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चेतावनी! Diwali के 2 दिन बाद ये काम करना है बेहद जरूरी, नहीं तो हो सकता है बड़ा ‘आर्थिक और स्वास्थ्य’ नुकसान!

Diwali के 2 दिन बाद अगर ये ज़रूरी काम नहीं किया, तो हो सकता है बड़ा आर्थिक और स्वास्थ्य नुकसान! जानिए किन गलतियों से बचना है और कैसे रखें लक्ष्मी जी को प्रसन्न।
Khabar Aangan Published on: 18 अगस्त 2026
चेतावनी! Diwali के 2 दिन बाद ये काम करना है बेहद जरूरी, नहीं तो हो सकता है बड़ा ‘आर्थिक और स्वास्थ्य’ नुकसान!
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चेतावनी! Diwali के 2 दिन बाद ये काम करना है बेहद जरूरी, नहीं तो हो सकता है बड़ा ‘आर्थिक और स्वास्थ्य’ नुकसान!

Diwali… रोशनी, खुशियां और समृद्धि का सबसे बड़ा त्योहार। यह केवल एक दिन का पर्व नहीं, बल्कि पाँच दिनों का महाउत्सव होता है जो जीवन में एक नई ऊर्जा और सकारात्मकता लेकर आता है। हमने धूमधाम से मां लक्ष्मी का स्वागत किया, घर को दीयों से सजाया, पकवान बनाए और अपनों के साथ खुशियां बांटी। लेकिन क्या आप जानते हैं कि Diwali खत्म होते ही, इसके ठीक दो दिन बाद, कुछ ऐसे महत्वपूर्ण काम हैं जिन्हें अगर नज़रअंदाज़ किया गया, तो यह आपके घर की समृद्धि, स्वास्थ्य और आने वाले साल की खुशियों पर भारी पड़ सकता है?

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यह लेख केवल धार्मिक मान्यताओं पर आधारित नहीं है, बल्कि इसमें ज्योतिष, वास्तु और वैज्ञानिक (खासकर स्वास्थ्य और पर्यावरण) दृष्टिकोण से उन कार्यों को विस्तार से बताया गया है, जो Diwali के तुरंत बाद ‘नुकसान’ से बचने और ‘लाभ’ को बनाए रखने के लिए अनिवार्य हैं।


पहला बड़ा नुकसान: स्वास्थ्य पर खतरा (प्रदूषण और सफाई)

Diwali की रौनक खत्म होने के साथ ही सबसे बड़ा खतरा हमारे स्वास्थ्य पर मंडराने लगता है। पटाखों का धुआं, आतिशबाजी के अवशेष, और पूजा में उपयोग हुई सामग्री का सही निपटान न होना, वायु प्रदूषण को खतरनाक स्तर पर ले जा सकता है।

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अनिवार्य कार्य 1: घर और फेफड़ों की ‘डबल’ सफाई

Diwali के 2 दिन बाद, जब तक प्रदूषण का स्तर चरम पर पहुँच चुका होता है, आपको तत्काल प्रभाव से दो तरह की सफाई करनी होगी: घर की और शरीर की।

क. घर की गहन सफाई और वेंटिलेशन:

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  • पटाखों के अवशेषों का निपटान: Diwali की रात से लेकर अगले दिन तक, पटाखों के जलने से हुए राख और विषैले अवशेषों को तुरंत इकट्ठा करके सुरक्षित रूप से निपटान करें। इन अवशेषों में हानिकारक रसायन होते हैं जो हवा में घुलकर आपके फेफड़ों को नुकसान पहुंचाते हैं।
  • हवा शुद्ध करें: घर के सभी खिड़की-दरवाजे कुछ समय के लिए खोल दें (सुबह जल्दी या शाम को जब प्रदूषण का स्तर थोड़ा कम हो)। घर में हवा का उचित वेंटिलेशन बहुत जरूरी है। घर के अंदर के वातावरण को शुद्ध करने के लिए कपूर या गूगल (Guggul) की धूनी दें। यह नकारात्मकता और प्रदूषित कणों को हटाने में सहायक होता है।
  • प्रयोग में लाई गई मूर्तियों और बर्तनों की शुद्धि: पूजा में प्रयोग किए गए पीतल, तांबे या अन्य धातुओं के बर्तनों को अच्छी तरह साफ करें। उन्हें नींबू, सिरका या बेकिंग सोडा से मांजने से उनकी चमक और शुद्धता बनी रहेगी।

ख. शरीर और फेफड़ों का बचाव (आंतरिक शुद्धिकरण):

  • खूब पानी पीएं: शरीर को डीटॉक्सिफाई करने के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी (कम से कम 8-10 गिलास) और तरल पदार्थ पीएं। यह फेफड़ों में जमा हुए विषाक्त पदार्थों (Toxins) को बाहर निकालने में मदद करता है।
  • एंटीऑक्सीडेंट युक्त आहार: अपनी डाइट में विटामिन C और E से भरपूर खाद्य पदार्थ जैसे खट्टे फल, हरी सब्जियां, अदरक, हल्दी और तुलसी शामिल करें। यह आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) को बढ़ाएगा और प्रदूषण के कारण होने वाले नुकसान से बचाएगा।
  • स्टीम इनहेलेशन: यदि आपको सांस लेने में तकलीफ या खांसी महसूस हो रही है, तो कम से कम 2 दिन तक दिन में दो बार सादे पानी या नमक वाले पानी की भाप (Steam Inhalation) लें। यह फेफड़ों को साफ करने का एक प्राकृतिक तरीका है।

दूसरा बड़ा नुकसान: आर्थिक हानि और बरकत में रुकावट (ज्योतिष और वास्तु)

Diwali पर मां लक्ष्मी का आगमन होता है। लेकिन धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अगर Diwali के तुरंत बाद कुछ विशेष चीज़ों का सही तरीके से निपटान न किया जाए या उनका अनादर हो जाए, तो मां लक्ष्मी नाराज़ होकर वापस लौट सकती हैं। यही वह ‘आर्थिक नुकसान’ है जिससे बचना अत्यंत आवश्यक है।

अनिवार्य कार्य 2: पूजा सामग्री और खरीदे गए सामान का उचित सम्मान

Diwali के ठीक 2 दिन बाद गोवर्धन पूजा/भाई दूज के आसपास इन कामों को निपटाना अत्यंत शुभ माना जाता है।

क. पुरानी लक्ष्मी-गणेश मूर्तियों का सही विसर्जन/स्थापन:

  • मिट्टी की मूर्तियाँ: Diwali पर खरीदी गई मिट्टी या प्लास्टर ऑफ पेरिस की नई लक्ष्मी-गणेश मूर्तियों की पूजा के बाद, उन्हें कभी भी ऐसे ही किसी कोने में न रखें। उन्हें जल में विसर्जित करना सबसे उत्तम होता है, लेकिन यदि संभव न हो तो उन्हें किसी साफ़, पवित्र स्थान, जैसे किसी मंदिर या पीपल के पेड़ के नीचे सम्मानपूर्वक रखें। उनका अनादर करने से लक्ष्मी जी रुष्ट हो जाती हैं।
  • धातु की मूर्तियाँ (स्थायी लक्ष्मी): यदि आपकी मूर्तियां सोना, चांदी, पीतल जैसी धातु की हैं, तो इन्हें विसर्जित नहीं किया जाता। Diwali के 2 दिन बाद, उन्हें गंगाजल से शुद्ध करके, नए वस्त्र अर्पित करें और सम्मानपूर्वक अपने पूजा स्थान पर स्थापित करें। यह कार्य घर की ‘स्थायी लक्ष्मी’ को बनाए रखता है।

ख. धनतेरस की वस्तुओं का सही उपयोग:

  • झाड़ू: धनतेरस पर झाड़ू खरीदना बहुत शुभ होता है, क्योंकि इसे मां लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है। Diwali के बाद इसका उपयोग करते समय ध्यान रखें कि इसे कभी भी खड़ा करके न रखें और न ही इस पर पैर मारें। इसे ऐसी जगह रखें जहाँ किसी की नजर न पड़े।
  • धनिया (बीज): धनतेरस पर खरीदे गए साबुत धनिया के कुछ दाने माता लक्ष्मी को अर्पित करने के बाद उन्हें अगले दिन गमले या क्यारी में बो देना चाहिए। ऐसी मान्यता है कि अगर ये बीज अंकुरित हो जाएं तो घर में साल भर समृद्धि बनी रहती है।

ग. दीयों और पूजा के तेल का निपटान:

  • जले हुए दीये: Diwali पर उपयोग में लाए गए सभी दीयों को, खासकर मुख्य दीपक को, सम्मानपूर्वक उठा लें। यदि दीये मिट्टी के हैं तो उन्हें किसी पवित्र स्थान पर रखें या विसर्जित करें। उन्हें कूड़ेदान में डालना अशुभ माना जाता है।
  • पूजा का तेल/घी: पूजा में बचे हुए तेल या घी को घर के बाहर किसी वृक्ष या पक्षियों के लिए दीपक जलाने में इस्तेमाल किया जा सकता है। इसे कभी भी नाली में न बहाएं।

तीसरा बड़ा नुकसान: आध्यात्मिक ऊर्जा का क्षय (नियमितता)

Diwali पर घर में जो सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है, उसे बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती है। Diwali के बाद अक्सर लोग आलस्य के कारण पूजा-पाठ और नियमों को छोड़ देते हैं, जिससे धीरे-धीरे घर की आध्यात्मिक ऊर्जा कम होने लगती है।

अनिवार्य कार्य 3: पूजा की नियमितता को पुन: स्थापित करना

Diwali के 2 दिन बाद, आपको अपनी दैनिक दिनचर्या और पूजा-पाठ की नियमितता को पुनः स्थापित करना चाहिए।

  • नियमित दीपक: Diwali के दीये बुझने के बाद भी, सुबह-शाम अपने पूजा घर में एक छोटा घी/तेल का दीपक जलाना जारी रखें। यह घर की सकारात्मक ऊर्जा के प्रवाह को बनाए रखता है।
  • तुलसी की पूजा: कार्तिक मास में तुलसी पूजा का विशेष महत्व है। Diwali के बाद तुलसी के पौधे की देखभाल करें और शाम को उनके पास दीपक जलाना न भूलें।
  • संकल्प की निरंतरता: Diwali पूजा में आपने जो भी संकल्प लिए थे या जिस नियम का पालन शुरू किया था (जैसे रोज मंत्र जाप, हनुमान चालीसा का पाठ), उसे जारी रखें। बीच में छोड़ने से ऊर्जा का चक्र टूट जाता है और शुभ फल नहीं मिल पाता।

निष्कर्ष: नुकसान से बचें, समृद्धि को साधें

Diwali का पर्व हमें केवल उत्सव मनाना नहीं सिखाता, बल्कि हमें यह भी सिखाता है कि ‘बरकत’ को केवल आकर्षित नहीं किया जाता, बल्कि उसे सँभाल कर भी रखना पड़ता है। Diwali के 2 दिन बाद ये अनिवार्य कार्य (स्वास्थ्य के लिए प्रदूषण की सफाई, आर्थिक बरकत के लिए पूजा सामग्री का सम्मान, और आध्यात्मिक ऊर्जा के लिए पूजा की नियमितता) आपको आने वाले वर्ष में किसी भी बड़े नुकसान से बचाएंगे और मां लक्ष्मी की कृपा को आपके घर में स्थायी रूप से बनाए रखेंगे।

तो देर न करें! अपनी कमर कस लें और Diwali की खुशियों को दीर्घकालिक समृद्धि में बदलने के लिए इन जरूरी कार्यों को आज ही प्राथमिकता दें!

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