Suchna Se Sacchai Tak
ADVERTISEMENT

IN FOCUS

Advertisement
  1. Home
  2. India News
  3. Supreme Court का बड़ा आदेश — राष्ट्रीय राजमार्गों से आवारा पशुओं को हटाया जाए, सरकारी संस्थानों के चारों ओर लगें मजबूत फेंसिंग

Supreme Court का बड़ा आदेश — राष्ट्रीय राजमार्गों से आवारा पशुओं को हटाया जाए, सरकारी संस्थानों के चारों ओर लगें मजबूत फेंसिंग

Supreme Court Of India ने देशभर के राष्ट्रीय राजमार्गों से आवारा पशुओं को हटाने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि पशुओं की वजह से बढ़ते सड़क हादसों को रोकने के लिए राज्य सरकारें ठोस कदम उठाएँ और सरकारी संस्थानों के चारों ओर मजबूत फेंसिंग लगाई जाए।
Khabar Aangan Monday, 10 November 2025, 01:22 PM
Supreme Court का बड़ा आदेश — राष्ट्रीय राजमार्गों से आवारा पशुओं को हटाया जाए, सरकारी संस्थानों के चारों ओर लगें मजबूत फेंसिंग
ADVERTISEMENT

भारत के सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court of India) ने एक ऐतिहासिक आदेश जारी करते हुए देशभर के राष्ट्रीय राजमार्गों (National Highways) से आवारा पशुओं को हटाने का निर्देश दिया है।
अदालत ने कहा कि सड़क हादसों में लगातार बढ़ रही आवारा पशुओं की भूमिका चिंताजनक है और इसे रोकने के लिए राज्य सरकारों को सख्त कदम उठाने होंगे।


Supreme Court का स्पष्ट निर्देश

मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय बेंच ने अपने आदेश में कहा —

ADVERTISEMENT

“राजमार्गों पर मानव और पशु दोनों की सुरक्षा सर्वोपरि है। राज्य सरकारें यह सुनिश्चित करें कि राष्ट्रीय राजमार्गों पर कोई भी आवारा पशु न हो।”

अदालत ने केंद्र और राज्यों से कहा कि वे इस संबंध में समग्र कार्ययोजना (Comprehensive Action Plan) तैयार करें,
जिसमें पशुओं के पुनर्वास, गोशालाओं की संख्या बढ़ाने और संस्थानों के आसपास फेंसिंग लगाने जैसे कदम शामिल हों।


सड़क हादसों में बढ़ोतरी की चिंता

पिछले कुछ वर्षों में भारत में सड़क हादसों का एक बड़ा कारण आवारा पशु बन गए हैं।
केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय के आँकड़ों के अनुसार —

ADVERTISEMENT
  • वर्ष 2023 में केवल राष्ट्रीय राजमार्गों पर 20,000 से अधिक दुर्घटनाएँ ऐसी दर्ज हुईं जिनका कारण आवारा मवेशी या जानवर थे।
  • इन हादसों में लगभग 3,000 लोगों की मौत हुई और हज़ारों घायल हुए।

अदालत ने इन आँकड़ों को “चिंताजनक” बताते हुए कहा कि

“कानून और व्यवस्था बनाए रखना केवल अपराध तक सीमित नहीं, बल्कि नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी है।”


पशुओं के पुनर्वास पर भी जोर

Supreme Court ने अपने आदेश में यह भी कहा कि आवारा पशुओं को सड़कों से हटाना केवल अस्थायी समाधान नहीं होना चाहिए।
राज्य सरकारों को इनके लिए स्थायी पशु आश्रय केंद्र (Animal Shelter Homes) या गोशालाएँ बनानी चाहिए।

ADVERTISEMENT

अदालत ने कहा कि कई राज्यों में पशु आश्रय केंद्रों की हालत बेहद खराब है, जिससे पशु फिर से सड़कों पर लौट आते हैं।

“सरकारें केवल हटाने का नहीं, बल्कि पुनर्वास का रास्ता अपनाएँ।”


सरकारी परिसरों की सुरक्षा भी अहम

Supreme Court ने एक और महत्वपूर्ण बिंदु उठाते हुए कहा कि सरकारी संस्थानों —
जैसे कि स्कूल, अस्पताल, सरकारी कार्यालय और सार्वजनिक भवनों —
के चारों ओर मजबूत फेंसिंग (Boundary Protection) लगाई जाए, ताकि पशु अंदर न घुसें और दुर्घटनाएँ न हों।

अदालत ने कहा कि कई बार सरकारी परिसरों में आवारा गाय, कुत्ते या सांड घुस जाते हैं,
जिससे नागरिकों और कर्मचारियों को खतरा होता है।


किसानों के लिए राहत की उम्मीद

यह आदेश किसानों के लिए भी राहत की तरह है।
बिहार, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान जैसे राज्यों में किसान लंबे समय से यह शिकायत करते रहे हैं कि
आवारा पशु उनकी फसलें नष्ट कर देते हैं।

Supreme Court के इस निर्णय से उम्मीद है कि राज्य सरकारें अब
ग्रामीण इलाकों में भी पशुओं के लिए अलग बाड़े और पुनर्वास केंद्र बनाएंगी,
जिससे किसानों की फसलों को नुकसान कम होगा।


विशेषज्ञों की राय — “सख्त निगरानी जरूरी”

सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों ने Supreme Court के इस कदम का स्वागत किया है।
राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा परिषद के एक सदस्य ने कहा —

“यह फैसला देर से सही, लेकिन बेहद आवश्यक है। अब राज्यों को सिर्फ योजना नहीं, उसकी निगरानी भी करनी होगी।”

उन्होंने यह भी कहा कि हर जिले में स्थानीय निकायों (Municipal Bodies) को यह जिम्मेदारी दी जानी चाहिए कि
वे राजमार्गों के पास नियमित निगरानी रखें और आवारा पशुओं को सड़क से दूर रखें।


कानूनी पृष्ठभूमि

सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश 2018 में दायर एक जनहित याचिका (PIL) के संदर्भ में आया,
जिसमें सड़क हादसों में आवारा पशुओं की भूमिका को लेकर चिंता जताई गई थी।
अदालत ने पहले भी इस मामले में केंद्र से जवाब मांगा था,
लेकिन ठोस कदम न उठाए जाने पर अब स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं।


राज्य सरकारों पर जिम्मेदारी

अदालत ने साफ कहा कि यह जिम्मेदारी राज्यों की है कि वे

  • नदियों, नालों और राजमार्गों के किनारे पशुओं की मौजूदगी रोकें,
  • पशु मालिकों के लिए जुर्माना तय करें,
  • और दुर्घटना की स्थिति में पीड़ितों को मुआवजा देने की व्यवस्था करें।

Supreme Court ने निर्देश दिया है कि प्रत्येक राज्य सरकार अगले 8 सप्ताह में रिपोर्ट पेश करे,
जिसमें यह बताया जाए कि उनके राज्य में कितने आश्रय केंद्र हैं और कितने नए बनाए जा रहे हैं।


निष्कर्ष — सड़क सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम

सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला देश में सड़क सुरक्षा को लेकर एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।
यह न केवल यात्रियों की सुरक्षा के लिए अहम है, बल्कि पशुओं के जीवन की रक्षा के लिए भी समान रूप से आवश्यक है।

अब बारी है राज्य सरकारों की —
वे कितनी तेजी से इस आदेश को ज़मीन पर लागू करती हैं,
इस पर निर्भर करेगा कि आने वाले वर्षों में भारत के हाईवे वास्तव में सुरक्षित और पशु-मुक्त हो पाएंगे या नहीं।

India – Khabar Aangan

📢 तुरंत जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें:

📲 Connect Us on WhatsApp

⚠️ Disclaimer

यह लेख Supreme Court के आदेश और सार्वजनिक जानकारी पर आधारित है।
इसका उद्देश्य केवल समाचार और विश्लेषण प्रस्तुत करना है। Khabar Aangan किसी भी राजनीतिक दल या संस्था का समर्थन या विरोध नहीं करता।

इस खबर को शेयर करें
Khabar Aangan

Khabar Aangan Admin

Khabar Aangan एक स्वतंत्र डिजिटल न्यूज़ प्लेटफ़ॉर्म है, जो सूचना से सच्चाई तक की यात्रा को समर्पित है। हमारा उद्देश्य है—स्थानीय मुद्दों से लेकर राष्ट्रीय घटनाओं तक, हर खबर को गहराई, संदर्भ और निष्पक्षता के साथ प्रस्तुत करना। हम परंपरागत पत्रकारिता को आधुनिक दृष्टिकोण से जोड़ते हैं, ताकि पाठकों को मिले स्पष्ट, विश्वसनीय और प्रभावशाली जानकारी। चाहे बात हो प्रशासनिक विफलता की, या सरकारी संस्थानों में पारदर्शिता की, या सामाजिक बदलाव की—Khabar Aangan हर विषय को संवेदनशीलता और साहस के साथ उठाता है।

आपका छोटा सा सहयोग हमारी पत्रकारिता को नई मजबूती देता है।

GPay UPI Paytm AmazonPay Razorpay

WELCOME TO KHABAR AANGAN Suchna Se Sacchai Tak