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सालों बाद पलट गई सेना के इस जांबाज अफसर की किस्मत! जिस पर लगा था सबसे बड़ा दाग, अब उसे ही मिला सबसे ऊंचा मुकाम

सालों तक जेल में रहने और मालेगांव ब्लास्ट केस से बरी होने के बाद, लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित को भारतीय सेना ने ब्रिगेडियर के पद पर प्रमोट करने का रास्ता साफ कर दिया है। सशस्त्र बल न्यायाधिकरण ने उनके रिटायरमेंट पर रोक लगा दी थी।
Khabar Aangan Published on: 10 अप्रैल 2026
सालों बाद पलट गई सेना के इस जांबाज अफसर की किस्मत! जिस पर लगा था सबसे बड़ा दाग, अब उसे ही मिला सबसे ऊंचा मुकाम
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नई दिल्ली | 10 अप्रैल 2026: भारतीय सेना के इतिहास में आज एक ऐसा ऐतिहासिक फैसला लिया गया है, जिसने पूरे देश का ध्यान अपनी तरफ खींच लिया है। एक ऐसा सैन्य अधिकारी जिस पर आतंकवाद का बहुत बड़ा और संगीन आरोप लगा था, अब वही अफसर शान से एक बहुत बड़े और ऊंचे पद पर काबिज होने जा रहा है।

लंबे समय तक चली एक भयानक कानूनी लड़ाई और जेल की काल कोठरी में अपनी जिंदगी के कई अहम साल बिताने के बाद आखिरकार इस जांबाज को उसका असली हक मिल ही गया।

‘खबर आंगन’ की नेशनल डेस्क ने सशस्त्र बल न्यायाधिकरण और सेना मुख्यालय से जुड़े इस बड़े और ऐतिहासिक फैसले की पूरी जानकारी जुटाई है। आइए जानते हैं कि आखिर यह पूरा मामला क्या है और किस तरह से इस अफसर की किस्मत रातों-रात पूरी तरह से बदल गई।

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सालों की कानूनी लड़ाई के बाद मिली सबसे बड़ी जीत

हम बात कर रहे हैं सेना के लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद श्रीकांत पुरोहित की। हाल ही में आई खुफिया सूत्रों की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय सेना ने कर्नल पुरोहित को प्रमोशन देकर ब्रिगेडियर बनाने के प्रस्ताव को पूरी तरह से हरी झंडी दिखा दी है।

पिछले ही महीने सशस्त्र बल न्यायाधिकरण ने उनके रिटायरमेंट पर तुरंत रोक लगा दी थी। उनका रिटायरमेंट 31 मार्च को ही होना था, लेकिन उन्होंने न्यायाधिकरण में यह गुहार लगाई थी कि झूठे मुकदमों और सालों तक चली लंबी जांच के कारण उनके करियर और प्रमोशन पर बहुत बुरा असर पड़ा है। उनकी इसी दलील को सही मानते हुए न्यायाधिकरण ने रक्षा मंत्रालय को यह कड़ा निर्देश दिया था कि जब तक उनके हक पर अंतिम फैसला नहीं हो जाता, उन्हें रिटायर न किया जाए।

नौ साल जेल में काटे, अब पहनेंगे ब्रिगेडियर की वर्दी

कर्नल पुरोहित का नाम साल 2008 में महाराष्ट्र के मालेगांव में हुए एक भयानक बम ब्लास्ट से जोड़ा गया था। देश के इतिहास में यह पहली बार हुआ था जब सेना के किसी सेवारत खुफिया अधिकारी को आतंकवाद से जुड़े किसी संगीन मामले में गिरफ्तार किया गया हो।

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