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वृंदावन से कलयुग के लिए कड़ा संदेश, ‘डिप्रेशन’ पर Premanand Ji Maharaj का वीडियो हुआ वायरल

वृंदावन के संत Premanand Ji Maharaj ने युवाओं को डिप्रेशन से बचने का दिया वैज्ञानिक मंत्र। जानिए उनके स्वास्थ्य और दिनचर्या का ताजा अपडेट और वायरल वीडियो का सच।
Khabar Aangan Published on: 14 दिसम्बर 2025
वृंदावन से कलयुग के लिए कड़ा संदेश, ‘डिप्रेशन’ पर Premanand Ji Maharaj का वीडियो हुआ वायरल
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वृंदावन, 14 दिसंबर: आध्यात्मिक जगत में अपनी तपस्या और ओजस्वी वाणी के लिए विख्यात संत Premanand Ji Maharaj इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा का केंद्र बने हुए हैं। वृंदावन स्थित उनके आश्रम से हाल ही में जारी एक वीडियो ने देश भर के युवाओं और बुद्धिजीवियों का ध्यान अपनी ओर खींचा है।

इस वीडियो में महाराज जी ने आधुनिक जीवनशैली से उपज रहे ‘डिप्रेशन’ और ‘मानसिक अशांति’ पर ऐसा अचूक उपाय बताया है, जिसे मनोविज्ञान के जानकार भी स्वीकार कर रहे हैं।

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वायरल वीडियो में युवाओं को दी नसीहत

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे ताजा वीडियो में Premanand Ji Maharaj अत्यंत गंभीर मुद्रा में दिखाई दे रहे हैं। यह वीडियो उनके ‘एकांतिक वार्तालाप’ सत्र का है, जिसमें वे आईआईटी और मेडिकल की तैयारी कर रहे छात्रों के प्रश्नों का उत्तर दे रहे थे। छात्रों की मुख्य समस्या ‘प्रतिस्पर्धा का तनाव’ और ‘असफलता का डर’ थी।

इस पर महाराज जी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आज का युवा अपनी क्षमता से अधिक अपेक्षाएं पाल लेता है। उन्होंने कहा, “सफलता का पैमाना केवल पैसा या पद नहीं हो सकता। जब तक तुम अपनी आंतरिक शांति को दांव पर लगाकर बाहरी सफलता के पीछे भागोगे, डिप्रेशन तुम्हारा पीछा नहीं छोड़ेगा।”

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कलयुग में ‘नाम जप’ ही एकमात्र सहारा

महाराज जी ने अपने प्रवचन में जोर देकर कहा कि कलयुग में मन को स्थिर रखने का सबसे वैज्ञानिक और सुलभ तरीका ‘नाम जप’ है। उन्होंने दावा किया कि यदि कोई व्यक्ति प्रतिदिन नियम से केवल 15 मिनट भी राधा नाम का जप करता है, तो उसके मस्तिष्क की तरंगे शांत होने लगती हैं।

उनके इस दावे का समर्थन कई न्यूरोलॉजिस्ट भी करते नजर आते हैं, जो मानते हैं कि मेडिटेशन और मंत्र जप से दिमाग में सेरोटोनिन का स्तर बढ़ता है। Premanand Ji Maharaj की यह वैज्ञानिक सोच ही उन्हें आज के पढ़े-लिखे युवाओं का आदर्श बनाती है।

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स्वास्थ्य अपडेट: मेडिकल साइंस के लिए एक चुनौती

लाखों भक्तों के मन में अक्सर यह प्रश्न उठता है कि Premanand Ji Maharaj का स्वास्थ्य अभी कैसा है। ताज़ा रिपोर्ट्स के अनुसार, महाराज जी की दोनों किडनी पिछले करीब 17-18 वर्षों से पूरी तरह काम नहीं कर रही हैं। वे नियमित डायलिसिस पर जीवन व्यतीत कर रहे हैं।

चिकित्सकों का कहना है कि डायलिसिस पर रहने वाला मरीज अक्सर कमजोरी महसूस करता है, लेकिन महाराज जी के मामले में यह उल्टा है। वे प्रतिदिन 10 से 12 घंटे सक्रिय रहते हैं, भक्तों से मिलते हैं और सत्संग करते हैं। उनकी यह ऊर्जा और चेहरे का तेज मेडिकल साइंस के लिए एक अनसुलझी पहेली बना हुआ है।

ब्रह्म मुहूर्त में परिक्रमा का कठोर नियम

वृंदावन की कड़ाके की ठंड हो या भीषण गर्मी, Premanand Ji Maharaj की दिनचर्या में रत्ती भर भी बदलाव नहीं आता। वे हर रात 2 बजे उठकर अपनी कुटिया से निकलते हैं और बांके बिहारी की गलियों में परिक्रमा करते हैं।

हैरानी की बात यह है कि इतनी गंभीर बीमारी के बावजूद वे व्हीलचेयर का उपयोग करने के बजाय पैदल चलना पसंद करते हैं। भक्त बताते हैं कि रात के अंधेरे में भी महाराज जी के दर्शन के लिए हजारों लोग सड़कों के किनारे खड़े रहते हैं। उनका यह अनुशासन ही उनकी सबसे बड़ी शक्ति है।

सेलिब्रिटीज का वृंदावन की ओर रुख

पिछले कुछ समय में विराट कोहली, अनुष्का शर्मा, हेमा मालिनी और कई बड़े राजनेता Premanand Ji Maharaj का आशीर्वाद लेने वृंदावन पहुंच चुके हैं। इन हस्तियों के आने से सोशल मीडिया पर महाराज जी की रीच (Reach) और भी बढ़ गई है।

हालांकि, महाराज जी किसी भी वीआईपी (VIP) ट्रीटमेंट के सख्त खिलाफ हैं। उनके दरबार में एक आम रिक्शा चालक और एक करोड़पति बिजनेसमैन एक समान जमीन पर बैठते हैं। यह समानता का भाव ही उन्हें ‘जन-जन का संत’ बनाता है।

नशा मुक्ति का चलाया महाअभियान

Premanand Ji Maharaj का प्रभाव केवल अध्यात्म तक सीमित नहीं है, बल्कि वे समाज सुधार के कार्यों में भी अग्रणी हैं। उन्होंने अपने सत्संगों के माध्यम से युवाओं को नशा छोड़ने की शपथ दिलाई है। उनके वीडियो देखकर हजारों युवाओं ने शराब और धूम्रपान का त्याग किया है।

महाराज जी कहते हैं, “जवानी देश और धर्म की रक्षा के लिए है, इसे धुएं और नशे में उड़ाना सबसे बड़ा पाप है।” उनके इस संदेश का व्यापक असर पश्चिमी उत्तर प्रदेश और दिल्ली-एनसीआर के युवाओं पर देखने को मिल रहा है।

एकांतिक वार्तालाप: समस्याओं का सीधा समाधान

महाराज जी की लोकप्रियता का एक बड़ा आधार उनका ‘एकांतिक वार्तालाप’ कार्यक्रम है। इसमें चुने हुए 10-15 लोगों को उनसे आमने-सामने बात करने का मौका मिलता है। यहाँ पूछे जाने वाले प्रश्न बेहद व्यक्तिगत और व्यावहारिक होते हैं।

जैसे— “गुस्से पर काबू कैसे पाएं?”, “सास-बहू के झगड़े कैसे सुलझाएं?”, या “व्यापार में घाटा हो रहा है तो क्या करें?” महाराज जी इन जटिल प्रश्नों का उत्तर इतनी सरलता से देते हैं कि व्यक्ति को तुरंत समाधान मिल जाता है।

सोशल मीडिया पर करोड़ों का साम्राज्य

बिना किसी पीआर (PR) एजेंसी या मार्केटिंग टीम के, Premanand Ji Maharaj आज इंटरनेट के सबसे बड़े स्टार बन चुके हैं। इंस्टाग्राम पर उनके फैन पेजों की संख्या हजारों में है और उनके प्रवचनों की क्लिप्स व्हाट्सएप स्टेटस के रूप में हर दूसरे फोन में देखी जा सकती हैं।

डिजिटल एक्सपर्ट्स का मानना है कि उनका कंटेंट ‘ऑर्गेनिक’ है, यानी लोग उसे खुद पसंद कर रहे हैं और शेयर कर रहे हैं। उनकी भाषा हिंदी और ब्रज मिश्रित है, जो सीधे दिल में उतरती है।

वृंदावन की अर्थव्यवस्था को मिली गति

आध्यात्मिक पर्यटन के बढ़ने से वृंदावन की स्थानीय अर्थव्यवस्था में भारी उछाल आया है। Premanand Ji Maharaj के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं के कारण होटलों, धर्मशालाओं और छोटे दुकानदारों की आय बढ़ी है।

हालांकि, वीकेंड पर भारी भीड़ के कारण प्रशासन को ट्रैफिक डायवर्जन जैसे कड़े कदम उठाने पड़ते हैं। पुलिस प्रशासन ने आश्रम के आसपास सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद कर दी है ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके।

आलोचनाओं पर महाराज जी का रुख

समाज में जब कोई व्यक्ति ऊंचाई पर पहुंचता है, तो आलोचना स्वाभाविक है। कुछ लोग Premanand Ji Maharaj के बयानों को रूढ़िवादी बताते हैं। लेकिन महाराज जी इन आलोचनाओं का उत्तर कभी कड़वाहट से नहीं देते।

वे कहते हैं, “हमारा काम सत्य का आईना दिखाना है। जिसे अपना चेहरा पसंद न आए, वह आईना तोड़ दे, इससे सत्य नहीं बदलता।” उनकी यह निर्भीकता ही भक्तों के विश्वास को और गहरा करती है।

राधा रानी के प्रति अटूट निष्ठा

Premanand Ji Maharaj का पूरा जीवन ‘श्री जी’ यानी राधारानी के चरणों में समर्पित है। वे अपने हर प्रवचन की शुरुआत और अंत राधारानी के जयकारे से करते हैं। उनका मानना है कि वृंदावन का हर कण रसमय है और यहाँ आने वाला हर व्यक्ति राधारानी की कृपा का पात्र है।

भक्तों का अनुभव है कि महाराज जी की दृष्टि मात्र से उनके कष्ट दूर हो जाते हैं। इसे अंधविश्वास कहा जा सकता है, लेकिन मनोविज्ञान इसे ‘प्लासीबो इफेक्ट’ और ‘आस्था की शक्ति’ के रूप में देखता है।

भविष्य की राह और संदेश

आने वाले दिनों में आश्रम द्वारा कई बड़े सेवा प्रकल्प शुरू किए जाने की योजना है। इनमें गरीबों के लिए मुफ्त भोजन और चिकित्सा सुविधा शामिल है। Premanand Ji Maharaj का विजन स्पष्ट है—एक ऐसा समाज जहां धर्म केवल कर्मकांड न होकर जीवन जीने की कला हो।

14 दिसंबर के अपने संदेश में उन्होंने सभी देशवासियों से अपील की है कि वे अपनी सनातन संस्कृति को पहचानें। उन्होंने कहा, “पेड़ अपनी जड़ों से कटकर कभी हरा-भरा नहीं रह सकता, वैसे ही मनुष्य अपनी संस्कृति से कटकर कभी सुखी नहीं हो सकता।”

निष्कर्ष: उम्मीद की एक किरण

घोर कलयुग और नैतिक पतन के इस दौर में Premanand Ji Maharaj उम्मीद की एक किरण बनकर उभरे हैं। एक डायलिसिस मरीज का इतनी दृढ़ता से समाज का मार्गदर्शन करना किसी चमत्कार से कम नहीं है।

वे हमें सिखाते हैं कि शरीर की व्याधियां मन के हौसले को नहीं तोड़ सकतीं। उनकी शिक्षाएं आज के भटके हुए समाज के लिए एक प्रकाश स्तंभ का कार्य कर रही हैं। यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगा कि वे वर्तमान समय के सबसे क्रांतिकारी संतों में से एक हैं।

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