मुजफ्फरपुर, 26 सितंबर 2026: मुजफ्फरपुर जिले में ग्रामीण विकास, रोजगार और पर्यावरण से जुड़ी महत्वपूर्ण योजनाओं की जमीनी हकीकत परखने के लिए उप विकास आयुक्त (DDC) ने कड़ा रुख अख्तियार किया है। शनिवार को जिला सभागार में ‘जल-जीवन-हरियाली’ और ‘विकसित भारत’ अभियान के तहत चल रही योजनाओं की विस्तृत समीक्षा बैठक हुई। बैठक में कई मोर्चों पर योजनाओं की धीमी गति सामने आने पर डीडीसी ने सख्त निर्देश देते हुए सभी संबंधित पदाधिकारियों को काम में तेजी लाने और तय समय-सीमा के भीतर गुणवत्तापूर्ण लक्ष्य हासिल करने का अल्टीमेटम दिया है।
समीक्षा बैठक के दौरान आंगनवाड़ी केंद्रों के निर्माण की स्थिति काफी सुस्त पाई गई। जिले में स्वीकृत 72 आंगनवाड़ी स्थलों में से महज 14 पर ही अब तक काम शुरू हो पाया है। इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए डीडीसी ने शेष 58 केंद्रों पर अविलंब कार्य प्रारंभ कराने का निर्देश दिया। इसके साथ ही ग्रामीण हाट निर्माण की 11 योजनाओं (जिनमें 7 टीएस/एएस प्रगति पर हैं) की अद्यतन स्थिति जांची गई और लंबित कार्यों को जल्द से जल्द पूरा करने का आदेश दिया गया।
ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की गारंटी देने वाले मानव दिवस सृजन की भी प्रखंडवार गहन समीक्षा की गई। जिले में कुल 3.73 लाख के पंचायत-स्तरीय लक्ष्य के बीच कई पंचायतों का प्रदर्शन चिंताजनक रहा। जिन पंचायतों में अब तक ‘शून्य’ मानव दिवस सृजित हुए हैं, वहां डीडीसी ने तत्काल योजनाएं चालू कर मजदूरों को काम देने का सख्त आदेश दिया है। प्रशासन ने रोजगार सृजन के मामले में कुढ़नी, मुशहरी, मड़वन, कांटी, पारू, साहेबगंज, कटरा और गायघाट प्रखंडों के संबंधित पंचायतों पर विशेष फोकस करने को कहा है।
मजदूरों के पारदर्शी भुगतान के लिए अनिवार्य ई-केवाईसी (e-KYC) के मोर्चे पर भी तेजी लाने की दरकार है। समीक्षा में यह बात सामने आई कि 15,443 कुशल/अर्द्धकुशल श्रमिकों के लक्ष्य के मुकाबले अब तक केवल 2,321 श्रमिकों का ही ई-केवाईसी पूरा हो सका है।
हालांकि, सक्रिय अकुशल श्रमिकों का ई-केवाईसी आंकड़ा 88.86 प्रतिशत दर्ज किया गया है। अधिकारियों को लंबित ई-केवाईसी की प्रक्रिया युद्धस्तर पर पूरी करने को कहा गया है। समयबद्ध मजदूरी भुगतान पर जोर देते हुए डीडीसी ने स्पष्ट किया कि लंबित FTO (फंड ट्रांसफर ऑर्डर) और द्वितीय हस्ताक्षर से जुड़े मामलों का शीघ्र निष्पादन किया जाए, ताकि श्रमिकों के खाते में बिना किसी देरी के पैसे पहुंच सकें।
पर्यावरण संरक्षण के मोर्चे पर वृक्षारोपण और जल संचयन कार्यों की भी मॉनिटरिंग की गई। वृक्षारोपण के 4,476 लक्षित कार्यों में से 4,090 योजनाओं पर काम चल रहा है, लेकिन मुशहरी, सकरा, मुरौल, बोचहां और कांटी जैसे कम प्रगति वाले प्रखंडों को काम में तेजी लाने की सख्त हिदायत दी गई है।
वहीं, पौधरोपण कार्यों के ई-एमआर (e-MR) निर्गमन में कांटी, मड़वन, साहेबगंज, कटरा और गायघाट की स्थिति की अलग से समीक्षा हुई। अंत में जल-जीवन-हरियाली अभियान के तहत रेन वाटर हार्वेस्टिंग और चेक डैम निर्माण से जुड़े कार्यों को भी जल्द से जल्द पूरा करने का निर्देश दिया गया।
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