“महंगाई पर भारी पड़ी आस्था, धनतेरस 2025 पर रिकार्ड कारोबार और निवेश का उबाल”
जब महंगाई ने जेबें हल्की कर दीं, तब आस्था ने बाज़ार भर दिया। धनतेरस 2025 पर रिकॉर्ड खरीदारी ने दिखाया कि विश्वास और निवेश का रिश्ता कितना गहरा है।
जब महंगाई ने जेबें हल्की कर दीं, तब आस्था ने बाज़ार भर दिया। धनतेरस 2025 पर रिकॉर्ड खरीदारी ने दिखाया कि विश्वास और निवेश का रिश्ता कितना गहरा है।
दरभंगा की गौशाला में सब कुछ ठीक नहीं है—जहां गायों की सेवा होनी चाहिए थी, वहां बना है भ्रष्टाचार का किला। शंकराचार्य जी की यात्रा ने खोली ऐसी परतें, जिन्हें जानकर आप भी कहेंगे: “ये कैसे होने दिया?” पढ़िए एक रिपोर्ट जो आस्था, सत्ता और सच्चाई के टकराव की कहानी कहती है ।
भोजपुरी सिनेमा के सुपरस्टार खेसारी लाल यादव ने बिहार की राजनीति में एक नाटकीय मोड़ के साथ प्रवेश किया है। पहले अपनी पत्नी चंदा देवी को छपरा से राजद उम्मीदवार बनाने की घोषणा और फिर अंतिम समय में “तकनीकी खामी” के कारण खुद मैदान में उतरने का फैसला, यह तेजस्वी यादव का एक बड़ा रणनीतिक दांव माना जा रहा है। यह लेख खेसारी के इस कदम के पीछे की राजनीति, राजद की भाजपा के सेलिब्रिटी चेहरों के खिलाफ जवाबी कार्रवाई और बिहार चुनाव पर इसके गहरे प्रभावों का विश्लेषण करता है।
Mithila University (LNMU), दरभंगा, जो कभी बिहार का शैक्षिक गौरव थी, आज गंदगी और अनुशासनहीनता से जूझ रही है। छात्रों और कर्मचारियों की मांग है कि प्रशासन तुरंत कार्रवाई करे और परिसर को स्वच्छ बनाए।
Darbhanga (16-10-2025) बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है, और दरभंगा विधानसभा क्षेत्र इस बार राजनीतिक उफान का केंद्र बन रहा है। इसका सबसे बड़ा कारण है जनसुराज पार्टी के उम्मीदवार आरके मिश्रा, जो युवाओं के बीच अपार समर्थन हासिल कर रहे हैं। एक पूर्व आईपीएस अधिकारी के रूप में अपनी … Read more
छठ पूजा 2025 बिहार का सबसे भव्य और आध्यात्मिक महापर्व है, जो सूर्य और छठी मइया की आराधना का प्रतीक है। गंगा तट पर सूर्य को अर्घ्य, भोजपुरी लोकगीत, और ठेकुआ प्रसाद के साथ यह त्योहार बिहारी संस्कृति की सादगी और एकता को दर्शाता है। जानें छठ पूजा की तिथियां, रीति-रिवाज, और बिहार की सांस्कृतिक विरासत के बारे में। (शब्द: 60, कीवर्ड: छठ पूजा 2025, बिहारी संस्कृति, सूर्य अर्घ्य)
“धनतेरस 2025 में कब है पूजा का शुभ मुहूर्त? जानिए खरीदारी की परंपराएं, पूजा विधि और इस दिन के पीछे की पौराणिक मान्यताएं—सब कुछ एक जगह पर।”