मुजफ्फरपुर, 5 अक्टूबर 2026। नेपाल में भारी बारिश के बाद गंडक और बागमती नदियों में आए उफान का असर अब मुजफ्फरपुर जिले में तेजी से कम होने लगा है। नदियों का जलस्तर खतरे के निशान से नीचे आने के बाद जिला प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित इलाकों में जलजमाव हटने के साथ ही पुनर्वास, स्वास्थ्य सुरक्षा और बुनियादी ढांचे की बहाली का काम शुरू कर दिया है। जिलाधिकारी कुमार गौरव ने सभी जिला स्तरीय अधिकारियों को सरकार द्वारा निर्धारित मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के तहत जल-जनित बीमारियों की रोकथाम, सड़कों की मरम्मत और नुकसान के आकलन का कड़ा निर्देश जारी किया है।
बाढ़ का पानी उतरते ही महामारी और जल-जनित संक्रमण न फैले, इसके लिए स्वास्थ्य विभाग और पीएचईडी को विशेष अलर्ट पर रखा गया है। सिविल सर्जन को प्रभावित इलाकों में जलजमाव वाले स्थानों पर ब्लीचिंग पाउडर, चूना के छिड़काव और फॉगिंग कराने का जिम्मा सौंपा गया है।
इसके साथ ही डायरिया, त्वचा रोग, बुखार, लेप्टोस्पायरोसिस और सर्पदंश जैसी स्थितियों से निपटने के लिए जगह-जगह मेडिकल कैंप लगाए जा रहे हैं। पीएचईडी विभाग सभी चापाकलों की क्लोरीन से सफाई और पेयजल की गुणवत्ता जांच सुनिश्चित कर रहा है, जबकि प्रशासन ने स्थानीय लोगों से पानी उबालकर पीने की अपील की है।
पानी उतरने के साथ ही क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे को दुरुस्त करने की कवायद भी शुरू कर दी गई है। ग्रामीण कार्य विभाग, पथ निर्माण विभाग और एनएचएआई के कार्यपालक अभियंताओं को बाढ़ से क्षतिग्रस्त हुई ग्रामीण और मुख्य सड़कों की तुरंत मरम्मत कराने के निर्देश दिए गए हैं। विशेष रूप से कटरा, गायघाट, जयमल डुमरी और हुस्सेपुर जैसे अत्यधिक प्रभावित क्षेत्रों में आवागमन सुचारू बनाने के लिए त्वरित सड़क मरम्मत पर जोर दिया जा रहा है। इसके साथ ही बिजली विभाग को निर्देश दिया गया है कि आपूर्ति बहाल करने से पहले पोल, तार और ट्रांसफार्मर की सुरक्षा जांच पूरी की जाए।
बाढ़ से हुए आर्थिक नुकसान की भरपाई के लिए जिला प्रशासन ने सर्वे की प्रक्रिया तेज कर दी है। जिला कृषि अधिकारी को निर्देश दिया गया है कि वे बाढ़ प्रभावित पंचायतों में फसल क्षति का विस्तृत सर्वे कराकर 7 दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपें। वहीं अपर समाहर्ता आपदा प्रबंधन और अंचल अधिकारियों के माध्यम से क्षतिग्रस्त मकानों और संपत्ति का आकलन कराया जा रहा है। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि सरकारी प्रावधानों के अनुरूप सभी प्रभावित परिवारों को अनुग्रह अनुदान और सहायता राशि बिना किसी देरी के प्रदान की जाएगी।
मवेशियों के स्वास्थ्य और उनके चारे की व्यवस्था को लेकर पशुपालन विभाग को सक्रिय कर दिया गया है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में मवेशियों के लिए विशेष पशु चिकित्सा शिविर आयोजित किए जा रहे हैं, जहाँ बीमारियों से बचाव के टीके और दवाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं। इसके अलावा सूखा राशन, कुट्टी-भूसा और पशु चारे का वितरण जारी रखा गया है ताकि पशुपालकों को पानी उतरने के इस संक्रमण काल में किसी अतिरिक्त परेशानी का सामना न करना पड़े।
उल्लेखनीय है कि सितंबर के अंतिम सप्ताह में नेपाल में हुई रिकॉर्ड बारिश के कारण गंडक नदी का जलस्तर अपने सर्वकालिक रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गया था। 30 सितंबर को रेवा घाट पर जलस्तर 55.68 मीटर दर्ज किया गया, जिसने वर्ष 2020 के 55.46 मीटर के उच्चतम रिकॉर्ड (एचएफएल) को भी पीछे छोड़ दिया था। इसके चलते जिले के साहेबगंज, पारू, कटरा और गायघाट प्रखंडों की कुल 23 पंचायतें गंभीर रूप से प्रभावित हुई थीं, जहाँ एनडीआरएफ व एसडीआरएफ टीमों और सामुदायिक रसोई के जरिए राहत कार्य संचालित किए गए थे।
अब रेवा घाट और बेनीबाद गेज स्थलों पर नदियों का पानी लगातार नीचे आ रहा है और स्थिति तेजी से सामान्य हो रही है। जिलाधिकारी स्वयं वरीय अधिकारियों के साथ क्षेत्रों में कैंप कर राहत कार्यों और जन-प्रतिनिधियों से मिले फीडबैक का अनुश्रवण कर रहे हैं। प्रशासन का लक्ष्य है कि जलस्तर घटने के अगले चरण में सड़कों की बहाली, स्वास्थ्य रक्षा और मुआवजा वितरण का कार्य समयबद्ध तरीके से पूरा कर लिया जाए ताकि जनजीवन पूरी तरह पटरी पर लौट सके।
- Muzaffarpur News: पीएनजी गैस कनेक्शन की धीमी रफ्तार पर DM सख्त, 3 महीने में 55 हजार घरों तक पाइपलाइन पहुंचाने का लक्ष्य
- Muzaffarpur News: बाढ़ के बीच इन्फ्लेटेबल मोटर बोट से ‘माधोपुर हजारी’ पहुंचे DM कुमार गौरव, खुद बांटी राहत सामग्री
- Muzaffarpur News: बाढ़ के खतरे के बीच DM कुमार गौरव का ‘ग्राउंड जीरो’ एक्शन, साहेबगंज के माधोपुर हजारी रिंग बांध का किया सघन निरीक्षण
- Muzaffarpur News: गंडक नदी ने तोड़ा रिकॉर्ड, 22 पंचायतों में घुसा पानी, ग्राउंड जीरो पर मुस्तैद मुजफ्फरपुर DM
- Muzaffarpur News: फर्श से अर्श का सफर, ‘जीविका दीदी’ कुसुम ने बदली गांव की पहचान, 1 साल में 24 से 105 मशीनों तक पहुंचा उद्यम
आपका छोटा सा सहयोग हमारी पत्रकारिता को नई मजबूती देता है।



