मधुबनी, 26 सितंबर 2026। कार्यालयों और कार्यस्थलों पर महिलाओं के साथ होने वाले लैंगिक उत्पीड़न (Sexual Harassment) पर सख्त लगाम लगाने के लिए मधुबनी में प्रशासनिक और न्यायिक स्तर पर बड़ी पहल की गई है। कामकाजी महिलाओं को सुरक्षित और सम्मानजनक माहौल देने के उद्देश्य से शनिवार को मधुबनी सिविल कोर्ट परिसर में ‘POSH अधिनियम, 2013’ को लेकर एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया।
जिला विधिक सेवा प्राधिकार (DLSA) और महिला एवं बाल विकास निगम (WCDC) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में शिकायत दर्ज कराने से लेकर दोषियों पर कार्रवाई तक की पूरी प्रक्रिया विस्तार से समझाई गई।
कार्यक्रम की शुरुआत प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष (DLSA) श्री पवन कुमार पाण्डेय ने दीप प्रज्वलित कर की। इस दौरान कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े कानूनी पहलुओं और इंटरनल कमेटी की शक्तियों पर खुलकर चर्चा हुई, ताकि महिलाएं बिना किसी डर के अपने अधिकारों का इस्तेमाल कर सकें।
SHe-Box से सीधे ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराने की सुविधा
कार्यशाला में सबसे अहम जानकारी शिकायत तंत्र को डिजिटल और सुलभ बनाने पर दी गई। महिला एवं बाल विकास निगम के जिला परियोजना प्रबंधक (DPM) हेमंत कुमार मंडल ने बताया कि अगर किसी महिला को कार्यस्थल पर उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है, तो वह ‘SHe-Box’ (शी-बॉक्स) पोर्टल के माध्यम से सीधे ऑनलाइन शिकायत दर्ज करा सकती है। इसके अलावा, उन्होंने हर कार्यालय में बनने वाली इंटरनल कमेटी (IC) और जिले स्तर पर काम करने वाली लोकल कमेटी (LC) की संरचना, उनकी भूमिका और कानूनी दायित्वों का पूरा खाका पेश किया।
अधिकारियों ने यह भी बताया कि WCDC की वेबसाइट पर POSH से जुड़ा ऑनलाइन प्रशिक्षण (Online Training) उपलब्ध है, जिसे पूरा करने के बाद बाकायदा प्रमाण-पत्र भी प्राप्त किया जा सकता है। इससे सरकारी और गैर-सरकारी कर्मियों में जागरूकता बढ़ेगी।
उत्पीड़न रोकने के लिए समितियों का सक्रिय होना जरूरी
कार्यक्रम में POSH कमेटी की चेयरपर्सन और ADJ-I रचना राज ने अधिनियम के सबसे महत्वपूर्ण हिस्सों पर प्रकाश डाला। उन्होंने स्पष्ट किया कि कार्यस्थल पर महिलाओं का लैंगिक उत्पीड़न रोकना केवल कानूनी बाध्यता नहीं, बल्कि हर संस्थान की नैतिक जिम्मेदारी है। उन्होंने शिकायत मिलने पर उसके निवारण की तय प्रक्रिया (Grievance Redressal) को कैसे पारदर्शी बनाया जाए, इस पर जोर दिया। इसी क्रम में ICDS मधुबनी की डीपीओ (DPO) श्रीमती ललिता कुमारी ने भी कानून के विभिन्न प्रावधानों को व्यावहारिक नजरिए से समझाया।
कार्यशाला का माहौल काफी संवादात्मक (Interactive) रहा, जहां विशेषज्ञों ने उपस्थित पदाधिकारियों और कर्मियों द्वारा पूछे गए सवालों के स्पष्ट जवाब दिए। इसका मुख्य उद्देश्य जिले के सभी कार्यस्थलों को महिलाओं के लिए पूरी तरह से सुरक्षित और भयमुक्त बनाना है।
कार्यक्रम के अंत में जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव श्री सचिन कुमार ने धन्यवाद ज्ञापन किया। इस महत्वपूर्ण कार्यशाला में परिवार न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश श्री जय किशोर दुबे, POSH कमेटी की सदस्य रिचा भारद्वाज, अधिवक्ता व सदस्य बबीता कुमारी, अधिवक्ता सपना, मधुबनी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं सचिव समेत कई अन्य न्यायिक पदाधिकारी और कर्मी मौजूद रहे।
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