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₹7,280 करोड़ का मेगा कदम: Rare-Earth Magnet निर्माण में भारत की बड़ी छलांग, EV और डिफेंस सेक्टर में आएगा तूफ़ान!

₹7,280 करोड़ का मेगा कदम: Rare-Earth Magnet निर्माण में भारत की बड़ी छलांग, EV और डिफेंस सेक्टर में आएगा तूफ़ान!

Ravi Prakash Published on: 27 नवम्बर 2025
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भारत सरकार ने देश के विनिर्माण क्षेत्र को नए आयाम देने और वैश्विक सप्लाई-चेन में भारत की उपस्थिति को मजबूत करने के उद्देश्य से दुर्लभ-पृथ्वी स्थायी चुंबकीय मैग्नेट (Rare-Earth Permanent Magnets) के घरेलू निर्माण के लिए ₹7,280 करोड़ का विशाल प्रोत्साहन पैकेज मंजूर किया है।
यह कदम भारत को उन देशों की श्रेणी में शामिल करने की दिशा में बड़ा प्रयास है जो हाई-टेक मैग्नेट के निर्माण में आत्मनिर्भर बनना चाहते हैं। ये मैग्नेट इलेक्ट्रिक वाहनों, सौर-पवन ऊर्जा समाधान, रक्षा उपकरणों, रोबोटिक्स, स्मार्ट-गैजेट्स और स्पेस-टेक्नोलॉजी जैसे कई महत्वपूर्ण उद्योगों की रीढ़ माने जाते हैं।

सरकार का यह निर्णय न केवल भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को मजबूती देगा, बल्कि देश को चीन-निर्भर सप्लाई चेन से भी बाहर निकलने में मदद करेगा, क्योंकि दुनिया के 90% rare-earth चुंबकीय मैग्नेट चीन में बनते हैं।

क्यों महत्वपूर्ण है यह पैकेज?

भारत पिछले कुछ वर्षों से निर्माण-क्षेत्र में ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य को आगे बढ़ा रहा है। दुर्लभ-पृथ्वी धातुओं पर आधारित स्थायी चुंबक उन तकनीकों में इस्तेमाल होते हैं जो आने वाले दशकों में विश्व अर्थव्यवस्था को दिशा देने वाली हैं। इनमें शामिल हैं:

इलेक्ट्रिक वाहन (EV हो या हाइब्रिड, दोनों में इन मैग्नेट की मांग तेज़ी से बढ़ रही है),ड्रोन और स्पेस-सैटेलाइट,मेडिकल इमेजिंग मशीनें,5G और हाई-स्पीड इलेक्ट्रॉनिक्स,रिन्यूएबल एनर्जी उपकरण,हाइड्रोजन-फ्यूल टेक्नोलॉजी,AI और रोबोटिक्स आधारित इंडस्ट्रियल मशीनें।

भारत इन क्षेत्रों में तेज़ी से कदम बढ़ा रहा है। लेकिन घरेलू उत्पादन न होने के कारण देश को बड़ी मात्रा में मैग्नेट आयात करने पड़ते हैं। यह पैकेज इस निर्भरता को कम कर सकता है।

क्या है सरकार की नई योजना?

सरकार की ओर से घोषित ₹7,280 करोड़ का प्रोत्साहन पैकेज Production-Linked Incentive (PLI) मॉडल की तर्ज पर काम करेगा। इसमें शामिल है—

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1. घरेलू उत्पादन इकाइयों को वित्तीय सहायता

नए कारखाने लगाने, अत्याधुनिक मशीनरी स्थापित करने और तकनीकी अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए कंपनियों को वित्तीय सहायता दी जाएगी।

2. 100% स्वदेशी सप्लाई चेन तैयार करने का लक्ष्य

मैग्नेट निर्माण में प्रयोग होने वाली rare-earth materials जैसे Neodymium, Praseodymium, Samarium आदि का भी घरेलू स्तर पर प्रोडक्शन बढ़ाया जाएगा।

3. निवेश आकर्षित करने के लिए विशेष प्रोत्साहन

विदेशी कंपनियों और भारतीय स्टार्टअप-MSME को निवेश हेतु आकर्षक कर-छूट और भूमि-नीति में लचीलापन मिलेगा।

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