य के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है। आने वाले समय में दुनिया भर की बड़ी स्पेस एजेंसियों को इन पुराने सैटेलाइट्स को सुरक्षित तरीके से नष्ट करने की कोई ठोस तकनीक जल्द से जल्द विकसित करनी होगी।