समस्तीपुर, 28 अगस्त 2026: बिहार के समस्तीपुर जिले के रोसड़ा में भ्रष्टाचार के खिलाफ निगरानी विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। रोसड़ा की भूमि सुधार उपसमाहर्ता यानी DCLR कंचन कुमारी झा को कथित तौर पर दो लाख रुपये की रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार किया गया। कार्रवाई उनके सरकारी आवास पर की गई, जहां शिकायतकर्ता के साथ पहुंची निगरानी टीम ने रिश्वत की रकम स्वीकार किए जाने के बाद उन्हें पकड़ लिया। गिरफ्तारी के बाद सरकारी आवास की तलाशी भी शुरू की गई।
जमीन विवाद सुलझाने के बदले मांगे थे दो लाख रुपये
मामला विभूतिपुर निवासी मनोज कुमार महतो से जुड़े जमीन विवाद का बताया जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उनका मामला रोसड़ा DCLR के स्तर पर लंबित था। आरोप है कि मामले को उनके पक्ष में सुलझाने के बदले कंचन कुमारी झा ने दो लाख रुपये नकद और एक वॉशिंग मशीन की मांग की थी। शिकायत मिलने के बाद निगरानी विभाग ने पहले आरोपों का सत्यापन कराया और पुष्टि होने के बाद कार्रवाई की योजना बनाई।
शिकायत के सत्यापन के बाद निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की टीम ने तय योजना के तहत कार्रवाई की। गुरुवार सुबह करीब नौ बजे टीम दो वाहनों से रोसड़ा स्थित DCLR के सरकारी आवास पहुंची। टीम के साथ शिकायतकर्ता मनोज कुमार महतो भी मौजूद थे। आवास के अंदर तय प्रक्रिया के तहत कार्रवाई आगे बढ़ी और कथित रिश्वत की रकम दिए जाने के बाद निगरानी टीम ने कंचन झा को गिरफ्तार कर लिया।
दो लाख लेते ही निगरानी टीम ने किया गिरफ्तार
निगरानी टीम की कार्रवाई के बाद रोसड़ा DCLR का सरकारी आवास पूरी तरह जांच के दायरे में आ गया। टीम ने परिसर को अपने नियंत्रण में लेते हुए बाहरी लोगों की आवाजाही रोक दी। इसके बाद कमरों, अलमारियों और अन्य स्थानों की तलाशी शुरू की गई। जमीन और राजस्व से जुड़े दस्तावेजों के साथ दूसरे महत्वपूर्ण कागजात की भी जांच की गई, ताकि रिश्वत के आरोप से जुड़े संभावित साक्ष्यों को सुरक्षित किया जा सके।
यह कार्रवाई इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि मामला किसी सामान्य कार्यालयी लेनदेन का नहीं, बल्कि भूमि विवाद को प्रभावित करने के बदले कथित रिश्वत मांगने से जुड़ा है। DCLR का पद जमीन और राजस्व से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में किसी अधिकारी के खिलाफ रिश्वत मांगने और स्वीकार करने के आरोप में हुई कार्रवाई से प्रशासनिक महकमे में भी हलचल होना स्वाभाविक है।
सरकारी आवास से 13 लाख कैश मिलने की भी चर्चा
कंचन झा की गिरफ्तारी के बाद उनके सरकारी आवास की तलाशी के दौरान करीब 13 लाख रुपये नकद मिलने की बात भी सामने आई। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में इस रकम की आधिकारिक पुष्टि उस समय निगरानी विभाग की ओर से नहीं की गई थी। इसलिए 13 लाख रुपये की नकदी को फिलहाल जांच के दौरान सामने आए दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए। आधिकारिक कार्रवाई और बरामदगी का पूरा विवरण सामने आने के बाद स्थिति और स्पष्ट होगी।
अगर इस नकदी की आधिकारिक पुष्टि होती है तो जांच के लिहाज से इसका स्रोत भी अहम सवाल बनेगा। निगरानी टीम सरकारी आवास से मिले दस्तावेजों और अन्य सामान की भी जांच कर रही है। जमीन और राजस्व से जुड़े कागजातों को खंगालने का उद्देश्य यह पता लगाना भी हो सकता है कि कथित रिश्वत के मामले के अलावा किसी अन्य वित्तीय लेनदेन या संपत्ति से संबंधित कोई कड़ी मौजूद है या नहीं।
वॉशिंग मशीन की मांग ने भी चौंकाया
इस मामले में सिर्फ दो लाख रुपये की कथित रिश्वत की मांग ही सामने नहीं आई है। शिकायत से जुड़े विवरण के अनुसार, जमीन विवाद को शिकायतकर्ता के पक्ष में सुलझाने के एवज में दो लाख रुपये नकद के साथ एक वॉशिंग मशीन की भी मांग किए जाने का आरोप है। इसी शिकायत के आधार पर निगरानी विभाग ने पहले सत्यापन किया और उसके बाद ट्रैप कार्रवाई को अंजाम दिया।
सरकारी काम के बदले नकद रकम या किसी वस्तु की कथित मांग का आरोप भ्रष्टाचार के मामले को और गंभीर बनाता है। हालांकि, यहां यह ध्यान रखना जरूरी है कि ये आरोप जांच के दायरे में हैं। कंचन कुमारी झा के खिलाफ लगाए गए आरोपों का अंतिम निर्धारण जांच में सामने आने वाले साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही होगा। फिलहाल उनकी गिरफ्तारी निगरानी विभाग की कार्रवाई का हिस्सा है।
कार्रवाई की खबर फैलते ही आवास के बाहर जुटी भीड़
रोसड़ा DCLR के सरकारी आवास पर निगरानी विभाग की कार्रवाई की खबर फैलते ही आसपास लोगों की भीड़ जुटने लगी। कार्रवाई की संवेदनशीलता को देखते हुए निगरानी टीम ने पूरे परिसर को अपने नियंत्रण में रखा। किसी बाहरी व्यक्ति को अंदर जाने की अनुमति नहीं दी गई। मौके पर रोसड़ा थाना की पुलिस भी मौजूद रही और निगरानी अधिकारी तलाशी तथा जरूरी कागजी प्रक्रिया पूरी करने में जुटे रहे।
सरकारी आवास पर हुई इस कार्रवाई ने स्थानीय स्तर पर भी काफी चर्चा पैदा कर दी। खासकर इसलिए क्योंकि मामला रोसड़ा जैसे महत्वपूर्ण अनुमंडल में भूमि सुधार उपसमाहर्ता के पद पर तैनात अधिकारी से जुड़ा है। अब निगरानी विभाग की जांच में यह महत्वपूर्ण होगा कि रिश्वत की कथित रकम, शिकायतकर्ता के मामले और तलाशी के दौरान मिले दस्तावेजों के बीच क्या संबंध सामने आता है।
करीब डेढ़ साल से रोसड़ा में तैनात थीं कंचन झा
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मधुबनी जिले की रहने वाली कंचन कुमारी झा पिछले करीब डेढ़ वर्षों से रोसड़ा DCLR के पद पर तैनात थीं। भूमि सुधार उपसमाहर्ता के स्तर पर जमीन से जुड़े विवादों और अपीलों की सुनवाई जैसे महत्वपूर्ण काम आते हैं। इसलिए इस पद पर रहते हुए रिश्वत के आरोप में गिरफ्तारी ने मामले को गंभीर प्रशासनिक कार्रवाई का रूप दे दिया है।
अब जांच एजेंसी की नजर सिर्फ उस दो लाख रुपये की कथित रिश्वत पर नहीं है, बल्कि सरकारी आवास की तलाशी के दौरान सामने आए अन्य साक्ष्यों पर भी है। करीब 13 लाख रुपये नकद मिलने की जानकारी की आधिकारिक पुष्टि, रकम का स्रोत और जमीन से जुड़े दस्तावेजों में सामने आने वाले तथ्य जांच की दिशा तय कर सकते हैं। फिलहाल निगरानी विभाग इन सभी पहलुओं को जोड़कर पूरे मामले की तस्वीर साफ करने में जुटा है।
जांच के बाद सामने आएगी पूरी तस्वीर
रोसड़ा DCLR कंचन कुमारी झा की गिरफ्तारी के बाद अब निगरानी विभाग की जांच कई स्तरों पर आगे बढ़ रही है। एक तरफ दो लाख रुपये की कथित रिश्वत के मामले में ट्रैप कार्रवाई और शिकायत से जुड़े साक्ष्यों की जांच होगी, वहीं दूसरी तरफ सरकारी आवास की तलाशी में कथित तौर पर मिली नकदी और दस्तावेजों की भी पड़ताल की जाएगी। 13 लाख रुपये की बरामदगी की आधिकारिक पुष्टि के बाद इस पहलू की तस्वीर और साफ हो सकती है।
फिलहाल इतना स्पष्ट है कि जमीन विवाद को लेकर मिली शिकायत के सत्यापन के बाद निगरानी विभाग ने रोसड़ा DCLR के सरकारी आवास पर कार्रवाई की और कंचन झा को कथित तौर पर दो लाख रुपये की रिश्वत लेते गिरफ्तार किया। इस कार्रवाई ने स्थानीय प्रशासनिक महकमे में हलचल पैदा कर दी है। अब निगरानी विभाग की विस्तृत रिपोर्ट और आगे की न्यायिक प्रक्रिया से यह सामने आएगा कि मामले में आरोपों और बरामदगी की पूरी तस्वीर क्या है।
Disclaimer: यह खबर उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी और निगरानी विभाग की कार्रवाई से संबंधित सामने आए तथ्यों के आधार पर तैयार की गई है। कंचन कुमारी झा के खिलाफ रिश्वत से जुड़े आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है। सरकारी आवास से करीब 13 लाख रुपये नकद मिलने की जानकारी की आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध होने तक इसे सामने आए दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए। किसी भी आरोपी को न्यायालय के अंतिम निर्णय से पहले दोषी नहीं माना जाना चाहिए।
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