दिल्ली की हवा को साफ करने के लिए सरकार इस साल एक बड़े प्रयोग की तैयारी कर रही है—कृत्रिम वर्षा या “Artificial Rain”। यह परियोजना IIT कानपुर के सहयोग से की जा रही है और इसका उद्देश्य दिवाली के बाद शहर में बढ़ने वाले प्रदूषण को कम करना है।
दिल्ली सरकार की कृत्रिम वर्षा (Artificial Rain) योजना 2025;
दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने घोषणा की है कि दिल्ली पूरी तरह तैयार है कृत्रिम वर्षा के लिए। यह प्रयोग IIT कानपुर की तकनीकी सहायता से किया जाएगा और IMD (भारतीय मौसम विभाग) की स्वीकृति मिलते ही शुरू होगा। इसके लिए मेरठ में तैनात एक विशेष Cessna 206H विमान का उपयोग होगा, जो बादलों में सिल्वर आयोडाइड (Silver Iodide) जैसे कणों का छिड़काव करेगा ताकि वर्षा उत्पन्न हो सके।यह परियोजना लगभग 3.21 करोड़ रुपये की लागत से चलाई जा रही है और इसे प्रदूषण को नियंत्रित करने की “पोस्ट-दिवाली एक्शन प्लान” के रूप में देखा जा रहा है।
क्या है कृत्रिम वर्षा (Artificial Rain)?
कृत्रिम वर्षा या Cloud Seeding एक ऐसी मौसम परिवर्तन तकनीक (Weather Modification Technology) है जिसमें बादलों में ऐसे रासायनिक पदार्थों को डाला जाता है जो जलवाष्प को संघनित कर बारिश में बदल देते हैं।इसका मुख्य उद्देश्य उन क्षेत्रों में वर्षा कराना है जहाँ प्राकृतिक बारिश नहीं होती या बहुत कम होती है।
कृत्रिम वर्षा (Artificial Rain) की प्रक्रिया कैसे होती है?
कृत्रिम वर्षा बनाने की प्रक्रिया को चार चरणों में समझा जा सकता है:
1.बादलों का चयन:
वैज्ञानिक ऐसे बादलों की पहचान करते हैं जिनमें पर्याप्त नमी (Moisture) होती है।
2.रासायनिक छिड़काव (Cloud Seeding):
विमान या रॉकेट के माध्यम से Silver Iodide, Potassium Iodide, या Sodium Chloride (नमक) जैसे कण बादलों में छोड़े जाते हैं।
3.संघनन प्रक्रिया:
ये रासायनिक कण बादलों की जलवाष्प को आकर्षित करते हैं और बूंदों के निर्माण की प्रक्रिया शुरू होती है।
4.वर्षा का निर्माण:
जब ये बूंदें भारी हो जाती हैं, तो वे पृथ्वी पर गिरती हैं और कृत्रिम रूप से बारिश होती है।
