Suchna Se Sacchai Tak
ADVERTISEMENT

IN FOCUS

Advertisement
  1. Home
  2. States
  3. Bihar News
  4. Darbhanga News: Mithila University की शर्मनाक हालत: शानदार इंफ्रास्ट्रक्चर पर गंदगी का कब्जा, पान-गुटखे ने किया बंटाधार!

Darbhanga News: Mithila University की शर्मनाक हालत: शानदार इंफ्रास्ट्रक्चर पर गंदगी का कब्जा, पान-गुटखे ने किया बंटाधार!

Mithila University (LNMU), दरभंगा, जो कभी बिहार का शैक्षिक गौरव थी, आज गंदगी और अनुशासनहीनता से जूझ रही है। छात्रों और कर्मचारियों की मांग है कि प्रशासन तुरंत कार्रवाई करे और परिसर को स्वच्छ बनाए।
Khabar Aangan Thursday, 16 October 2025, 08:42 PM
Darbhanga News: Mithila University की शर्मनाक हालत: शानदार इंफ्रास्ट्रक्चर पर गंदगी का कब्जा, पान-गुटखे ने किया बंटाधार!
News Reader
मिथिला यूनिवर्सिटी की दुर्दशा आज हर उस छात्र और शिक्षक के लिए शर्मिंदगी का सबब बन चुकी है, जो इस ऐतिहासिक संस्थान से जुड़ा है। ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय (LNMU), दरभंगा, जो कभी बिहार का शैक्षिक गौरव था, आज पान, गुटखा और तंबाकू की गंदगी से बदनाम हो रहा है। आधुनिक भवनों, विशाल कैंपस और सुसज्जित कक्षाओं के बावजूद, प्रशासन की लापरवाही और कर्मचारियों की अनुशासनहीनता ने इस शिक्षा मंदिर को गंदगी का ढेर बना दिया है। दीवारों पर पान-गुटखे के लाल-लाल दाग, ऑफिसों में थूक के निशान और अलमारियों के पीछे फैली गंदगी – यह सब देखकर सवाल उठता है: क्या एक विश्वविद्यालय जो खुद को साफ नहीं रख सकता, छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दे पाएगा?हाल ही में कैंपस का दौरा करने वाले छात्रों और प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि विश्वविद्यालय के प्रशासनिक कार्यालयों की स्थिति अत्यंत दयनीय है। छात्र, राहुल सिंह, ने गुस्से में कहा, “ऑफिस में जहां कर्मचारी बैठते हैं, वहां फर्श और दीवारें पान के थूक से सनी हैं। काउंटर के पास दीवार पर लाल दाग ऐसे हैं जैसे कोई सजावट हो! क्या यही है हमारा शिक्षा का मंदिर?” ऑफिसों में लगी अलमारियों के पीछे, जहां महत्वपूर्ण दस्तावेज रखे जाते हैं, वहां गुटखा और तंबाकू के धब्बे साफ दिखते हैं। एक कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर स्वीकार किया, “यह गंदगी बाहर के लोग नहीं, बल्कि ऑफिस में काम करने वाले कुछ कर्मचारी ही फैलाते हैं। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं होती।”छात्र संगठनों ने इस मुद्दे पर कई बार आवाज उठाई है। कर्मचारियों में अनुशासन की कमी है, और प्रशासन मौन है।” एक अन्य छात्रा, रानी कुमारी अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा , “मैं जब डाक्यमेन्ट निकलवाने के लिए ऑफिस गई, तो वहां की गंदगी देखकर मन खराब हो गया। दीवारों पर गुटखे के दाग, फर्श पर थूक – क्या यही माहौल हमें पढ़ाई के लिए प्रेरित करेगा?” एक छात्र अमित ठाकुर ने भी कहा यूनिवर्सिटी जल्द सफाई और अनुशासन पर कदम उठाए, यह हमारा हक है कि हमें स्वच्छ माहौल मिले।”Mithila University की दुर्दशा का एक प्रमुख कारण प्रशासन की उदासीनता।सूत्रों के अनुसार, विश्वविद्यालय में सफाई कर्मचारियों की नियुक्ति तो हुई है, लेकिन नियमित सफाई का कोई शेड्यूल नहीं है। दीवारों पर पान-गुटखे के दाग साफ करने के लिए कोई विशेष अभियान नहीं चलाया जाता। क्या जिम्मेदार अधिकारियों की नजर इस गंदगी तक नहीं पहुंचती? कैंपस में मौजूद आधुनिक सुविधाएं, जैसे डिजिटल लाइब्रेरी, स्मार्ट क्लासरूम और नए हॉस्टल, बेकार हो रहे हैं, क्योंकि बुनियादी स्वच्छता का अभाव सारी चमक को फीका कर रहा है।प्रशासन पर सवालकॉलेज में सुविधाएँ और इन्फ्रास्ट्रक्चर होने के बावजूद जब स्व‑प्रबंधन और मूलभूत स्वच्छता नहीं निभाई जाती, तो बड़ा सवाल उठता है — क्या विश्वविद्यालय के नेतृत्व (VC और प्रशासन) को परिसर का वास्तविक हाल पता है? क्या नियमित निगरानी, क्लीनिंग शेड्यूल और अंदरूनी अनुशासन की व्यवस्था है?शिक्षाविदों का कहना है कि विश्वविद्यालय को तत्काल कदम उठाने चाहिए। एक रिटायर्ड प्रोफेसर ने सुझाव दिया, “पान-गुटखा खाने और थूकने वालों पर सख्त जुर्माना लगाया जाए। साथ ही, साप्ताहिक सफाई अभियान और सीसीटीवी निगरानी शुरू हो।” छात्रों की मांग है कि प्रशासन कर्मचारियों में अनुशासन लाए और स्वच्छता को प्राथमिकता दे। अगर मिथिला यूनिवर्सिटी को अपनी खोई हुई प्रतिष्ठा वापस पानी है, तो उसे गंदगी के इस दाग को मिटाने के लिए तुरंत काम शुरू करना होगा।मांगें और सुझाव (वाइडलाइनेड रूप में)स्थानीय छात्रों और अभिभावकों की आशंकाओं व सार्वजनिक हित को देखते हुए कुछ ठोस कदम सुझाए जा रहे हैं:तुरंत एक स्वच्छता और निरीक्षण समिति का गठन — जिसमें छात्र प्रतिनिधि, प्रशासन और स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारी शामिल हों।कार्यालय‑कक्षों, अलमारियों और काउंटरों के लिए नियमित साफ़‑सफाई शेड्यूल और मापदंड लागू किए जाएँ।महत्त्वपूर्ण दस्तावेज़ों की सुरक्षा के लिए अलमारियों का नियंत्रण और साफ़‑सुथरा भंडारण सुनिश्चित किया जाए।परिसर में पान/गुटका/तंबाकू निषेध के स्पष्ट बोर्ड और अनुशासनिक नियम लागू किए जाएँ; उल्लंघन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई सार्वजनिक की जाए।VC कार्यालय या प्रशासन सार्वजनिक रूप से स्थिति का संक्षिप्त जवाब दे — ताकि छात्र‑समुदाय को विश्वास मिल सके कि मामले पर ध्यान दिया जा रहा है।निष्कर्षयदि विश्वविद्यालय खुद अपने आधारिक स्वच्छता और प्रशासनिक अनुशासन का ध्यान नहीं रखता — तब वो किस तरह से छात्रों के शैक्षणिक और सुव्यवस्थित विकास का भरोसा दे पाएगा? यह समस्या केवल एक छात्र की शिकायत नहीं रहनी चाहिए; इसे समय रहते गंभीरता से लेकर प्रशासनिक कार्रवाई से सुधारा जाना चाहिए
🔊 Listen to this article
ADVERTISEMENT

Mithila University दरभंगा, 16 अक्टूबर 2025: मिथिला यूनिवर्सिटी की दुर्दशा आज हर उस छात्र और शिक्षक के लिए शर्मिंदगी का सबब बन चुकी है, जो इस ऐतिहासिक संस्थान से जुड़ा है। ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय (LNMU), दरभंगा, जो कभी बिहार का शैक्षिक गौरव था, आज पान, गुटखा और तंबाकू की गंदगी से बदनाम हो रहा है। आधुनिक भवनों, विशाल कैंपस और सुसज्जित कक्षाओं के बावजूद, प्रशासन की लापरवाही और कर्मचारियों की अनुशासनहीनता ने इस शिक्षा मंदिर को गंदगी का ढेर बना दिया है। दीवारों पर पान-गुटखे के लाल-लाल दाग, ऑफिसों में थूक के निशान और अलमारियों के पीछे फैली गंदगी – यह सब देखकर सवाल उठता है: क्या एक विश्वविद्यालय जो खुद को साफ नहीं रख सकता, छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दे पाएगा?

हाल ही में कैंपस का दौरा करने वाले छात्रों और प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि विश्वविद्यालय के प्रशासनिक कार्यालयों की स्थिति अत्यंत दयनीय है। छात्र, राहुल सिंह, ने गुस्से में कहा, “ऑफिस में जहां कर्मचारी बैठते हैं, वहां फर्श और दीवारें पान के थूक से सनी हैं। काउंटर के पास दीवार पर लाल दाग ऐसे हैं जैसे कोई सजावट हो! क्या यही है हमारा शिक्षा का मंदिर?” ऑफिसों में लगी अलमारियों के पीछे, जहां महत्वपूर्ण दस्तावेज रखे जाते हैं, वहां गुटखा और तंबाकू के धब्बे साफ दिखते हैं। एक कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर स्वीकार किया, “यह गंदगी बाहर के लोग नहीं, बल्कि ऑफिस में काम करने वाले कुछ कर्मचारी ही फैलाते हैं। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं होती।”

ADVERTISEMENT

छात्र संगठनों ने इस मुद्दे पर कई बार आवाज उठाई है। कर्मचारियों में अनुशासन की कमी है, और प्रशासन मौन है।” एक अन्य छात्रा, रानी कुमारी अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा , “मैं जब डाक्यमेन्ट निकलवाने के लिए ऑफिस गई, तो वहां की गंदगी देखकर मन खराब हो गया। दीवारों पर गुटखे के दाग, फर्श पर थूक – क्या यही माहौल हमें पढ़ाई के लिए प्रेरित करेगा?” एक छात्र अमित ठाकुर ने भी कहा यूनिवर्सिटी जल्द सफाई और अनुशासन पर कदम उठाए, यह हमारा हक है कि हमें स्वच्छ माहौल मिले।”

Mithila University की दुर्दशा का एक प्रमुख कारण प्रशासन की उदासीनता।

सूत्रों के अनुसार, विश्वविद्यालय में सफाई कर्मचारियों की नियुक्ति तो हुई है, लेकिन नियमित सफाई का कोई शेड्यूल नहीं है। दीवारों पर पान-गुटखे के दाग साफ करने के लिए कोई विशेष अभियान नहीं चलाया जाता। क्या जिम्मेदार अधिकारियों की नजर इस गंदगी तक नहीं पहुंचती? कैंपस में मौजूद आधुनिक सुविधाएं, जैसे डिजिटल लाइब्रेरी, स्मार्ट क्लासरूम और नए हॉस्टल, बेकार हो रहे हैं, क्योंकि बुनियादी स्वच्छता का अभाव सारी चमक को फीका कर रहा है।

ADVERTISEMENT

प्रशासन पर सवाल

कॉलेज में सुविधाएँ और इन्फ्रास्ट्रक्चर होने के बावजूद जब स्व‑प्रबंधन और मूलभूत स्वच्छता नहीं निभाई जाती, तो बड़ा सवाल उठता है — क्या विश्वविद्यालय के नेतृत्व (VC और प्रशासन) को परिसर का वास्तविक हाल पता है? क्या नियमित निगरानी, क्लीनिंग शेड्यूल और अंदरूनी अनुशासन की व्यवस्था है?

शिक्षाविदों का कहना है कि विश्वविद्यालय को तत्काल कदम उठाने चाहिए। एक रिटायर्ड प्रोफेसर ने सुझाव दिया, “पान-गुटखा खाने और थूकने वालों पर सख्त जुर्माना लगाया जाए। साथ ही, साप्ताहिक सफाई अभियान और सीसीटीवी निगरानी शुरू हो।” छात्रों की मांग है कि प्रशासन कर्मचारियों में अनुशासन लाए और स्वच्छता को प्राथमिकता दे। अगर मिथिला यूनिवर्सिटी को अपनी खोई हुई प्रतिष्ठा वापस पानी है, तो उसे गंदगी के इस दाग को मिटाने के लिए तुरंत काम शुरू करना होगा।

ADVERTISEMENT

मांगें और सुझाव (वाइडलाइनेड रूप में)

स्थानीय छात्रों और अभिभावकों की आशंकाओं व सार्वजनिक हित को देखते हुए कुछ ठोस कदम सुझाए जा रहे हैं:

  1. तुरंत एक स्वच्छता और निरीक्षण समिति का गठन — जिसमें छात्र प्रतिनिधि, प्रशासन और स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारी शामिल हों।
  2. कार्यालय‑कक्षों, अलमारियों और काउंटरों के लिए नियमित साफ़‑सफाई शेड्यूल और मापदंड लागू किए जाएँ।
  3. महत्त्वपूर्ण दस्तावेज़ों की सुरक्षा के लिए अलमारियों का नियंत्रण और साफ़‑सुथरा भंडारण सुनिश्चित किया जाए।
  4. परिसर में पान/गुटका/तंबाकू निषेध के स्पष्ट बोर्ड और अनुशासनिक नियम लागू किए जाएँ; उल्लंघन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई सार्वजनिक की जाए।
  5. VC कार्यालय या प्रशासन सार्वजनिक रूप से स्थिति का संक्षिप्त जवाब दे — ताकि छात्र‑समुदाय को विश्वास मिल सके कि मामले पर ध्यान दिया जा रहा है।

निष्कर्ष

यदि विश्वविद्यालय खुद अपने आधारिक स्वच्छता और प्रशासनिक अनुशासन का ध्यान नहीं रखता — तब वो किस तरह से छात्रों के शैक्षणिक और सुव्यवस्थित विकास का भरोसा दे पाएगा? यह समस्या केवल एक छात्र की शिकायत नहीं रहनी चाहिए; इसे समय रहते गंभीरता से लेकर प्रशासनिक कार्रवाई से सुधारा जाना चाहिए।

इस खबर को शेयर करें
Khabar Aangan

Khabar Aangan Admin

Khabar Aangan एक स्वतंत्र डिजिटल न्यूज़ प्लेटफ़ॉर्म है, जो सूचना से सच्चाई तक की यात्रा को समर्पित है। हमारा उद्देश्य है—स्थानीय मुद्दों से लेकर राष्ट्रीय घटनाओं तक, हर खबर को गहराई, संदर्भ और निष्पक्षता के साथ प्रस्तुत करना। हम परंपरागत पत्रकारिता को आधुनिक दृष्टिकोण से जोड़ते हैं, ताकि पाठकों को मिले स्पष्ट, विश्वसनीय और प्रभावशाली जानकारी। चाहे बात हो प्रशासनिक विफलता की, या सरकारी संस्थानों में पारदर्शिता की, या सामाजिक बदलाव की—Khabar Aangan हर विषय को संवेदनशीलता और साहस के साथ उठाता है।

आपका छोटा सा सहयोग हमारी पत्रकारिता को नई मजबूती देता है।

GPay UPI Paytm AmazonPay Razorpay

WELCOME TO KHABAR AANGAN Suchna Se Sacchai Tak