पटना | 13 अगस्त 2026: भोजपुर जिले के बहुचर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में बिहार सरकार ने एक बड़ा और संवेदनशील प्रशासनिक फैसला लिया है। घटना की पड़ताल के लिए गठित न्यायिक जांच आयोग की अंतरिम रिपोर्ट सामने आने के बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पीड़ित परिवार के लिए राहत का ऐलान कर दिया है।
राज्य सरकार के इस फैसले के तहत दिवंगत भरत तिवारी के परिवार को वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। इसके साथ ही परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाएगी। मुख्यमंत्री के इस कदम से न्याय की आस लगाए बैठे पीड़ित परिवार को आर्थिक और सामाजिक संबल मिलने की उम्मीद है।
आयोग की अंतरिम रिपोर्ट के आधार पर फैसला
यह बड़ा निर्णय सेवानिवृत्त न्यायाधीश विनोद कुमार सिन्हा की अध्यक्षता में गठित न्यायिक जांच आयोग की शुरुआती सिफारिशों के आधार पर लिया गया है। जून महीने में हुए इस एनकाउंटर पर उठे गंभीर सवालों और जनाक्रोश को देखते हुए राज्य सरकार ने इस उच्चस्तरीय आयोग का गठन किया था।
आयोग द्वारा परिजनों, प्रत्यक्षदर्शियों और पुलिस अधिकारियों के बयान दर्ज करने के बाद अपनी अंतरिम रिपोर्ट सौंपी गई है। इसी रिपोर्ट का बारीकी से अध्ययन करने के बाद मुख्यमंत्री ने परिवार को मुआवजा और नौकरी देने की घोषणा की है।
17 जून का वो वीडियो और एनकाउंटर का सच
यह पूरा मामला 17 जून 2026 का है, जब भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत बिलौती गांव में पुलिस और विशेष कार्य बल की टीम ने 28 वर्षीय भरत तिवारी को मुठभेड़ में मार गिराने का दावा किया था। शुरुआत में पुलिस ने कहा था कि युवक हथियार लहरा रहा था और टीम पर फायरिंग कर रहा था।
हालांकि, घटना के दौरान सामने आए एक लाइव वीडियो ने पुलिसिया दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। वीडियो में साफ दिख रहा था कि भरत तिवारी ने पुलिस के सामने हथियार डालकर आत्मसमर्पण कर दिया था। बिना किसी आपराधिक रिकॉर्ड वाले युवक को आत्मसमर्पण के बाद भी गोली मारे जाने के बाद पूरे बिहार में भारी गुस्सा फैल गया था।
मुख्यमंत्री से मुलाकात और अब तक की बड़ी कार्रवाई
मामले में नया मोड़ तब आया जब 24 जुलाई 2026 को भरत तिवारी की मां आशा देवी, बहन और भाभी ने पटना पहुंचकर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात की थी। परिजनों ने रो-रोकर पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कराने और दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गुहार लगाई थी।
मुख्यमंत्री के सख्त निर्देशों के बाद जांच प्रक्रिया में तेजी आई:
- पहली गोली चलाने के आरोपी विशेष कार्य बल के जवान अक्षय कुमार को 31 जुलाई को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया।
- परिजनों की शिकायत और साक्ष्यों के आधार पर संबंधित पुलिस उपाधीक्षक समेत कई पुलिसकर्मियों पर नामजद प्राथमिकी दर्ज की गई।
- मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए राष्ट्रपति सचिवालय ने भी बिहार के मुख्य सचिव को त्वरित जांच का निर्देश जारी किया था।
न्याय की आस में अंतिम रिपोर्ट का इंतजार
अंतरिम रिपोर्ट के आधार पर मदद की घोषणा से परिवार को थोड़ी राहत जरूर मिली है, लेकिन परिजनों का कहना है कि उनकी लड़ाई केवल मुआवजे तक सीमित नहीं है। वे इस पूरी साजिश में शामिल सभी अधिकारियों की गिरफ्तारी, गांव में स्मारक प्रतिमा की स्थापना और भरत तिवारी को शहीद का दर्जा देने की मांग पर भी अड़े हुए हैं।
फिलहाल न्यायिक जांच आयोग की अंतिम और विस्तृत रिपोर्ट आना बाकी है। सरकार की ओर से यह स्पष्ट संकेत दिया गया है कि अंतिम रिपोर्ट में जो भी अधिकारी या कर्मी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कानून के अनुसार कठोरतम दंडात्मक कदम उठाए जाएंगे।
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